राजस्थान में निकाय चुनाव के बीच RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जयपुर में मंच साझा किया। दोनों नेताओं ने भाजपा और कांग्रेस के सामने तीसरा राजनीतिक विकल्प खड़ा करने का ऐलान किया। गठबंधन को विधानसभा चुनाव तक बढ़ाने के संकेत दिए।
जयपुर: राजस्थान की राजनीति में निकाय चुनाव के बीच एक नया राजनीतिक समीकरण सामने आया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जयपुर में एक मंच साझा कर भाजपा और कांग्रेस के सामने तीसरा राजनीतिक विकल्प खड़ा करने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के बयानों से संकेत मिला कि यह राजनीतिक साथ सिर्फ निकाय चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। AIMIM और RLP आने वाले समय में विधानसभा चुनाव तक साथ आगे बढ़ने की संभावनाएं तलाश सकते हैं। ओवैसी ने इसे राजस्थान की राजनीति में तीसरे विकल्प की शुरुआत बताया, जबकि बेनीवाल ने कहा कि जयपुर की धरती से नई राजनीति का आगाज हो रहा है।
दोनों नेता रविवार रात जयपुर के वार्ड 146 में AIMIM प्रत्याशी फिरोज बानो के समर्थन में आयोजित चुनावी सभा में एक साथ मंच पर पहुंचे।
ओवैसी बोले- भाजपा और कांग्रेस के बीच फंसी रही राजस्थान की राजनीति
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि राजस्थान की राजनीति लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के आसपास घूमती रही है। अब जनता के सामने एक तीसरा विकल्प देने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने निकाय चुनाव को मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उन वार्डों में RLP प्रत्याशियों के समर्थन की अपील की, जहां पार्टी चुनाव लड़ रही है।
ओवैसी ने भाजपा पर हिंदू-मुस्लिम के नाम पर तनाव और राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति को केवल धार्मिक मुद्दों तक सीमित रखने के बजाय जनता से जुड़े वास्तविक सवालों पर चर्चा होनी चाहिए।
AIMIM प्रमुख ने राजस्थान में शिक्षा, सरकारी स्कूलों की स्थिति, मूलभूत सुविधाओं और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने इन मुद्दों को लेकर राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए और कहा कि आम लोगों से जुड़े विषयों को राजनीतिक एजेंडे में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
बेनीवाल ने बताया राजस्थान की राजनीति में नई शुरुआत
हनुमान बेनीवाल ने ओवैसी के साथ गठजोड़ को राजस्थान की राजनीति में नई शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि जाट और मुस्लिम समुदाय पहले भी राजनीतिक रूप से साथ रहे हैं और आगे भी यह साथ बना रहेगा।
बेनीवाल ने राज्य सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उन्होंने पेपर लीक, किसानों की समस्याओं, अग्निवीर योजना और युवाओं के रोजगार का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि यह गठबंधन केवल चुनाव लड़ने के लिए नहीं है, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष करने के लिए भी आगे आएगा। बेनीवाल के बयान से संकेत मिला कि दोनों दल चुनावी सहयोग के साथ-साथ साझा राजनीतिक मुद्दों पर भी साथ काम करने की रणनीति बना सकते हैं।
निकाय चुनाव के बाद भी जारी रह सकता है गठबंधन
जयपुर के भट्टा बस्ती इलाके के वार्ड 146 में दोनों नेताओं का एक मंच पर आना महज स्थानीय चुनावी सभा नहीं माना जा रहा है। ओवैसी और बेनीवाल के बयानों से यह संकेत मिला है कि दोनों पार्टियां निकाय चुनाव के बाद भी राजनीतिक गठजोड़ को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।
राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही हैं। ऐसे में AIMIM और RLP का साथ राज्य की दो-दलीय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच तीसरा विकल्प पेश करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, इस गठबंधन की वास्तविक राजनीतिक ताकत का आकलन निकाय चुनाव के नतीजों के बाद ही ज्यादा स्पष्ट हो सकेगा।
मुस्लिम-जाट समीकरण पर नजर
ओवैसी की पार्टी राजस्थान में मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश करती रही है, जबकि हनुमान बेनीवाल की RLP की राजनीति में जाट, किसान और ग्रामीण मुद्दे प्रमुख रहे हैं।
ऐसे में दोनों दलों का साथ आना संभावित मुस्लिम-जाट राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों के समर्थन को एक साझा राजनीतिक मंच में बदलने की होगी।
राजस्थान में चुनावी राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए AIMIM और RLP का गठबंधन यदि निकाय चुनाव के बाद भी कायम रहता है, तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतियों पर पड़ सकता है।
![]()
भाजपा और कांग्रेस के लिए तीसरा मोर्चा कितनी चुनौती?
राजस्थान की सत्ता की राजनीति मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित रही है। ऐसे में तीसरे विकल्प के रूप में AIMIM और RLP का सामने आना दोनों प्रमुख दलों के लिए राजनीतिक चुनौती पैदा करने की कोशिश है।
हालांकि, तीसरे मोर्चे के सामने राजस्थान में संगठनात्मक विस्तार, सीटों पर प्रभाव, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और अलग-अलग सामाजिक समूहों को एक साथ जोड़ने जैसी कई चुनौतियां होंगी।
गठबंधन को अपनी राजनीतिक उपयोगिता साबित करने के लिए केवल कुछ इलाकों में प्रभाव दिखाने के बजाय व्यापक स्तर पर समर्थन हासिल करना होगा। निकाय चुनाव इसके लिए शुरुआती राजनीतिक परीक्षा साबित हो सकते हैं।
पेपर लीक से रोजगार तक मुद्दों पर फोकस
बेनीवाल ने अपने संबोधन में युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी। पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दे राजस्थान में लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं।
अग्निवीर योजना को लेकर भी RLP प्रमुख ने सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक संघर्ष को आगे बढ़ाया जाएगा।
वहीं ओवैसी ने शिक्षा, सरकारी स्कूलों, महिला सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार को घेरा। इससे संकेत मिलता है कि दोनों दल अपने गठबंधन की राजनीति को केवल जातीय या धार्मिक समीकरण तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय और जनहित के मुद्दों के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
निकाय चुनाव होगा गठबंधन की पहली परीक्षा
जयपुर से शुरू हुआ यह राजनीतिक गठजोड़ अब राजस्थान की राजनीति में कितना प्रभाव डाल पाएगा, इसकी पहली बड़ी परीक्षा निकाय चुनाव में होगी।
अगर दोनों दलों को चुनाव में अपेक्षित समर्थन मिलता है, तो गठबंधन को आगे विधानसभा चुनाव तक ले जाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। इसके विपरीत कमजोर चुनावी प्रदर्शन गठबंधन के विस्तार की राह में चुनौती बन सकता है।
फिलहाल ओवैसी और बेनीवाल ने भाजपा-कांग्रेस के सामने तीसरा विकल्प खड़ा करने का राजनीतिक संदेश दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों पार्टियां सीटों के बंटवारे, साझा मुद्दों और संगठनात्मक रणनीति पर किस तरह आगे बढ़ती हैं।
राजस्थान की राजनीति में इस नए समीकरण की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि AIMIM का राजनीतिक आधार और RLP का जाट-किसान प्रभाव कितनी मजबूती से एक-दूसरे के साथ जुड़ पाता है। निकाय चुनाव के परिणाम इस गठबंधन की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।









