कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने साथियों सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को लेकर बयान दिया है। रविवार को उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि आशु और सौरव की गिरफ्तारी से जुड़े मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है।
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पार्टी से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दोनों को हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है, इसके बावजूद उनकी रिहाई की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है।
दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर आरोप लगाया कि इस देरी का उद्देश्य अदालती कार्यवाही को लंबा खींचना है, ताकि दोनों को जल्द राहत न मिल सके। हालांकि, ये आरोप CJP संस्थापक की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी का क्या है मामला?
सौरव दास और आशुतोष रांका को CJP की ओर से प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इसके बाद उनकी रिहाई और मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया को लेकर पार्टी की ओर से सवाल उठाए जाने लगे।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने रविवार को इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई के कारण दोनों की रिहाई में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि हिरासत जारी रखने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है, तो दोनों को बाहर आने से रोकने के लिए अनावश्यक प्रक्रियागत बाधाएं खड़ी नहीं की जानी चाहिए। दीपके ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी इस मामले को कानूनी और संगठनात्मक स्तर पर आगे बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
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अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
अभिजीत दीपके ने एक्स पर साझा अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि प्रशासन के पास सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल में रखने का कोई वैध आधार नहीं है। उनके मुताबिक, रिहाई की प्रक्रिया में हो रही देरी दोनों को हिरासत में बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है। CJP संस्थापक ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया को समय पर पूरा किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि सुनवाई में देरी से दोनों को राहत मिलने की संभावना प्रभावित हो रही है।
हालांकि, हिरासत की वैधता और रिहाई में देरी के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित अदालत के आदेशों, प्रशासनिक रिकॉर्ड और मामले की वास्तविक कानूनी स्थिति के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी उठाए सवाल
इस मामले की सुनवाई के दौरान CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी प्रक्रियागत देरी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सुनवाई निर्धारित समय पर नहीं हो सकी, जबकि संबंधित पक्ष जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर चुके थे। रत्ना सिंह के अनुसार, सभी पक्ष सुबह से मौजूद थे और सुनवाई दोपहर 12 बजे निर्धारित थी। उन्होंने दावा किया कि शाम करीब पांच बजे तक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत कक्ष में नहीं पहुंचे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मजिस्ट्रेट के पहुंचने के बाद भी सुनवाई नहीं की गई। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान मजिस्ट्रेट ने एक धमकी भरे संदेश मिलने की बात कही थी। CJP की लीगल हेड का आरोप है कि इसके बाद रिहाई के मुद्दे के बजाय उस संदेश पर चर्चा होने लगी।
इन आरोपों के संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और अदालत की आधिकारिक कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुनवाई में देरी किन परिस्थितियों में हुई।










