बेंगलुरु में पूर्व कर्नाटक मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े की 100वीं जयंती पर शताब्दी समारोह आयोजित हुआ। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें महान राजनेता और संस्थान निर्माता बताया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हेगड़े के नाम पर मेडिकल कॉलेज और पंचायत पुरस्कार की घोषणा की।
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में शनिवार को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता रामकृष्ण हेगड़े की 100वीं जयंती के अवसर पर शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। विधान सौधा के बैंक्वेट हॉल में हुए कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत कई प्रमुख नेताओं और गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर हेगड़े के राजनीतिक जीवन, प्रशासनिक सुधारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में उनके योगदान को याद किया गया।
राधाकृष्णन ने हेगड़े को बताया महान राजनेता और संस्थान निर्माता
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रामकृष्ण हेगड़े को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें महान राजनेता, राष्ट्रवादी और ऐसे नेता के रूप में याद किया, जिन्होंने अपने बाद नेतृत्व की एक पूरी पीढ़ी तैयार की। उन्होंने कहा कि हेगड़े के नेतृत्व में कर्नाटक ने शासन और प्रशासन के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई और देश के सामने एक उदाहरण पेश किया।
राधाकृष्णन ने कहा कि हेगड़े का सबसे महत्वपूर्ण योगदान सत्ता और प्रशासन को आम लोगों के करीब ले जाना था। उन्होंने स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि हेगड़े की सोच सिर्फ सरकार चलाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे चाहते थे कि गांवों और स्थानीय समुदायों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक अधिकार मिले।
पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका
उपराष्ट्रपति ने कर्नाटक में जिला परिषदों, तालुक पंचायत समितियों, मंडल पंचायतों और न्याय पंचायतों से संबंधित 1985 के कानून को हेगड़े की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया। उनके मुताबिक, इस पहल ने स्थानीय स्तर पर शासन की संरचना को मजबूत किया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद की।
राधाकृष्णन ने कहा कि बाद में 73वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा मिला। उन्होंने हेगड़े की उस सोच को महत्वपूर्ण बताया, जिसमें स्थानीय निकायों को अधिक अधिकार और जिम्मेदारी देने की बात कही गई थी।
उनके मुताबिक, मजबूत राज्य देश को मजबूत बनाते हैं, मजबूत स्थानीय सरकारें राज्यों को ताकत देती हैं और सशक्त नागरिक स्थानीय शासन को मजबूत करते हैं। यही सोच लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने में मदद करती है।
हेगड़े की सादगी और जीवन के नजरिए को किया याद
राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में रामकृष्ण हेगड़े की सादगी और जीवन को देखने के उनके नजरिए से जुड़ी एक व्यक्तिगत स्मृति भी साझा की। उन्होंने बताया कि हेगड़े पैसे को सिर्फ संपत्ति या ऐश्वर्य के रूप में नहीं देखते थे।
हेगड़े के अनुसार, पैसे का वास्तविक अर्थ आरामदायक जीवन, अच्छा घर, बेहतर स्वास्थ्य, अच्छी शिक्षा और एक अच्छी कार जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा था। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह विचार उनके सरल व्यक्तित्व और व्यावहारिक जीवन-दृष्टि को दर्शाता है।
उन्होंने हेगड़े की जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर देने वाली राजनीति का भी उल्लेख किया। कर्नाटक में लोकायुक्त संस्था को मजबूत करने में उनकी भूमिका को राधाकृष्णन ने महत्वपूर्ण बताया।
बोले- महान नेता पीढ़ियों को प्रभावित करते हैं
रामकृष्ण हेगड़े को संस्थानों और नेताओं का निर्माता बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कुछ नेता किसी खास समय को बदलते हैं, जबकि संस्थान बनाने वाले नेता आने वाली कई पीढ़ियों को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने युवा पीढ़ी से हेगड़े के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। राधाकृष्णन ने कहा कि युवाओं को ईमानदारी, साहस, सार्वजनिक सेवा और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने जैसे मूल्यों को अपनाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ देश की सेवा करने का संदेश भी दिया।
