भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज शेफाली वर्मा को जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में आईसीसी की आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में आधिकारिक चेतावनी दी गई है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा को जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में अपने व्यवहार के कारण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। आईसीसी ने आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में उन्हें आधिकारिक चेतावनी दी है। इसके साथ ही उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ दिया गया है। यह घटना 18 अक्टूबर 2026 को रायपुर में खेले गए भारत और जिम्बाब्वे के बीच दूसरे टी20 मुकाबले के दौरान हुई।
आईसीसी के अनुसार, शेफाली का व्यवहार खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के लिए निर्धारित आचार संहिता के लेवल-1 के उल्लंघन के दायरे में आया। हालांकि, इस कार्रवाई का असर मैच में उनके प्रदर्शन पर नहीं पड़ा। उन्होंने मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारत की जीत में अहम योगदान दिया। भारतीय टीम ने इस जीत के साथ तीन मैचों की टी20 सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली।
कैच छूटने के बाद नाराज हुईं शेफाली वर्मा
मैच के दौरान यह घटना भारत की गेंदबाजी पारी के 12वें ओवर में हुई। श्री चरणी की गेंद पर जिम्बाब्वे की बल्लेबाज चिपो मुगेरी-तिरिपानो ने मिड-ऑफ की दिशा में शॉट खेला। इस दौरान शेफाली वर्मा के पास कैच लेने का मौका था, लेकिन वह इसे पकड़ने में नाकाम रहीं। कैच छूटने से निराश शेफाली ने गुस्से में गेंद जमीन पर फेंक दी। आईसीसी ने उनके इस व्यवहार को नियमों के खिलाफ माना।
खिलाड़ियों से मैदान पर खेल भावना और अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। इसी वजह से मैच के दौरान उपकरणों या मैदान पर मौजूद अन्य सामान के अनुचित इस्तेमाल से संबंधित नियम के तहत उन पर कार्रवाई की गई।
ICC की आचार संहिता के किस नियम के तहत हुई कार्रवाई?
आईसीसी ने शेफाली वर्मा को खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की आचार संहिता के अनुच्छेद 2.2 के उल्लंघन का दोषी माना। यह प्रावधान अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान क्रिकेट उपकरणों, कपड़ों या मैदान पर मौजूद अन्य सामान के दुरुपयोग से संबंधित है। शेफाली ने अपना उल्लंघन स्वीकार कर लिया और आईसीसी मैच रेफरी पैनल की सदस्य जीएस लक्ष्मी की ओर से प्रस्तावित सजा को भी मान लिया। ऐसे में मामले की औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले 24 महीनों में यह उनका पहला ऐसा उल्लंघन था।
यह कार्रवाई खिलाड़ियों को मैदान पर अपने व्यवहार को लेकर सतर्क रहने का संदेश भी देती है। मैच के दौरान दबाव और निराशा स्वाभाविक हैं, लेकिन खिलाड़ियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें और खेल के नियमों का पालन करें।
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क्या डिमेरिट पॉइंट से लग सकता है प्रतिबंध?
आईसीसी की आचार संहिता के तहत डिमेरिट पॉइंट खिलाड़ियों के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में दर्ज किए जाते हैं। ये अंक निर्धारित अवधि तक रिकॉर्ड में बने रहते हैं और बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर खिलाड़ी के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। नियमों के मुताबिक, यदि कोई खिलाड़ी 24 महीने के भीतर चार या उससे अधिक डिमेरिट पॉइंट हासिल करता है, तो उन्हें सस्पेंशन पॉइंट में बदला जा सकता है।
दो सस्पेंशन पॉइंट होने पर खिलाड़ी को एक टेस्ट, दो वनडे या दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों से निलंबित किया जा सकता है। कौन-सा प्रतिबंध लागू होगा, यह संबंधित नियमों और खिलाड़ी के प्रारूप के अनुसार तय किया जाता है। शेफाली के मामले में फिलहाल एक डिमेरिट पॉइंट जोड़ा गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि उन पर तत्काल मैच प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, भविष्य में अनुशासन संबंधी उल्लंघन दोहराने पर उनके रिकॉर्ड का महत्व बढ़ सकता है।
शेफाली की तूफानी पारी से भारत ने जीती सीरीज
अनुशासनात्मक कार्रवाई के बावजूद दूसरे टी20 मुकाबले में शेफाली वर्मा का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने केवल 25 गेंदों पर 55 रन बनाकर भारतीय पारी को तेज शुरुआत दिलाई। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने लक्ष्य का पीछा करने में टीम की राह आसान की। मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे की टीम निर्धारित ओवरों में आठ विकेट खोकर 102 रन बना सकी। इसके जवाब में भारतीय टीम ने नौवें ओवर तक लक्ष्य हासिल कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल की।










