सिक्किम के नामची जिले में तीस्ता स्टेज-VI हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग धंसने के चार दिन बाद बचाव अभियान पूरा हो गया। राहत दलों ने सभी 25 श्रमिकों के शव बरामद कर लिए। हादसे के बाद निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर नई बहस शुरू हो गई।
गंगटोक: सिक्किम के नामची जिले में स्थित एनएचपीसी (NHPC) की तीस्ता स्टेज-VI जलविद्युत परियोजना में हुई भीषण सुरंग दुर्घटना का राहत एवं बचाव अभियान चार दिन बाद समाप्त हो गया। गुरुवार को बचाव दलों ने सुरंग में फंसे सभी 25 श्रमिकों के शव बरामद कर लिए। इस दुखद घटना ने देशभर में शोक की लहर पैदा कर दी है और बड़े निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ हादसा?
यह हादसा सोमवार दोपहर करीब एक बजे उस समय हुआ जब निर्माणाधीन सुरंग के भीतर श्रमिक नियमित कार्य कर रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरंग के अंदर मिथेन गैस से हुए संभावित विस्फोट के बाद सुरंग का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। विस्फोट और मलबा गिरने के कारण श्रमिक बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके और सुरंग के भीतर ही फंस गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। इसके बाद बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।
72 घंटे तक चला कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन
सुरंग के भीतर भारी मात्रा में मलबा, संकरी जगह और लगातार बनी जोखिमपूर्ण परिस्थितियों के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। राहत कार्य में ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (Eastern Coalfields Ltd.), स्थानीय प्रशासन, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य आपदा राहत एजेंसियों की संयुक्त टीमों ने लगातार काम किया। लगातार लगभग 72 घंटे तक चले अभियान के दौरान आधुनिक मशीनों, गैस मॉनिटरिंग उपकरणों और विशेष तकनीकी सहायता का उपयोग किया गया। अंततः गुरुवार को सभी 25 श्रमिकों के शव बाहर निकाल लिए गए और अभियान समाप्त घोषित किया गया।
बचाव दल ने दी अभियान पूरा होने की जानकारी
रेस्क्यू टीम के सदस्य के.के. रॉय ने पुष्टि की कि सुरंग में फंसे सभी श्रमिकों तक पहुंच बना ली गई है और सभी शवों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इसके साथ ही कई दिनों से जारी खोज एवं बचाव अभियान आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि अभियान अत्यंत कठिन परिस्थितियों में संचालित किया गया और इसमें शामिल सभी एजेंसियों ने लगातार समन्वय बनाकर कार्य किया।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे के बाद विशेषज्ञों ने निर्माणाधीन सुरंगों और खनन जैसी परियोजनाओं में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है। यदि प्रारंभिक आशंका के अनुसार दुर्घटना का कारण मिथेन गैस का विस्फोट साबित होता है, तो यह गैस मॉनिटरिंग, वेंटिलेशन सिस्टम और जोखिम प्रबंधन प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उच्च जोखिम वाले निर्माण कार्यों में गैस सेंसर, नियमित निरीक्षण, आपातकालीन निकासी योजना और श्रमिकों के सुरक्षा प्रशिक्षण को और मजबूत बनाने की जरूरत है।
जलविद्युत परियोजना पर पड़ा असर
तीस्ता स्टेज-VI जलविद्युत परियोजना सिक्किम की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल है। इस दुर्घटना के बाद परियोजना के निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव पड़ा है। माना जा रहा है कि अब परियोजना की तकनीकी और सुरक्षा समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद ही आगे के निर्माण कार्यों पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार और संबंधित एजेंसियां दुर्घटना के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच करा सकती हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
स्थानीय लोगों में शोक का माहौल
दुर्घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का वातावरण है। स्थानीय नागरिकों ने राहत दलों के प्रयासों की सराहना की, लेकिन साथ ही इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कठोर सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग भी उठाई है। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जा रही है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की उम्मीद जताई जा रही है।
निर्माण उद्योग के लिए बड़ा सबक
सिक्किम की यह घटना केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे निर्माण क्षेत्र के लिए चेतावनी है। सुरंग, खदान और अन्य उच्च जोखिम वाले निर्माण स्थलों पर आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल, नियमित निरीक्षण और आपदा प्रबंधन की बेहतर तैयारी भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।









