RBI का बड़ा फैसला: बैंकों के लिए CRR की दैनिक सीमा 90% से बढ़ाकर 99% की, 16 अक्टूबर से लागू होगा नियम

RBI New Rule: रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए CRR की दैनिक न्यूनतम सीमा 90% से बढ़ाकर 99% कर दी है। नया नियम 16 अक्टूबर से लागू होगा। जानें बैंकिंग सेक्टर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के लिए कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियम के तहत बैंकों को अपनी अनिवार्य नकद आरक्षित राशि का दैनिक आधार पर कम से कम 99 प्रतिशत बनाए रखना होगा, जबकि फिलहाल यह सीमा 90 प्रतिशत है।

RBI CRR New Rule 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति को देखते हुए कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) की दैनिक अनिवार्य सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। अब बैंकों को पखवाड़े के प्रत्येक दिन निर्धारित CRR का कम-से-कम 99 प्रतिशत बनाए रखना होगा, जबकि पहले यह सीमा 90 प्रतिशत थी। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, नया नियम 16 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। इस बदलाव का उद्देश्य बैंकों के नकदी प्रबंधन को निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाए रखना है।

RBI ने CRR की दैनिक सीमा क्यों बढ़ाई?

भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध नकदी और वित्तीय स्थिरता की समीक्षा करता है। इसी प्रक्रिया के तहत केंद्रीय बैंक ने CRR की दैनिक न्यूनतम सीमा में बदलाव किया है। इस फैसले से बैंकों को हर दिन अपने रिजर्व बैलेंस पर अधिक ध्यान देना होगा। पहले बैंक पखवाड़े के प्रत्येक दिन अनिवार्य CRR का कम-से-कम 90 प्रतिशत बनाए रख सकते थे। अब उन्हें इस सीमा को बढ़ाकर 99 प्रतिशत करना होगा। इसका अर्थ है कि बैंकों के लिए दैनिक आधार पर निर्धारित रिजर्व की राशि में कमी की गुंजाइश काफी कम हो जाएगी।

हालांकि, यह बदलाव CRR के मूल अनुपात को बढ़ाने के समान नहीं है। इसमें निर्धारित CRR का दैनिक आधार पर कितना हिस्सा बनाए रखना जरूरी है, उससे जुड़ा नियम बदला गया है। इसलिए इस फैसले को CRR दर में बढ़ोतरी के रूप में समझना सही नहीं होगा।

क्या होता है कैश रिजर्व रेश्यो (CRR)?

कैश रिजर्व रेश्यो यानी CRR वह न्यूनतम अनुपात है, जिसके तहत बैंकों को अपनी शुद्ध मांग और समय देनदारियों (NDTL) के एक निर्धारित हिस्से के बराबर नकदी भारतीय रिजर्व बैंक के पास रखनी होती है। इसमें ग्राहकों की जमा राशि और बैंक की अन्य संबंधित देनदारियों को नियामकीय नियमों के अनुसार शामिल किया जाता है।

CRR का इस्तेमाल बैंकिंग सिस्टम में नकदी को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। जब बैंकों को अपनी जमा राशि का एक हिस्सा RBI के पास रखना होता है, तो उतनी राशि का इस्तेमाल वे सामान्य ऋण वितरण या अन्य गतिविधियों के लिए नहीं कर सकते। बैंकों को निर्धारित अवधि के दौरान औसतन आवश्यक CRR बनाए रखना होता है। 

दैनिक न्यूनतम सीमा यह तय करती है कि पखवाड़े के किसी भी दिन रिजर्व बैलेंस कितना कम हो सकता है। नई व्यवस्था के तहत यह न्यूनतम स्तर 90 प्रतिशत से बढ़कर 99 प्रतिशत हो जाएगा।

बैंकिंग सिस्टम में 3.88 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 8 अक्टूबर 2026 तक भारतीय बैंकिंग सिस्टम में करीब 3.88 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी मौजूद थी। इतनी बड़ी मात्रा में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी को प्रबंधित करने के लिए RBI पिछले कुछ समय से विभिन्न मौद्रिक उपायों का इस्तेमाल कर रहा है। इन उपायों में वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी भी शामिल है। इसके माध्यम से केंद्रीय बैंक बैंकों से निर्धारित अवधि के लिए अतिरिक्त नकदी अपने पास रखने की व्यवस्था करता है। इससे बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त तरलता को कम करने में मदद मिल सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक अतिरिक्त नकदी की स्थिति समाप्त होने की संभावना जताई थी। उन्होंने CRR में बदलाव को प्राथमिकता वाला विकल्प नहीं बताया था। ऐसे में दैनिक न्यूनतम सीमा बढ़ाने का फैसला बैंकिंग सिस्टम की मौजूदा नकदी स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी कैसे बढ़ी?

बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त रुपये की नकदी आने के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमा से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल हैं। इन जमाओं के माध्यम से बैंकों को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। इसके बाद RBI के साथ किए गए विदेशी मुद्रा स्वैप लेनदेन के जरिए बैंकिंग सिस्टम में रुपये की नकदी उपलब्ध हो सकती है।

इसके अलावा, सरकार की ओर से वेतन, पेंशन और अन्य खर्चों के भुगतान से भी बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ सकती है। सरकारी खर्च और जमा राशि में होने वाले बदलावों का बैंकों की तरलता पर असर पड़ता है।

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