रूपाली चाकणकर की बढ़ीं मुश्किलें! NCP महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाए जाने की संभावना, जानें वजह

एनसीपी में रूपाली चाकणकर की मुश्किलें बढ़ीं, महिला प्रदेशाध्यक्ष पद पर खतरा। पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक हित में संभावित हटाने का फैसला लिया।

एनसीपी महिला प्रदेशाध्यक्ष रूपाली चाकणकर के पद पर खतरा बढ़ गया है। कथित संबंधों और राजनीतिक विवाद के कारण पार्टी नेतृत्व ने उनकी भूमिका पर सवाल उठाए हैं। आगामी चुनाव और संगठनात्मक हित को देखते हुए हटाने पर विचार किया जा रहा है।

Mumbai: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। एनसीपी (अजित पवार गुट) की महिला प्रदेशाध्यक्ष रूपाली चाकणकर अब अपने पद को खो सकती हैं। यह स्थिति तब सामने आई है जब स्वयंभू बाबा अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद उनके और रूपाली के कथित संबंधों को लेकर राजनीतिक विवाद उभरकर सामने आया। इससे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में रूपाली की भूमिका और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, रूपाली चाकणकर पहले ही महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुकी हैं। अब पार्टी के अंदरूनी चर्चा और आगामी चुनावी रणनीति को देखते हुए, उन्हें एनसीपी महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से भी हटाने की तैयारी की जा रही है। यह कदम पार्टी की छवि और संगठनात्मक मजबूती को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

एनसीपी में शीर्ष नेतृत्व की बैठक

रूपाली चाकणकर के भविष्य को लेकर एनसीपी में उच्चस्तरीय बैठक हुई। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल सहित कई शीर्ष नेता 'देवगिरी' बंगले में इस बैठक में शामिल हुए। बैठक में रूपाली और अशोक खरात के संबंधों से पैदा हुए राजनीतिक विवाद और पार्टी की छवि पर पड़ने वाले प्रभाव पर विस्तार से चर्चा हुई।

सूत्रों ने बताया कि बैठक में यह निर्णय लगभग तय हुआ कि पार्टी के संगठनात्मक हितों के चलते रूपाली को महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाना आवश्यक हो सकता है। बैठक में यह भी माना गया कि उनके पद पर बने रहने से आगामी चुनावों में विपक्ष को आरोप लगाने का मौका मिल सकता है, जिससे पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है।

इस्तीफे के पीछे राजनीतिक दबाव

रूपाली चाकणकर ने राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा व्यक्तिगत कारणों और निष्पक्ष जांच के हवाले से दिया था। हालांकि, पार्टी सूत्रों का मानना है कि उनका इस्तीफा केवल संगठनात्मक दबाव और राजनीतिक परिस्थितियों का परिणाम है। आगामी चुनावों में उनके पद पर बने रहने से पार्टी को नकारात्मक प्रचार और विपक्षी हमलों का सामना करना पड़ सकता है।

पार्टी के अंदर यह माना जा रहा है कि रूपाली का संगठनात्मक पद पर बने रहना अब 'लायबिलिटी' बन चुका है। विरोधियों ने उन पर अशोक खरात को संरक्षण देने और मामले में सहयोग देने के आरोप लगाए हैं। इसके चलते पार्टी ने उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।

महिला विंग और संगठनात्मक प्रभाव

रूपाली चाकणकर महिला नेतृत्व और पार्टी की महिला विंग में अहम भूमिका निभा रही थीं। उनके हटने से महिला संगठन में अस्थिरता आ सकती है, लेकिन पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यह कदम आवश्यक है ताकि संगठन की छवि को सुरक्षित रखा जा सके। पार्टी नेताओं का कहना है कि महिला नेतृत्व के मजबूत उम्मीदवारों को नए सिरे से नेतृत्व दिया जा सकता है, जिससे महिला संगठन का कामकाज प्रभावित न हो।

साथ ही, पार्टी यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि आगामी चुनावों में किसी भी तरह का विवाद उनके अभियान और वोटरों पर न पड़े। इस फैसले से पार्टी को राजनीतिक नुकसान से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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