मिजोरम के राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने 4 जून को शिलांग में होने वाली 73वीं उत्तर-पूर्वी परिषद (NEC) की पूर्ण बैठक की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में राज्य के विकास एजेंडे को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने और विभागों के समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने पिछली बैठक के निर्णयों पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी।
आइजोल: 2 जून: मिजोरम के राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने सोमवार को आगामी 73वीं उत्तर-पूर्वी परिषद (North Eastern Council – NEC) की पूर्ण बैठक को लेकर राज्य की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। यह महत्वपूर्ण बैठक 4 जून को शिलांग में आयोजित की जाएगी और इसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे।
राज्यपाल ने इस समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि यह मंच मिजोरम के लिए अपनी विकास प्राथमिकताओं और परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे अपनी तैयारियों को तेज करें ताकि राज्य का एजेंडा प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
लोक भवन में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
यह समीक्षा बैठक आइजोल स्थित लोक भवन में आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि शिलांग में होने वाली NEC बैठक के दौरान मिजोरम की विकास योजनाओं, उपलब्धियों और भविष्य की प्राथमिकताओं को सुव्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता लगातार मजबूत हो रही है और ऐसे में राज्यों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
विकास एजेंडे को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर जोर
राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि मिजोरम का विकास एजेंडा स्पष्ट, संगठित और प्रभावी तरीके से NEC बैठक में रखा जाए। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि यह उत्तर-पूर्वी राज्यों के विकास की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने सभी विभागों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े प्रस्तावों और परियोजनाओं को अच्छी तरह से तैयार करें, ताकि राज्य की जरूरतों और प्राथमिकताओं को मजबूती से रखा जा सके।
पिछली NEC बैठक के निर्णयों पर समीक्षा
बैठक के दौरान राज्य के योजना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग के सचिव डेविड ललथंतलुआंगा ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में दिसंबर 2024 में अगरतला में हुई पिछली 72वीं NEC पूर्ण बैठक के दौरान मिजोरम से संबंधित निर्णयों पर की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि पिछली बैठक में लिए गए कई निर्णयों पर राज्य सरकार द्वारा फॉलो-अप किया गया है और विभिन्न स्तरों पर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि कई परियोजनाएं कार्यान्वयन के चरण में हैं, जबकि कुछ योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के विकास में NEC की भूमिका
उत्तर-पूर्वी परिषद (NEC) भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। यह परिषद क्षेत्रीय विकास, बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, सामाजिक विकास और आर्थिक प्रगति से जुड़े मुद्दों पर नीति निर्माण और समन्वय का कार्य करती है।
इस बैठक में केंद्र सरकार और सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों के प्रतिनिधि एक साथ मिलकर क्षेत्रीय विकास की रणनीति तय करते हैं। मिजोरम जैसे राज्यों के लिए यह मंच अपने विकास एजेंडे को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
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मिजोरम की विकास प्राथमिकताओं पर फोकस
राज्यपाल ने बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया कि मिजोरम को अपनी प्रमुख विकास प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना चाहिए। इनमें बुनियादी ढांचा विकास, सड़क और कनेक्टिविटी परियोजनाएं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, तथा रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी आवश्यकताएं और प्रस्ताव क्षेत्रीय विकास लक्ष्यों के साथ पूरी तरह से समन्वित हों, ताकि उन्हें NEC स्तर पर प्रभावी समर्थन मिल सके।
केंद्र और राज्य के बीच समन्वय पर जोर
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से विकास परियोजनाओं को तेज गति दी जा सकती है। राज्यपाल ने अधिकारियों से कहा कि वे केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ बेहतर तालमेल बनाएं और NEC बैठक में मजबूत प्रस्तुति सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के विकास के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं और सभी राज्यों को मिलकर एक साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
शिलांग बैठक की तैयारियों में तेजी
जैसे-जैसे 4 जून की बैठक नजदीक आ रही है, मिजोरम सरकार ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। विभिन्न विभाग अपने-अपने प्रोजेक्ट्स और रिपोर्ट्स को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं ताकि राज्य का प्रतिनिधित्व प्रभावी और परिणामोन्मुखी हो सके।
अधिकारियों का मानना है कि इस बैठक में मिजोरम को अपने विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं को प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा, जिससे राज्य के लिए नई परियोजनाओं और फंडिंग के रास्ते खुल सकते हैं।










