अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आठ आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
Ayodhya: राम मंदिर के दानपात्रों में जमा चढ़ावे के कथित गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज इस मुकदमे में मंदिर व्यवस्था और नकदी गणना से जुड़े कई कर्मियों को नामजद किया गया है। पुलिस अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
20 दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर
राम मंदिर के दानपात्रों से कथित धनराशि के गबन का मामला सामने आने के करीब 20 दिन बाद रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद यह कार्रवाई की गई। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया और मामले की जांच को आगे बढ़ाया गया।
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जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आरोपियों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
किन लोगों को बनाया गया आरोपी?
एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया है। इनमें ट्रस्ट महासचिव चंपतराय के पूर्व चालक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, नकदी गणना से जुड़े कर्मी अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र शामिल हैं।
जांच के दौरान अनुकल्प मिश्र के घर से लगभग 20 लाख रुपये, लवकुश मिश्र के यहां से करीब 10 लाख रुपये तथा अन्य कुछ आरोपियों के पास से भी नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस इन बरामद रकम और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें संपत्ति की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी या गबन की संपत्ति को छिपाने, आपराधिक षड्यंत्र और संगठित अपराध से संबंधित धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा पूजा स्थल में रखी संपत्ति की चोरी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए हैं।
इन धाराओं में दोष सिद्ध होने पर सात वर्ष के कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। अंतिम सजा का निर्धारण न्यायालय में सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।
एसआईटी जांच के बाद बढ़ी कार्रवाई
मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने कई दिनों तक ट्रस्ट पदाधिकारियों, कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों और नकदी गणना से जुड़े लोगों से पूछताछ की। टीम ने बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच करने के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी।
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में और किन लोगों की भूमिका सामने आती है तथा आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।










