Raj Kumar Singh (आरके सिंह) ने प्रशासनिक सेवा से लेकर राजनीति तक लंबा सफर तय करने के बाद अब एक नई भूमिका अपनाने का फैसला किया है। कड़क IAS अधिकारी के रूप में पहचान बनाने वाले और बाद में केंद्र में कद्दावर मंत्री रहे आरके सिंह अब वकालत के क्षेत्र में कदम रख रहे हैं।
पटना: भारत की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में एक लंबा और प्रभावशाली सफर तय करने के बाद वरिष्ठ पूर्व नौकरशाह और पूर्व केंद्रीय मंत्री राज कुमार सिंह (आर.के. सिंह) ने अब अपने करियर का नया अध्याय शुरू किया है। 1975 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रहे राज कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने का निर्णय लिया है, जिससे वे एक बार फिर सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़े हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार के आरा संसदीय क्षेत्र से हार के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थीं। लेकिन अब उन्होंने कानूनी पेशे में वापसी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में नई शुरुआत
राज कुमार सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य बन गए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि वे अब संवैधानिक और नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उनके अनुसार, उनका उद्देश्य लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी मंच पर योगदान देना है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वे राजनीति में हार के बाद एक वैकल्पिक भूमिका की तलाश में थे।
राज कुमार सिंह का करियर भारतीय प्रशासनिक सेवा में एक मजबूत पहचान के साथ शुरू हुआ। 1975 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं और बाद में देश के गृह सचिव जैसे शीर्ष पद तक पहुंचे। गृह सचिव रहते हुए उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी नीतियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें एक सख्त और निर्णायक प्रशासक के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने नीति कार्यान्वयन में कड़े फैसले लिए।
1990 का ऐतिहासिक घटनाक्रम: आडवाणी गिरफ्तारी
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राज कुमार सिंह का नाम राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार 1990 में उस समय चर्चा में आया जब उन्होंने बिहार के समस्तीपुर में तत्कालीन भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को रोकने और उन्हें गिरफ्तार करने में अहम भूमिका निभाई थी। यह घटना भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है और इसी के बाद राज कुमार सिंह को एक कड़क और निष्पक्ष अधिकारी के रूप में पहचान मिली।
सेवानिवृत्ति के बाद राज कुमार सिंह ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और बिहार की आरा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। वे 2014 और 2019 में लगातार दो बार लोकसभा पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उन्होंने देश के बिजली क्षेत्र में सुधारों और ग्रामीण विद्युतीकरण से जुड़ी योजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।
ऊर्जा क्षेत्र में योगदान
मंत्री के रूप में राज कुमार सिंह का कार्यकाल ऊर्जा सुधारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने ग्रामीण भारत में बिजली पहुंचाने और ऊर्जा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए। ‘सौभाग्य योजना’ और अन्य विद्युतीकरण अभियानों के माध्यम से देश के दूरदराज इलाकों तक बिजली पहुंचाने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।
2024 के लोकसभा चुनाव में राज कुमार सिंह को आरा सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। हार के बाद उन्होंने सरकार की कुछ नीतियों पर सार्वजनिक रूप से आलोचनात्मक रुख अपनाया, जिससे यह संकेत मिला कि वे सक्रिय राजनीति से कुछ दूरी बना सकते हैं। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू कर उन्होंने एक नया पेशेवर रास्ता चुना है।








