भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने Shanghai Cooperation Organisation (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में वैश्विक शांति, स्थिरता और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का आह्वान किया।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच राजनाथ सिंह ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि आजकल “न्यू वर्ल्ड ऑर्डर” की चर्चा तो बहुत हो रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या दुनिया को नए ढांचे की जरूरत है या फिर एक ज्यादा व्यवस्थित और संतुलित व्यवस्था की।राजनाथ सिंह के अनुसार, दुनिया को ऐसी प्रणाली चाहिए जहां हर व्यक्ति को सम्मान मिले, मतभेद संवाद के जरिए सुलझें और वे किसी बड़े विवाद या विनाश का कारण न बनें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज की सबसे बड़ी चुनौती किसी व्यवस्था की कमी नहीं है, बल्कि पहले से स्थापित नियमों और सिद्धांतों पर लगातार सवाल उठाने की प्रवृत्ति है।
“न्यू वर्ल्ड ऑर्डर” पर उठाए सवाल
बैठक को संबोधित करते हुए Rajnath Singh ने कहा कि आज के समय में “न्यू वर्ल्ड ऑर्डर” शब्द का अक्सर इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि दुनिया को किसी नए ढांचे की आवश्यकता हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली जरूरत एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था की है, जहां हर देश और व्यक्ति को समान सम्मान मिले और मतभेद संघर्ष में न बदलें।
उनके अनुसार, वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि स्थापित नियमों और सिद्धांतों पर लगातार उठते सवाल हैं, जो वैश्विक संतुलन को कमजोर कर रहे हैं।

कूटनीति और संवाद पर दिया जोर
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि दुनिया को युद्ध और हिंसा के रास्ते से हटाकर शांति और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी देश की वास्तविक शक्ति कमजोरों पर दबाव बनाने में नहीं, बल्कि उनकी रक्षा करने में निहित होती है। यह दृष्टिकोण वैश्विक सहयोग और मानवता के मूल्यों को मजबूत करता है।
Shanghai Cooperation Organisation को दुनिया की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला मंच बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इस संगठन की जिम्मेदारी केवल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने की भी है। उन्होंने सदस्य देशों से अपील की कि वे सहयोग, पारस्परिक सम्मान और साझा सुरक्षा के सिद्धांतों पर काम करें, ताकि दुनिया में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।
आतंकवाद को बताया सबसे बड़ा खतरा
अपने भाषण में Rajnath Singh ने आतंकवाद, कट्टरपंथ और चरमपंथ को वर्तमान समय की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को अब दंड से बचने नहीं दिया जाएगा। भारत की “जीरो टॉलरेंस” नीति इस बात का संकेत है कि आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
रक्षा मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी देते हुए कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म या देश नहीं होता और निर्दोष लोगों की हत्या किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों (सेफ हेवन) को खत्म करने के लिए मिलकर काम करें और ऐसे किसी भी प्रयास को अस्वीकार करें जो आतंकवाद को राजनीतिक समर्थन या वैधता प्रदान करता हो।










