Ram Mandir: CEO की नियुक्ति से बदलेगी अयोध्या मंदिर की व्यवस्था? दान विवाद के बाद प्रशासनिक ढांचे में किया बड़ा बदलाव

Ram Mandir Ayodhya: अयोध्या राम मंदिर की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। दान से जुड़े विवाद के बाद प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए CEO की नियुक्ति की

राम मंदिर को लेकर इन दिनों चल रही हलचल सिर्फ दान से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं है। 6 जुलाई 2026 को हुई श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में संगठन के 2020 में गठन के बाद से अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक बदलाव किए गए।

Ram Mandir Trust: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर प्रशासन को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब मंदिर में दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं और सुरक्षा व्यवस्था में खामियों को लेकर सवाल उठे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, CEO की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह राम मंदिर प्रबंधन को देश के अन्य बड़े धार्मिक संस्थानों की तरह अधिक पेशेवर और जवाबदेह बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

दान विवाद के बाद उठाया गया बड़ा कदम

राम मंदिर में दान प्रक्रिया से जुड़ी कथित चोरी के मामले ने ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। जांच में सामने आया कि दान राशि की गिनती और सुरक्षा से जुड़े कई नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। जांच एजेंसियों ने CCTV फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर कई मामलों की पहचान की। आरोप था कि कुछ कर्मचारियों ने दान में मिली नकदी को गलत तरीके से बाहर ले जाने की कोशिश की।

जांच के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, विदेशी मुद्रा और अन्य सामान बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत महसूस की।

SOP होने के बावजूद लागू करने में रही कमी

मंदिर प्रशासन और बैंक प्रतिनिधियों के बीच दान प्रबंधन को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई थी। इसमें कई सुरक्षा उपाय शामिल थे। इनमें:

  • दान पेटियों की निगरानी
  • CCTV व्यवस्था
  • बायोमेट्रिक उपस्थिति
  • कर्मचारियों की जांच
  • निजी सामान पर रोक
  • सुरक्षित काउंटिंग प्रक्रिया

जैसे नियम शामिल थे। हालांकि जांच में यह सामने आया कि कई जगह इन नियमों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं किया गया। यही कारण माना गया कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके क्रियान्वयन के लिए एक मजबूत प्रशासनिक तंत्र की आवश्यकता है।

CEO की भूमिका क्या होगी?

CEO की नियुक्ति के बाद मंदिर के रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी एक पेशेवर अधिकारी के हाथों में आ सकती है। इस मॉडल में ट्रस्ट नीतिगत फैसलों पर ध्यान देगा। CEO प्रशासनिक कामकाज संभालेगा। सुरक्षा, वित्त, मानव संसाधन और संचालन व्यवस्था को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जाएगा। देश के कई बड़े धार्मिक संस्थानों में इसी तरह की व्यवस्था पहले से मौजूद है। उदाहरण के तौर पर कई प्रमुख मंदिर बोर्डों में कार्यकारी अधिकारी या CEO जैसी भूमिका प्रशासन को व्यवस्थित करने के लिए बनाई गई है।

CEO चयन के लिए बनी सर्च कमेटी

ट्रस्ट ने CEO के चयन के लिए एक विशेष समिति गठित की है। यह समिति योग्य उम्मीदवारों की पहचान करेगी और उनके नाम ट्रस्ट के सामने रखेगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसे अधिकारी का चयन करना है, जिसके पास बड़े संस्थान के प्रबंधन, वित्तीय निगरानी और प्रशासनिक अनुभव हो। CEO पद के अलावा ट्रस्ट की हालिया बैठक में अन्य प्रशासनिक बदलाव भी किए गए।

कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से हटने का फैसला किया। इसके बाद अंतरिम व्यवस्था के तहत नए पदाधिकारी नियुक्त किए गए। ट्रस्ट अब भविष्य के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करना चाहता है, जिसमें निर्णय प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और जवाबदेह हो।

राम मंदिर ट्रस्ट को मिला कितना दान?

ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण और संचालन के लिए श्रद्धालुओं से बड़ी मात्रा में दान प्राप्त हुआ है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने जानकारी दी थी कि मार्च 2026 तक मंदिर को सैकड़ों करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ, जिसका उपयोग मंदिर निर्माण, रखरखाव और अन्य धार्मिक गतिविधियों में किया जा रहा है। इतनी बड़ी आर्थिक व्यवस्था को देखते हुए वित्तीय पारदर्शिता और मजबूत निगरानी की मांग लगातार उठती रही है।

राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या इसे सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत लाया जा सकता है। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने पहले एक फैसले में कहा था कि ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जा सकता, इसलिए यह RTI के दायरे में नहीं आता। हालांकि, इस फैसले पर बहस जारी है। कुछ लोगों का तर्क है कि ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के फैसले और केंद्र सरकार की योजना के तहत हुआ था, इसलिए इसकी सार्वजनिक जवाबदेही होनी चाहिए।

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