दरभंगा: लंबे समय से बंद पड़ी रैयाम चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए समीक्षा समिति का गठन किया है। इस फैसले के बाद इलाके के गन्ना किसानों, पूर्व कर्मचारियों, मजदूरों और स्थानीय व्यापारियों में नई उम्मीद जगी है। वर्षों से मिल के पुनः संचालन की मांग उठती रही है और अब सरकार के इस कदम को उस दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
रैयाम चीनी मिल कभी मिथिलांचल की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में गिनी जाती थी। इस मिल से हजारों किसान सीधे जुड़े हुए थे, जबकि बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता था। मिल के बंद होने के बाद न केवल किसानों को अपने गन्ने की बिक्री में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी व्यापक असर पड़ा। स्थानीय बाजार, परिवहन व्यवसाय और छोटे व्यापारियों की आय भी इससे प्रभावित हुई।
सरकार द्वारा गठित समीक्षा समिति का उद्देश्य मिल की वर्तमान स्थिति का विस्तृत अध्ययन करना, उसकी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करना तथा पुनः संचालन की संभावनाओं का आकलन करना बताया जा रहा है। समिति तकनीकी, वित्तीय, प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं की समीक्षा करेगी। इसके बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
क्षेत्र के गन्ना किसानों का कहना है कि यदि रैयाम चीनी मिल दोबारा शुरू होती है तो उन्हें अपने उत्पाद की बिक्री के लिए दूर-दराज के जिलों की चीनी मिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे परिवहन लागत कम होगी और समय पर भुगतान मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। किसानों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर मिल चालू होने से गन्ने की खेती को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।
पूर्व कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि मिल फिर से संचालित होती है तो क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिल सकता है। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इस मामले पर क्षेत्र के भाजपा विधायक ने कहा कि सरकार ने रैयाम चीनी मिल के पुनरुद्धार की दिशा में ठोस कदम उठाया है। उनके अनुसार, समीक्षा समिति का गठन केवल औपचारिकता नहीं बल्कि पुनः संचालन की संभावनाओं को गंभीरता से परखने की प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने विश्वास जताया कि समिति की रिपोर्ट के बाद आगे सकारात्मक निर्णय लिए जा सकते हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि मिल आधुनिक तकनीक के साथ दोबारा शुरू होती है तो इसका लाभ केवल गन्ना किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे परिवहन, कृषि उपकरण, खाद-बीज, स्थानीय बाजार, छोटे उद्योग और अन्य संबंधित क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी बंद चीनी मिल को दोबारा शुरू करना आसान प्रक्रिया नहीं होती। इसके लिए मशीनों की स्थिति, वित्तीय निवेश, कानूनी मामलों, बुनियादी ढांचे और व्यावसायिक व्यवहार्यता का विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक होता है। यही कारण है कि सरकार ने पहले समीक्षा समिति गठित कर सभी पहलुओं का अध्ययन कराने का निर्णय लिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रैयाम चीनी मिल केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की आर्थिक पहचान रही है। वर्षों से बंद पड़ी मिल के कारण इलाके का विकास भी प्रभावित हुआ है। इसलिए वे चाहते हैं कि समीक्षा प्रक्रिया जल्द पूरी हो और पुनः संचालन को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
फिलहाल सरकार द्वारा गठित समिति अपने स्तर पर सभी आवश्यक बिंदुओं की समीक्षा करेगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि रैयाम चीनी मिल को किस मॉडल पर, किस समय सीमा में और किन संसाधनों के साथ दोबारा शुरू किया जा सकता है। लेकिन फिलहाल इस पहल ने किसानों, मजदूरों और स्थानीय लोगों के बीच एक बार फिर उम्मीद की नई किरण जरूर जगा दी है।










