Shashi Tharoor बोले: भारत चुप नहीं रह सकता, पाकिस्तान की मध्यस्थता पर दिया बड़ा बयान

Shashi Tharoor ने कहा कि भारत चुप नहीं रह सकता और पाकिस्तान की मध्यस्थता को नुकसान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके इस बयान ने कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की भूमिका पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। थरूर ने कहा कि भारत सिर्फ मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता और उसे अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहना चाहिए। 

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की भूमिका पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। थरूर ने कहा कि भारत सिर्फ मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता और उसे अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता को भारत के लिए नुकसान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर क्या कहा थरूर ने

सीएनएन-न्यूज18 से बातचीत में शशि थरूर ने कहा कि यदि पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाता है, तो इसे भारत के खिलाफ किसी कदम के रूप में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कभी-कभी पाकिस्तान यह पहल स्वयं नहीं करता, बल्कि अमेरिका के दबाव या निर्देश पर ऐसा कर सकता है।

थरूर ने कहा, भारत को व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। पाकिस्तान की मध्यस्थता को नुकसान नहीं मानना चाहिए, लेकिन हमें अपने विकल्प खुले रखने होंगे और हालात के अनुसार रणनीति तय करनी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान भारत की प्रत्यक्ष वार्ता में भागीदारी का समर्थन नहीं है, बल्कि केवल रणनीतिक विकल्पों की आवश्यकता पर जोर है।

भारत के हितों पर जोर

थरूर ने कहा कि पश्चिम एशिया में भारत के बड़े रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा संबंधी हित जुड़े हुए हैं। भारत को इस क्षेत्र में अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को मध्यस्थता में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार अपने कदम सोच-समझकर उठाने चाहिए।

थरूर ने बताया, भारत का शांत रहना कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक निर्णय है। सरकार को किसी भी कदम को राष्ट्रीय हितों के अनुरूप रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों में कोई नकारात्मक असर न पड़े।

भारत-अमेरिका संबंध अब भी महत्वपूर्ण

शशि थरूर ने भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह संबंध विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ है और किसी भी तरह की नकारात्मकता इसे कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अपनी विदेश नीति में व्यवहारिक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

थरूर ने कहा कि अगर पाकिस्तान की मध्यस्थता विफल होती है, तो भारत को अपनी रणनीति के अनुसार विकल्पों का मूल्यांकन करना चाहिए। इसके लिए भारत को अपने कूटनीतिक और रणनीतिक विकल्पों को खुला रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कदम से भारत के हितों या क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान नहीं होना चाहिए।

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