रूस से तेल खरीद जारी रखने का भारत का रुख, MEA ने दी स्पष्ट प्रतिक्रिया

MEA ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से तेल खरीद जारी रखेगा। नीति राष्ट्रीय हितों और 1.4 अरब भारतीयों की जरूरतों पर आधारित है।

MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत रूस से तेल खरीद जारी रखेगा। यह निर्णय देश की ऊर्जा सुरक्षा और 1.4 अरब भारतीयों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। नीति किसी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होगी।

New Delhi: भारत सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सरकार का मुख्य उद्देश्य है। रूस से तेल आयात पर उठ रहे सवालों के बीच MEA ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा नीति को किसी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होने देगा और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति तय करेगा।

1.4 अरब भारतीयों की एनर्जी सिक्योरिटी सबसे बड़ी प्राथमिकता

MEA के प्रवक्ता ने बताया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति पूरी तरह से 1.4 अरब भारतीयों की आवश्यकताओं पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, "सरकार ने कई मौकों पर स्पष्ट किया है कि भारतीयों की एनर्जी सिक्योरिटी हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितताओं और बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल को देखते हुए हम अपने ऊर्जा स्रोत को डाइवर्सिफाई करने की रणनीति अपनाते हैं। इस नीति के तहत ही सभी फैसले लिए जाते हैं और आगे भी लिए जाएंगे।"

रांधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत के निर्णय पूरी तरह व्यावहारिक और राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव या किसी राजनीतिक गाइडलाइन के आधार पर ऊर्जा नीति में बदलाव नहीं किया जाएगा।

रूस भारत का महत्वपूर्ण ऊर्जा पार्टनर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस भारत के लिए लंबे समय से ऊर्जा क्षेत्र में एक भरोसेमंद साझेदार रहा है। उन्होंने कहा, "2022 से रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है। वर्तमान में भारत की कुल तेल आयात में रूस का योगदान लगभग 40 फीसदी है। इससे पहले भारत मुख्य रूप से मध्य पूर्वी देशों जैसे सऊदी अरब और इराक पर निर्भर था।"

रूस से तेल खरीद जारी रखने का भारत का रुख, MEA ने दी स्पष्ट प्रतिक्रिया

जायसवाल ने यह भी बताया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संतुलित और स्वतंत्र नीति अपनाता रहेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार और आपूर्ति शृंखला की परिस्थितियों के अनुसार भारत अपने निर्णय लेता है।

वेनेजुएला के साथ ऊर्जा संबंध

MEA प्रवक्ता ने वेनेजुएला का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "वेनेजुएला भारत का लंबे समय से ऊर्जा और तेल क्षेत्र में पार्टनर रहा है। 2019-20 तक हम वहां से तेल आयात कर रहे थे, लेकिन वैश्विक प्रतिबंधों के कारण रोकना पड़ा। फिर 2023-24 में तेल खरीदना शुरू किया गया, लेकिन पुनः प्रतिबंधों के चलते इसे स्थगित किया गया। भारत किसी भी देश से तेल खरीदते समय अपने राष्ट्रीय हितों और कमर्शियल फायदों को प्राथमिकता देता है।"

जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सम्मान करता है, लेकिन अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए किसी भी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।

भारत की रणनीति

विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा नीति को संतुलित तरीके से आगे बढ़ा रहा है। इसके तहत भारत विविध स्रोतों से तेल और गैस आयात करता है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक भंडार बनाए रखता है।

MEA के अनुसार, भारत का दृष्टिकोण व्यावहारिक और दूरदर्शी है। रूस के अलावा भारत मध्य पूर्वी देशों, अमेरिका और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से भी ऊर्जा आयात करता है। इस नीति का उद्देश्य केवल कीमत पर निर्भर नहीं रहना बल्कि लगातार आपूर्ति और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय

जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं। उन्होंने कहा, "हम किसी भी दबाव या राजनीतिक बयानबाजी से प्रभावित नहीं होंगे। हमारी प्राथमिकता 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। वैश्विक परिदृश्य और आपूर्ति शृंखला की स्थिति के अनुसार ही हम अपने ऊर्जा सोर्स को डाइवर्सिफाई करेंगे।"

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