मेडिकल कॉलेज का नाम रामकृष्ण हेगड़े के नाम पर होगा
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रामकृष्ण हेगड़े की स्मृति में कई घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि उत्तर कन्नड़ जिले में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का नाम रामकृष्ण हेगड़े के नाम पर रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि हर साल हेगड़े की जयंती के अवसर पर रामकृष्ण हेगड़े सर्वश्रेष्ठ पंचायत पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा बेंगलुरु के शिवराम कारंत लेआउट में एक प्रमुख सड़क का नाम भी उनके नाम पर रखने की बात कही गई।
इन घोषणाओं को हेगड़े की प्रशासनिक विरासत और स्थानीय शासन के क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मान देने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
शिवकुमार बोले- हेगड़े अनुयायी नहीं, नेता तैयार करते थे
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रामकृष्ण हेगड़े को ऐसे राजनेता के रूप में याद किया, जो केवल अपने समर्थक या अनुयायी तैयार करने में विश्वास नहीं रखते थे। उनके अनुसार, हेगड़े की खासियत यह थी कि उन्होंने कई नेताओं को आगे बढ़ने और सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
शिवकुमार ने कहा कि हेगड़े के पंचायती राज सुधारों का प्रभाव बाद में देश की संवैधानिक व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सोच ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि हेगड़े जाति आधारित राजनीति से ऊपर उठकर मूल्य आधारित राजनीति और सामाजिक न्याय में विश्वास रखते थे। उनके लिए सत्ता व्यक्तिगत लाभ का माध्यम नहीं बल्कि जनता की सेवा करने की जिम्मेदारी थी।
शिवकुमार ने अपने राजनीतिक सफर में हेगड़े के प्रभाव को याद किया
डीके शिवकुमार ने अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों को याद करते हुए कहा कि कनकपुरा में उनके राजनीतिक जीवन को आगे बढ़ाने में रामकृष्ण हेगड़े और पीजीआर सिंधिया का प्रभाव रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हेगड़े में प्रधानमंत्री बनने की क्षमता और राजनीतिक कद मौजूद था, लेकिन परिस्थितियां उनके पक्ष में नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि हेगड़े के सुशासन, पंचायती राज, विकास और जनसेवा के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं और इन मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
हेगड़े की राजनीतिक विरासत पर चर्चा
रामकृष्ण हेगड़े कर्नाटक की राजनीति में उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने प्रशासनिक सुधारों और विकेंद्रीकरण को अपनी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उनके कार्यकाल के दौरान स्थानीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए।
उनकी राजनीतिक विरासत सिर्फ मुख्यमंत्री के तौर पर लिए गए फैसलों तक सीमित नहीं रही। स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने और शासन में जनता की भागीदारी बढ़ाने की उनकी सोच ने राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हासिल की।
शताब्दी समारोह में वक्ताओं ने इसी विरासत को याद करते हुए कहा कि आज के दौर में भी जवाबदेही, विकेंद्रीकरण और जनभागीदारी जैसे मुद्दे उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
कई दिग्गज नेता समारोह में रहे मौजूद
रामकृष्ण हेगड़े की 100वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में देश और कर्नाटक के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया समेत कई अन्य गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
हेगड़े के परिवार के सदस्यों और उनके करीबी मित्रों की मौजूदगी ने समारोह को भावनात्मक रूप दिया। कार्यक्रम में उनके राजनीतिक योगदान, प्रशासनिक दृष्टिकोण और सार्वजनिक जीवन में स्थापित मूल्यों को याद किया गया।
रामकृष्ण हेगड़े की जन्म शताब्दी पर आयोजित यह कार्यक्रम कर्नाटक की राजनीतिक और प्रशासनिक विरासत में उनके योगदान को फिर से रेखांकित करने का अवसर बना। स्थानीय शासन को मजबूत करने, संस्थाओं को प्रभावी बनाने और सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों पर जोर देने की उनकी विचारधारा को वक्ताओं ने आज के लोकतांत्रिक भारत के लिए भी प्रासंगिक बताया।









