आईएएस की तैयारी में जुटी Rubina Dilaik का जीवन तब एक नया मोड़ लेता है जब वे मिस शिमला बनती हैं। हिमाचल प्रदेश के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली रूबीना के पिता डिस्ट्रिक्ट लैंग्वेज ऑफिसर और लेखक रहे हैं, जिससे उनकी भाषा और कला में गहरी रुचि विकसित हुई।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: टीवी इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री Rubina Dilaik ने अपने जीवन के संघर्ष, मानसिक स्वास्थ्य, करियर के उतार-चढ़ाव और मातृत्व से जुड़े अनुभवों पर खुलकर बात की है। एक Exclusive बातचीत में उन्होंने बताया कि सफलता के पीछे छिपी उनकी यात्रा आसान नहीं रही और उन्हें कई बार आत्म-संदेह, शारीरिक बदलाव और भावनात्मक चुनौतियों से गुजरना पड़ा।
छोटे शहर से मुंबई तक का सफर तय करने वाली रूबीना आज इंडियन टेलीविजन की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक हैं। लेकिन उनका यह सफर संघर्ष, आत्मविश्वास की लड़ाई और लगातार खुद को साबित करने की कहानी भी है।
हिमाचल से मुंबई तक: सपनों की लंबी यात्रा
हिमाचल प्रदेश के एक छोटे कस्बे से आने वाली रूबीना का बचपन साधारण परिवार में बीता। उनके पिता लेखक और डिस्ट्रिक्ट लैंग्वेज ऑफिसर थे, जिससे घर में साहित्य और भाषा का माहौल मिला। बचपन में रूबीना आईएएस बनने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन किस्मत उन्हें मनोरंजन की दुनिया में ले आई। वे बताती हैं कि जब उन्होंने पहली बार मुंबई का रुख किया, तब वे केवल 19 साल की थीं और परिवार, पढ़ाई और दोस्तों को पीछे छोड़कर अपने सपनों के पीछे भाग रही थीं। शुरुआती दिनों में उन्हें कई अस्वीकृतियों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
रूबीना ने अपने करियर की शुरुआत में कठिन अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें कई बार अपने लुक्स और व्यक्तित्व को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां मिलीं। एक ऑडिशन के दौरान उन्हें यह तक कहा गया कि उनका चेहरा “नेगेटिव” है और वे अभिनय के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उन्होंने बताया कि पहले टीवी शो के दौरान उन्हें अभिनय का ज्यादा अनुभव नहीं था, जिसके कारण एक ही सीन को कई बार रीटेक करना पड़ता था।
शुरुआती शूटिंग के पहले दिन ही उन्हें 17 रीटेक देने पड़े थे, जो उनके आत्मविश्वास के लिए बड़ा झटका था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने आत्म-संदेह को अपनी ताकत में बदल दिया।
सेल्फ-डाउट और मानसिक संघर्ष

रूबीना ने स्वीकार किया कि करियर के शुरुआती दौर से लेकर आज तक वे कई बार सेल्फ-डाउट से गुजरी हैं। टीनएज में उन्हें अपने वजन और लुक्स को लेकर असुरक्षा महसूस होती थी। उन्होंने बताया कि समय के साथ उन्होंने इन भावनाओं को समझा और खुद को स्वीकार करना सीखा। उनका मानना है कि सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि अंदरूनी आत्मविश्वास से आती है।
अपने जीवन के सबसे संवेदनशील दौर के बारे में बात करते हुए रूबीना ने बताया कि मां बनने के बाद उन्हें पोस्टपार्टम डिप्रेशन से गुजरना पड़ा। यह उनके लिए एक मानसिक रूप से बेहद कठिन समय था। उन्होंने कहा कि इस दौरान उनका शरीर और मन दोनों बदल गए थे। बालों की गुणवत्ता, त्वचा, वजन और मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा। कई बार उन्हें सुबह उठकर आईना देखने का भी मन नहीं करता था।
कभी वे अत्यधिक खाने लगती थीं तो कभी बिल्कुल भूख नहीं लगती थी। यह एक ऐसी स्थिति थी जिसे समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है, लेकिन यह एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य चुनौती है।
“मां बनना एक नई शुरुआत है”
रूबीना का मानना है कि मां बनने के बाद एक महिला का जीवन पूरी तरह बदल जाता है। उनके अनुसार, मातृत्व केवल एक जिम्मेदारी नहीं बल्कि एक “नया जन्म” है। वे कहती हैं कि उन्होंने हमेशा चाहा कि उनके बच्चे एक-दूसरे के साथ मजबूत भावनात्मक रिश्ता साझा करें, जैसा कि उन्होंने अपनी बहनों के साथ अनुभव किया है।
इन दिनों रूबीना अपने नए रियलिटी प्रोजेक्ट The Ward को लेकर चर्चा में हैं। यह शो गर्भवती महिलाओं और नई माताओं के अनुभवों पर आधारित है। इस शो का उद्देश्य महिलाओं को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना है जहां वे अपने अनुभव, भावनाएं, डर, मूड स्विंग्स और चुनौतियों को खुलकर साझा कर सकें। शो में 10 महिलाएं शामिल हैं जो अलग-अलग चरणों में अपनी प्रेग्नेंसी और मातृत्व यात्रा को साझा करती हैं।








