सीकर के श्रीमाधोपुर ब्लॉक में 95 लाख की 2.5 किमी सड़क एक ही दिन में उखड़ गई। डामर लोगों और कुत्तों के पैरों से भी निकल गई। ग्रामीण नाराज हैं और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।
Rajasthan: सीकर जिले के श्रीमाधोपुर ब्लॉक की अजीतगढ़ तहसील में बनी नई डामर सड़क ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 95 लाख रुपये की लागत से तैयार की गई सैंदाला–भगवानपुरा सड़क अगले ही दिन उखड़ने लगी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क निर्माण का काम 9 दिसंबर की दोपहर करीब 3 बजे शुरू हुआ और 10 दिसंबर तक पूरा हो गया। लेकिन 11 दिसंबर की सुबह गांव वालों ने देखा कि सड़क की ऊपरी परत जगह-जगह से निकल चुकी है। डामर इतनी कमजोर थी कि गांव वालों और कुत्तों के पैरों से ही परत उखड़कर हाथ में आने लगी।
ग्रामीणों ने इसे PWD और ठेकेदार की खुली लापरवाही बताया। उनका कहना है कि इतनी तेजी से काम करके सड़क बनाना ही इस बात का प्रमाण है कि सामग्री और प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हुई है
घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ
सैंदाला और भगवानपुरा के लोगों ने सड़क की स्थिति देखने के बाद तुरंत अधिकारियों को फोन कर इसकी शिकायत की। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में बेहद घटिया गुणवत्ता की डामर और बजरी का इस्तेमाल किया गया।
लोगों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अजीतगढ़ इलाके की कई सड़कों का हाल इसी तरह का रहा है। चाहे नई सड़कें हों या हाल ही में किए गए पेचवर्क, दोनों ही जल्द खराब हो जाते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, दो किमी का यह हिस्सा कई गांवों के लिए मुख्य मार्ग है, लेकिन इसकी हालत पहले ही दिन खराब हो जाने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मंत्री शिलान्यास बाद भी कैसे हुई लापरवाही
इस सड़क का शिलान्यास स्थानीय विधायक और यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने 9 सितंबर 2025 को किया था। यह सड़क नीमकाथाना-अजमेरी रोड को जोड़ते हुए सैंदाला से भगवानपुरा तक बनाई जानी थी। कुल लागत 95 लाख रुपये थी, जो मंजूर भी हुई।
लेकिन ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं, जब सरकार ने बजट मंजूर कर दिया था, तो निगरानी में इतनी लापरवाही कैसे हुई? लोगों का कहना है कि PWD के अधिकारियों ने निर्माण के दौरान न तो निरीक्षण किया और न ही ठेकेदार की कार्यशैली पर नियंत्रण रखा।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने अधिकारीयों को कई बार खराब सड़क और पेचवर्क की समस्या बताई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अजीतगढ़ इलाके में जलेबी चौक से चीपलाटा तक बनी सड़क का हाल भी ऐसा ही है। लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं, फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। यहां तक कि हाल ही में हुए कुछ सड़क सुधार कार्य भी कुछ ही दिनों में उखड़ गए।
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की उदासीनता के कारण क्षेत्र में सड़कें सिर्फ दिखावे के लिए बन रही हैं। काम की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे आमजन की मेहनत की कमाई और सरकारी बजट दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग
सड़क की हालत देखकर ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाए। लोग चाहते हैं कि सड़क को तुरंत दोबारा सही गुणवत्ता के साथ बनाया जाए, ताकि गांवों को सुरक्षित और लंबे समय तक टिकने वाला रास्ता मिल सके।










