अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के माहौल में मनाया गया। भगवान श्रीराम की नगरी में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर राम मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की गई थीं। मध्यरात्रि में जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की बेला आई, मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। आरती, भजन-कीर्तन और शंख-घंटों की ध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने ‘जय कन्हैया, जय गोपाला’ और ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे लगाए। मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था की गई थी।
राम मंदिर में इस बार जन्माष्टमी का आयोजन कई मायनों में खास रहा। जन्माष्टमी पर मंदिर परिसर में पहली बार श्रीमद्भागवत के श्लोकों का पाठ कराने की तैयारी की गई थी। मंदिर ट्रस्ट की ओर से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ मनाने की व्यवस्था की गई। जन्माष्टमी के मौके पर रात 12 बजे मंदिर खोलने और कृष्ण जन्मोत्सव मनाने की जानकारी पहले ही दी गई थी। भगवान को विशेष भोग अर्पित किया गया, जिसमें करीब डेढ़ क्विंटल पंजीरी और 56 भोग की व्यवस्था प्रमुख रही।
जन्माष्टमी की रात राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। मध्यरात्रि के समय भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की प्रतीक्षा कर रहे भक्तों में खास उत्साह दिखाई दिया। जैसे ही जन्मोत्सव का समय आया, मंदिर में आरती और पूजा के साथ भगवान के प्राकट्य की खुशी मनाई गई। भक्तों ने हाथ जोड़कर भगवान श्रीकृष्ण से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की। ‘जय कन्हैया जय गोपाला’ के जयकारों के साथ पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।
जन्माष्टमी के अवसर पर राम मंदिर में धार्मिक परंपराओं का विशेष ध्यान रखा गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म को लेकर मध्यरात्रि की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। अयोध्या में 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाने की जानकारी दी गई थी। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग के कारण इस दिन कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। अयोध्या के राम मंदिर समेत प्रमुख मंदिरों में मध्यरात्रि में भगवान के प्राकट्य का उत्सव आयोजित किया गया।
राम मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान श्रीमद्भागवत का पाठ भी विशेष आकर्षण रहा। मंदिर परिसर में पहली बार श्रीमद्भागवत के अमर श्लोकों के पाठ की तैयारी की गई थी। इससे जन्माष्टमी का धार्मिक आयोजन केवल पूजा और आरती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके उपदेशों से जुड़े आध्यात्मिक प्रसंगों को भी श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
मंदिर में भगवान को पंजीरी और 56 भोग अर्पित करने की परंपरा भी निभाई गई। जन्मोत्सव के बाद भगवान के भोग और प्रसाद को श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया। जन्माष्टमी पर पंजीरी, माखन-मिश्री, फल, मिठाइयां और अन्य प्रसाद भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करने की परंपरा है। इसी धार्मिक भावना के साथ राम मंदिर में भी विशेष भोग की व्यवस्था की गई।
अयोध्या में जन्माष्टमी के मौके पर राम मंदिर के साथ-साथ शहर के अन्य मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ दिखाई दी। जगह-जगह कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर झांकियां सजाई गईं। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया गया। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। रात 12 बजे के आसपास मंदिरों में घंटे और घड़ियाल बजने लगे तथा भक्तों ने भगवान के जन्म की खुशी में जयकारे लगाए। उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, काशी, लखनऊ और अन्य शहरों में भी जन्माष्टमी का उत्सव धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया।
राम मंदिर में जन्माष्टमी का यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि अयोध्या की पहचान भगवान श्रीराम की नगरी के रूप में है, लेकिन यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को भी वैदिक और पारंपरिक तरीके से मनाया गया। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही हिंदू धार्मिक परंपरा में विष्णु के अवतार माने जाते हैं। ऐसे में राम जन्मभूमि परिसर में कृष्ण जन्मोत्सव के आयोजन ने श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव का माहौल बनाया।
जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं ने दिनभर व्रत रखा और रात में भगवान कृष्ण के जन्म के बाद व्रत खोलने की परंपरा निभाई। घरों में भी लोगों ने लड्डू गोपाल को झूले में विराजमान किया। मंदिरों में बाल गोपाल का अभिषेक कर उन्हें नए वस्त्र पहनाए गए और मुकुट, मोरपंख तथा बांसुरी से श्रृंगार किया गया। जन्म के बाद भक्तों ने भगवान को झूला झुलाया और आरती उतारी। देशभर में जन्माष्टमी के अवसर पर इसी तरह मध्यरात्रि में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया।
अयोध्या में जन्माष्टमी के दौरान श्रद्धालुओं के बीच खास उत्साह देखने को मिला। राम मंदिर में दर्शन और धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर भक्तों की आस्था देखते ही बन रही थी। मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का स्मरण किया गया। भक्तों ने भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन किए और अपनी मनोकामनाओं के साथ पूजा-अर्चना की।
जन्म के समय मंदिर में आरती के साथ वातावरण में भक्ति की लहर दौड़ गई। शंख और घंटियों की ध्वनि के बीच भगवान कृष्ण के प्राकट्य का उत्सव मनाया गया। भक्तों ने एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण विशेष आस्था और भावनाओं से जुड़ा रहा।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी मान्यता के अनुसार उनका जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी पर रात के समय विशेष पूजा और जन्मोत्सव आयोजित किया जाता है। इस वर्ष भी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग के चलते 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई गई। अयोध्या में राम मंदिर सहित अन्य मंदिरों में मध्यरात्रि में कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारी इसी धार्मिक परंपरा के अनुरूप की गई थी।
राम मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा के साथ भगवान राम की नगरी की आध्यात्मिक परंपरा भी दिखाई दी। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु कृष्ण भक्ति में डूबे नजर आए। जन्मोत्सव के दौरान जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। ‘जय कन्हैया, जय गोपाला’ के उद्घोष के साथ भक्तों ने भगवान के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
मध्यरात्रि के बाद भी धार्मिक माहौल बना रहा। भक्त भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में भजन और कीर्तन करते रहे। मंदिर में हुई आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। जन्मोत्सव के बाद भगवान को भोग लगाया गया और प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान भक्तों के चेहरे पर कृष्ण जन्म की खुशी साफ दिखाई दी।
अयोध्या में जन्माष्टमी का यह उत्सव धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहा। राम मंदिर परिसर में पहली बार श्रीमद्भागवत के श्लोकों का पाठ, विशेष भोग, मध्यरात्रि में कृष्ण जन्मोत्सव और आरती ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया। मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की ओर से की गई तैयारियों के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव पूरी श्रद्धा से मनाया।
इस तरह भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भक्ति, उल्लास और धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म की बेला पर मंदिर में आरती हुई और भक्तों ने ‘जय कन्हैया जय गोपाला’ के जयकारे लगाए। भगवान को विशेष भोग अर्पित किया गया और श्रद्धालुओं ने बाल गोपाल के जन्मोत्सव में शामिल होकर आशीर्वाद लिया। जन्माष्टमी की रात राम मंदिर परिसर में गूंजे कृष्ण भक्ति के जयकारों ने अयोध्या के धार्मिक वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।









