राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वर्दी और शारीरिक अभ्यास होने के बावजूद संघ कोई ‘अर्धसैनिक’ संगठन नहीं है।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर लंबे समय से चली आ रही भ्रांतियों पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्दी पहनने, पथ संचलन और शारीरिक अभ्यास करने के बावजूद RSS कोई अर्धसैनिक संगठन नहीं है। उनका कहना है कि संघ की पहचान और भूमिका को सतही नजर से देखने के बजाय उसके मूल उद्देश्य को समझना जरूरी है।
एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को जोड़ने, उसमें नैतिकता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति जैसे गुण विकसित करने का कार्य करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का लक्ष्य भारत को एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है, ताकि देश भविष्य में किसी भी विदेशी शक्ति के अधीन न जाए।
वर्दी का मतलब अर्धसैनिक नहीं होता - संघ प्रमुख
संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि RSS की वर्दी और अनुशासन को गलत संदर्भ में देखा जाता है। भागवत ने कहा, हम वर्दी पहनते हैं, पथ संचलन करते हैं और दंड अभ्यास करते हैं। लेकिन अगर कोई इसे अर्धसैनिक संगठन मानता है, तो यह एक बड़ी भूल है। उन्होंने बताया कि संघ का स्वरूप विशिष्ट है और उसे समझना आसान नहीं है।
RSS न तो किसी सेना की तरह कार्य करता है और न ही उसका उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन करना है। संघ का काम सामाजिक चेतना जागृत करना और नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

RSS के खिलाफ गढ़े जा रहे विमर्श पर सवाल
मोहन भागवत ने कहा कि संघ के बारे में एक गलत और भ्रामक विमर्श लंबे समय से गढ़ा जा रहा है। उन्होंने आधुनिक सूचना संस्कृति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आज लोग किसी विषय की गहराई में जाने के बजाय सतही स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं। उन्होंने कहा, आजकल लोग सही जानकारी के लिए विश्वसनीय स्रोतों तक नहीं जाते। वे बस विकिपीडिया देख लेते हैं, जबकि वहां दी गई हर जानकारी सही हो, यह जरूरी नहीं।
भागवत के अनुसार, जो लोग भरोसेमंद और प्रामाणिक स्रोतों से RSS को समझेंगे, उन्हें संघ की वास्तविक भूमिका और उद्देश्य स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
RSS के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए संघ प्रमुख ने उस धारणा को भी खारिज किया कि संघ किसी विरोध या प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप बना। उन्होंने कहा कि संघ न तो किसी के खिलाफ है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा करता है।
भागवत ने कहा, संघ किसी प्रतिक्रिया में नहीं बना है। हम किसी से मुकाबला करने या किसी विचारधारा से लड़ने के लिए नहीं हैं। उनके अनुसार, RSS का उद्देश्य समाज को संगठित करना और राष्ट्र के दीर्घकालिक हितों के लिए काम करना है।
अंग्रेज पहले आक्रमणकारी नहीं थे - भागवत
इतिहास पर टिप्पणी करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि अंग्रेज भारत पर हमला करने वाले पहले विदेशी नहीं थे। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बार बाहर से आए सीमित संख्या में लोगों ने भारत को पराजित किया। भागवत ने कहा, वे न हमसे अधिक समृद्ध थे और न ही हमसे अधिक सदाचारी। फिर भी वे बार-बार हमें हमारे ही घर में हराते रहे। ऐसा सात बार हुआ और अंग्रेज आठवें आक्रांता थे।
उन्होंने इस पर सवाल उठाया कि अगर भारत स्वतंत्र हुआ है, तो उसकी आजादी की स्थायित्व की गारंटी क्या है। उनके अनुसार, इतिहास से सीख लेना और आत्ममंथन करना बेहद आवश्यक है।











