इस साल नोबेल पुरस्कार भारतीय मूल की प्रख्यात न्यायविद और संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकारों की पूर्व उच्चायुक्त नवानेथम (नवी) पिल्लई को मिला है। हालांकि, उनके सम्मान को लेकर भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बधाई संदेश साझा नहीं किए जाने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नाराजगी जताई है।
Nobel Peace Prize Controversy: भारतीय मूल की न्यायविद नवानेथम ‘नवी’ पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत सरकार की ओर से उन्हें बधाई संदेश नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार के रवैये की आलोचना की।
वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पिल्लई को बधाई देने का आग्रह किया है। इस मुद्दे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले भारतीय मूल के व्यक्तित्वों को सम्मान देने और सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।
नवी पिल्लई को बधाई नहीं मिलने पर क्यों नाराज हुए शशि थरूर?
शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर नवी पिल्लई से जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि उनके नोबेल शांति पुरस्कार जीतने के कई दिन बाद भी भारत सरकार की ओर से बधाई संदेश सामने नहीं आया। उन्होंने इस पर निराशा व्यक्त की और सरकार के फैसले की आलोचना की। थरूर के अनुसार, पिल्लई का जीवन मानवाधिकारों, अंतरराष्ट्रीय न्याय और कानून के शासन को मजबूत करने के प्रयासों के लिए समर्पित रहा है। ऐसे में उनकी उपलब्धि को सम्मान देना महत्वपूर्ण है। थरूर ने इससे पहले भी पिल्लई को पुरस्कार मिलने पर बधाई दी थी और उनके योगदान को प्रेरणादायक बताया था।
हालांकि, सरकार की ओर से आधिकारिक बधाई संदेश नहीं आने को लेकर थरूर की टिप्पणी उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इस विषय पर सरकार की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
डी. राजा ने भी प्रधानमंत्री मोदी से की अपील
![]()
नवी पिल्लई को लेकर कांग्रेस सांसद के अलावा CPI महासचिव डी. राजा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पिल्लई को बधाई देने का आग्रह किया और कहा कि उनकी उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व का विषय होनी चाहिए। राजा का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों और न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों की सफलता का स्वागत किया जाना चाहिए।
उनके बयान से स्पष्ट है कि यह मुद्दा केवल एक बधाई संदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय मूल के वैश्विक व्यक्तित्वों के प्रति देश के आधिकारिक रवैये को लेकर राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है।
कौन हैं नवी पिल्लई?
नवानेथम पिल्लई, जिन्हें दुनिया भर में नवी पिल्लई के नाम से जाना जाता है, भारतीय तमिल मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद हैं। उन्होंने मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं। पिल्लई का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में हुआ था। उनका परिवार साधारण आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ा था और उनके पिता बस चालक थे। उनका बचपन दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद व्यवस्था के दौर में बीता, जब नस्ल के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव किया जाता था।
इन परिस्थितियों के बीच पिल्लई ने शिक्षा और कानून के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। आगे चलकर उन्होंने मानवाधिकारों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय न्याय से जुड़े मुद्दों पर काम किया। संयुक्त राष्ट्र में उनकी भूमिका ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय न्याय में रहा अहम योगदान
नवी पिल्लई का पेशेवर जीवन कानून, मानवाधिकारों और न्यायिक जवाबदेही से जुड़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मानवाधिकारों से संबंधित मुद्दों पर काम किया। उनकी यात्रा रंगभेद के दौर में दक्षिण अफ्रीका में पले-बढ़े एक साधारण परिवार की बेटी से लेकर अंतरराष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाली शख्सियत तक पहुंचने की कहानी है। यही वजह है कि उनकी उपलब्धियों को लेकर भारत में भी विशेष दिलचस्पी देखने को मिलती है।
हालांकि, नोबेल पुरस्कार से जुड़ी किसी भी खबर में पुरस्कार की श्रेणी, आधिकारिक घोषणा और सम्मान प्राप्त करने वाले व्यक्ति की पुष्टि विश्वसनीय आधिकारिक स्रोतों से करना जरूरी है।









