देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेला 2026 के दौरान शीघ्रदर्शनम कूपनधारकों के लिए अलग क्यू सिस्टम लागू किया जाएगा। 30 जुलाई से शुरू होने वाली इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं का समय बचेगा और दर्शन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
देवघर: श्रावणी मेला 2026 के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले शीघ्रदर्शनम कूपनधारकों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। मंदिर प्रशासन ने उनके लिए अलग डेडिकेटेड रूट और क्यू सिस्टम तैयार किया है, जिससे श्रद्धालुओं को कम समय में बिना सामान्य कतार की भीड़ के दर्शन का लाभ मिल सकेगा।
शीघ्रदर्शनम श्रद्धालुओं के लिए बनेगा अलग डेडिकेटेड रूट
![]()
बाबा बैद्यनाथ धाम में इस वर्ष श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। 30 जुलाई से शुरू होने वाले मेले के साथ शीघ्रदर्शनम कूपनधारकों के लिए अलग डेडिकेटेड क्यू सिस्टम लागू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य दर्शन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना और श्रद्धालुओं का समय बचाना है। प्रशासन का दावा है कि इससे कूपनधारकों को मंदिर तक पहुंचने में करीब आधे घंटे की बचत होगी।
हर साल लाखों श्रद्धालु लेते हैं शीघ्रदर्शनम सुविधा का लाभ
बाबा बैद्यनाथ धाम में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु शीघ्रदर्शनम कूपन के माध्यम से पूजा-अर्चना करते हैं। औसतन 14 लाख से अधिक श्रद्धालु सालभर इस सुविधा का उपयोग करते हैं, जबकि केवल श्रावणी मेला के दौरान ही करीब सवा लाख श्रद्धालु शीघ्रदर्शनम कूपन लेकर दर्शन करते हैं।
सामान्य दिनों में इस सुविधा के लिए 300 रुपये का शुल्क लिया जाता है, जबकि श्रावणी मेला के दौरान इसका शुल्क 600 रुपये निर्धारित किया गया है। अब तक शीघ्रदर्शनम और सामान्य दर्शन की कतारें मुख्य द्वार से पहले एक स्थान पर मिल जाती थीं, जिससे कूपनधारकों को भी सामान्य लाइन के साथ आगे बढ़ना पड़ता था और अतिरिक्त समय लगता था।
नई व्यवस्था से भीड़ होगी नियंत्रित, समय भी बचेगा
नई व्यवस्था के तहत सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालु संस्कार मंडप से नए फुटओवर ब्रिज के माध्यम से निर्धारित रूट से आगे बढ़ेंगे। वहीं शीघ्रदर्शनम कूपनधारकों के लिए प्रशासनिक भवन, होल्डिंग प्वाइंट और पूर्वी दिशा से अलग मार्ग तैयार किया गया है, जिससे वे सीधे फील पाया तक पहुंच सकेंगे।
इसके बाद दोनों कतारें फील पाया के पास एक निर्धारित स्थान पर मिलेंगी और वहीं से मुख्य द्वार, मंझला खंड होते हुए गर्भगृह तक प्रवेश करेंगी। इससे भीड़ का दबाव कम होगा और दोनों श्रेणियों के श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक सुचारु रहेगी।
20 जुलाई से होगा नई व्यवस्था का ट्रायल
मंदिर प्रशासन ने नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं भी तैयार कर ली हैं। नया फुटओवर ब्रिज बनकर तैयार है और 20 जुलाई से इसका ट्रायल शुरू किया जाएगा। ट्रायल के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन की समीक्षा की जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में अधिक सुगम और व्यवस्थित दर्शन की सुविधा मिलेगी। साथ ही भीड़ प्रबंधन में सुधार होने से मंदिर परिसर में अव्यवस्था की स्थिति भी काफी हद तक कम होगी।









