शिमला में भारी बारिश से मकानों पर गिरे पेड़, समय रहते बाहर निकले लोग; अभी भी बना हुआ है खतरा

शिमला के टूटीकंडी में भारी बारिश के बीच मकानों पर पेड़ गिर गए। परिवार समय रहते बाहर निकल गए, जबकि इलाके में अभी भी दो पेड़ों से खतरा बना हुआ है।

शिमला के टूटीकंडी क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान कई पेड़ों के मकानों पर गिरने से घरों को नुकसान पहुंचा। समय रहते परिवारों के बाहर निकल जाने से बड़ा हादसा टल गया, जबकि इलाके में अब भी दो पेड़ खतरा बने हुए हैं।

शिमला: हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच राजधानी शिमला के टूटीकंडी वार्ड में बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बुधवार सुबह कई पेड़ मकानों पर गिर गए, जिससे घरों की छतें क्षतिग्रस्त हो गईं। हालांकि परिवारों ने समय रहते घरों से बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली।

भारी बारिश के बीच मकानों पर गिरे पेड़

हिमाचल प्रदेश में जारी मूसलधार बारिश का असर अब राजधानी शिमला में भी देखने को मिल रहा है। बुधवार सुबह टूटीकंडी वार्ड के ओल्ड बैरियर क्षेत्र में अचानक चार बड़े पेड़ मकानों की ओर गिर पड़े। इस हादसे में दो मकानों की टीन की छतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और घरों को काफी नुकसान पहुंचा।

शिमला में भारी बारिश से मकानों पर गिरे पेड़, समय रहते बाहर निकले लोग; अभी भी बना हुआ है खतरा

गनीमत रही कि घरों में रहने वाले परिवार समय रहते बाहर निकल गए, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोग घरों से बाहर निकल आए।

स्थानीय लोगों ने पहले ही जताया था खतरा

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने काफी पहले वन विभाग और प्रशासन को इन पेड़ों से संभावित खतरे की जानकारी दी थी। लोगों का आरोप है कि पेड़ों की स्थिति खराब होने और जमीन कमजोर होने के बावजूद समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पीड़ित परिवारों के अनुसार, इलाके के ऊपर स्थित होटल और मोटर बैरियर क्षेत्र से लगातार पानी उनके घरों की ओर छोड़ा जा रहा था। लंबे समय तक पानी का रिसाव होने से मिट्टी कमजोर हो गई, जिसके कारण पेड़ गिरने की घटना हुई।

अभी भी दो पेड़ बने हुए हैं खतरा

घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। पूर्व पार्षद आनंद कौशल ने बताया कि फिलहाल दो पेड़ मकानों पर गिर चुके हैं, जबकि दो अन्य पेड़ भी खतरनाक स्थिति में झुके हुए हैं। इन्हें जल्द हटाना जरूरी है, ताकि आगे किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

उन्होंने कहा कि लगातार बारिश के कारण जमीन अभी भी कमजोर बनी हुई है। ऐसे में यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आसपास के मकानों के लिए खतरा और बढ़ सकता है।

प्रभावित परिवारों ने मांगी राहत

हादसे में प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से क्षेत्र में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करने, कमजोर पेड़ों को हटाने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। वहीं प्रशासन और वन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्र में राहत एवं सुरक्षा संबंधी आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं।

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