रतलाम में रेलवे Group-D PET में बिहार का फर्जी अभ्यर्थी गिरफ्तार, Retina Matching Test में खुली पोल

रतलाम में रेलवे Group-D PET के दौरान बिहार का फर्जी अभ्यर्थी पकड़ा गया। Retina Matching Test में फर्जीवाड़ा सामने आया, 2 सितंबर की घटना भी जांच में मिली।

रतलाम में रेलवे Group-D भर्ती के PET के दौरान बिहार का फर्जी अभ्यर्थी पकड़ा गया। Retina Matching Test में पहचान होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। जांच में आरोपी के पहले भी फिजिकल टेस्ट में शामिल होने की बात सामने आई।

रतलाम: रेलवे Group-D Level-1 भर्ती के लिए रतलाम रेलवे ग्राउंड पर चल रहे Physical Efficiency Test में एक फर्जी अभ्यर्थी पकड़ा गया। बिहार के रहने वाले आरोपी की पहचान Retina Matching Test के दौरान हुई। जांच में पता चला कि वह 2 सितंबर को भी इसी ग्राउंड पर किसी अन्य अभ्यर्थी की जगह फिजिकल टेस्ट में शामिल हुआ था। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

रतलाम में PET के दौरान पकड़ा गया फर्जी अभ्यर्थी

रतलाम में रेलवे Group-D Level-1 भर्ती प्रक्रिया के तहत आयोजित Physical Efficiency Test (PET) में एक फर्जी अभ्यर्थी पकड़ा गया है। आरोपी बिहार का रहने वाला बताया गया है और वह रेलवे ग्राउंड पर आयोजित फिजिकल टेस्ट में दूसरे उम्मीदवार की जगह शामिल होने पहुंचा था।

फिजिकल टेस्ट की प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए Retina Matching Test कराया जा रहा था। इसी प्रक्रिया में आरोपी की पहचान संदिग्ध पाई गई और जांच के बाद उसकी वास्तविक पहचान सामने आई। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर पुलिस के हवाले किया गया।

Retina Matching Test में सामने आया फर्जीवाड़ा

भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की पहचान की पुष्टि के लिए रेटिना मैचिंग की जा रही थी। इसी दौरान आरोपी की रेटिना डिटेल संबंधित अभ्यर्थी के रिकॉर्ड से मैच नहीं हुई। जांच आगे बढ़ने पर अधिकारियों को उसके फर्जी तरीके से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल होने का पता चला।

आरोपी से पूछताछ में उसके भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने और दूसरे उम्मीदवार के स्थान पर PET देने से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में आरोपी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

2 सितंबर को भी दूसरे अभ्यर्थी की जगह हुआ था शामिल

प्रारंभिक जांच में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। आरोपी 2 सितंबर को भी इसी रेलवे ग्राउंड पर आयोजित PET में किसी अन्य अभ्यर्थी की जगह शामिल हुआ था। इसके बाद वह दोबारा फिजिकल टेस्ट में पहुंचा, जहां Retina Matching Test के दौरान उसकी पहचान हो गई।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी को दूसरे उम्मीदवार की जगह PET में शामिल कराने की व्यवस्था किसने की थी। साथ ही संबंधित अभ्यर्थी और आरोपी के बीच संपर्क तथा इस प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

रेलवे भर्ती प्रक्रिया की सुरक्षा पर भी सवाल

फर्जी अभ्यर्थी के पकड़े जाने के बाद रेलवे भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों की पहचान जांच को लेकर भी ध्यान गया है। PET जैसे चरण में बायोमेट्रिक और अन्य पहचान संबंधी प्रक्रियाओं के जरिए अभ्यर्थियों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित की जाती है।

रतलाम में इस मामले में Retina Matching Test के दौरान फर्जी अभ्यर्थी की पहचान होना इसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। पुलिस और संबंधित अधिकारी अब पूरे मामले से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फर्जी अभ्यर्थी किसके लिए परीक्षा में शामिल हुआ था और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं है।

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