राजस्थान विधानसभा में हंगामा: नारेबाजी के बीच UCC बिल पेश, सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

विधानसभा के मानसून सत्र में शुक्रवार को हंगामे के बीच UCC बिल पेश हुआ। कांग्रेस ने विरोध में सदन का बहिष्कार किया और कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई।

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता बिल पेश किया गया। कांग्रेस विधायकों ने विरोध करते हुए सदन का बहिष्कार किया। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

जयपुर: राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस विधायकों की नारेबाजी और विरोध के बीच सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी UCC बिल विधानसभा में पेश किया। बिल पेश होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। दिनभर की कार्यवाही महज 66 मिनट चली।

प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने उठाए मुद्दे

शुक्रवार सुबह विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विपक्षी विधायकों को विधानसभा के मुख्य द्वार पर रोके जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस मामले पर सदन में चर्चा कराने की मांग की। जूली ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों के साथ विधानसभा परिसर में जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष ने इसके साथ ही CJP कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार से इस मामले में जवाब देने की मांग की और आरोप लगाया कि विपक्ष से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई के मामलों में सरकार का रवैया निष्पक्ष नहीं है।

हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कांग्रेस विधायकों का विरोध और तेज हो गया। विपक्षी विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

नारेबाजी के बीच दिखा सत्ता पक्ष और विपक्ष का टकराव

सदन में कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ पोस्टर लहराए और नारेबाजी की। विपक्ष की ओर से सरकार को लेकर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए गए। इसके जवाब में भाजपा विधायकों ने भी कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए।

दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के कारण सदन का माहौल काफी गरमा गया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन लगातार जारी नारेबाजी के कारण सामान्य संसदीय कामकाज प्रभावित रहा।

हंगामे के बीच प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही भी सीमित समय तक ही चल सकी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रश्नकाल में करीब पांच मिनट और शून्यकाल में लगभग 18 मिनट तक कार्यवाही हुई। इसके बाद सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा।

हंगामे के बीच UCC बिल विधानसभा में पेश

राजस्थान विधानसभा में राजनीतिक हंगामे के बीच सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) से संबंधित विधेयक पेश किया। बिल पेश किए जाने के दौरान विपक्षी विधायक विरोध कर रहे थे।

UCC का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और परिवार से जुड़े कुछ नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करने से संबंधित है। राजस्थान में इस विधेयक का विधानसभा में पेश होना राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

हालांकि, बिल पेश होने के दौरान सदन में विपक्ष की ओर से जोरदार विरोध जारी रहा। कांग्रेस विधायकों ने बिल पेश किए जाने के बाद सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किया और सदन से बाहर चले गए।

बिल के बाद कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

कांग्रेस विधायकों के बहिष्कार के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इस तरह मानसून सत्र का दूसरा दिन अपेक्षाकृत कम समय में ही समाप्त हो गया।

शुक्रवार की कार्यवाही कुल मिलाकर करीब 66 मिनट चली। इतनी कम अवधि में सदन का अधिकांश समय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे में बीता। विपक्ष ने जहां सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया, वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए।

टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा के बाहर और सदन के भीतर विपक्ष की ओर से उठाए गए मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने विधानसभा गेट पर कांग्रेस विधायकों को कथित तौर पर रोके जाने और CJP कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट के आरोपों पर सरकार से जवाब मांगा।

जूली का कहना था कि यदि किसी राजनीतिक संगठन या उसके कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की।

भाजपा विधायकों ने भी किया विरोध

विपक्ष के विरोध के जवाब में भाजपा विधायकों ने भी कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की। सदन में राहुल गांधी को लेकर भी आपत्तिजनक राजनीतिक नारे लगाए गए। इससे विधानसभा का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार नारेबाजी के कारण सदन में विधायी कामकाज प्रभावित हुआ। विधानसभा अध्यक्ष को बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।

66 मिनट की कार्यवाही में बढ़ा राजनीतिक तापमान

विधानसभा के दूसरे दिन की कार्यवाही भले ही सिर्फ 66 मिनट चली, लेकिन इस दौरान राजस्थान की राजनीति में कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। एक ओर सरकार ने UCC बिल पेश करके अपनी विधायी प्राथमिकता स्पष्ट की, वहीं कांग्रेस ने विरोध और बहिष्कार के जरिए सरकार के खिलाफ अपना रुख जाहिर किया।

विधानसभा में हुए घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट हुआ कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है। विधानसभा परिसर में विपक्षी विधायकों को कथित तौर पर रोके जाने और CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट के आरोपों ने राजनीतिक विवाद को और हवा दी है।

UCC बिल पर आगे की नजर

अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि राजस्थान विधानसभा में पेश किए गए UCC बिल पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है। बिल पर चर्चा और विधायी प्रक्रिया के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद और अधिक सामने आने की संभावना है।

विपक्ष पहले ही बिल के पेश किए जाने के तरीके और सदन में हुए हंगामे को लेकर सरकार को घेर चुका है। दूसरी ओर, सरकार के लिए इस महत्वपूर्ण विधेयक को आगे बढ़ाना एक प्रमुख राजनीतिक और विधायी चुनौती होगी।

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन का घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में UCC, विपक्षी प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक कार्यकर्ताओं से जुड़े विवाद प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं।

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