अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन के विस्तार का दावा किया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी आंदोलन में शामिल होने का ऐलान किया है।
बेंगलुरु: अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। 19 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन अब व्यापक रूप ले रहा है और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के शामिल होने से इसे नई ताकत मिलेगी।
प्रकाश राज के मुताबिक, मतदाता अधिकारों से जुड़ा यह विरोध केवल छात्रों या किसी एक संगठन का मुद्दा नहीं रह गया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और नागरिकों के मतदान के अधिकारों से जुड़ा सवाल बताया। अभिनेता ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार विरोध की आवाजों को दबाने और संबंधित पक्षों से बातचीत नहीं करने का रवैया जारी रखती है, तो मतदाता चुनाव में उसे सत्ता से बाहर कर सकते हैं।
SIR के खिलाफ आंदोलन को व्यापक बनाने की तैयारी
प्रकाश राज ने कहा कि SIR से जुड़े मुद्दों पर विरोध लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार, विभिन्न संगठनों की भागीदारी से आंदोलन का दायरा छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि किसान संगठनों, श्रमिक संघों, जवानों और दलित संगठनों की भागीदारी से मतदाता अधिकारों की रक्षा का संदेश देशभर में पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक दलों के बीच टकराव का मामला नहीं है, बल्कि मतदाता की गरिमा और उसके वोट देने के अधिकार से जुड़ा विषय है। प्रकाश राज के मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी चिंताएं रखने और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाने का अधिकार होना चाहिए।
हालांकि, आंदोलन के देशव्यापी रूप लेने की बात फिलहाल प्रकाश राज का आकलन है। इसकी वास्तविक व्यापकता और आगे की दिशा विभिन्न संगठनों की भागीदारी तथा आने वाले कार्यक्रमों पर निर्भर करेगी।
संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन में शामिल होने का ऐलान किया
प्रकाश राज ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में करीब 200 संगठनों की एक बैठक में हिस्सा लिया था। उनके अनुसार, इसी बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा ने SIR के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन करने और इसमें भाग लेने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि SKM ने किसान संगठनों से 23 अक्टूबर को आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है। इससे विरोध-प्रदर्शन में किसानों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है।
संयुक्त किसान मोर्चा किसान संगठनों का एक मंच है, जो केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। उस आंदोलन में लंबे समय तक प्रदर्शन हुए थे और अंततः केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की थी।
प्रकाश राज ने इसी किसान आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि विरोध और चुनौतियों के बावजूद आंदोलनकारियों ने अपनी लड़ाई जारी रखी थी। उनका कहना था कि किसान संगठनों का अनुभव और व्यापक भागीदारी मौजूदा आंदोलन को भी मजबूती दे सकती है।
‘संविधान और मतदान का अधिकार’ बताया आंदोलन का आधार
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रकाश राज ने संविधान और मतदान के अधिकारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा संवैधानिक व्यवस्था के तहत होनी चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी की अहिंसक संघर्ष की सीख का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विरोध शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रकाश राज ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़ा विवाद किसी एक राजनीतिक संगठन तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, अगर किसी पात्र नागरिक का नाम सूची में शामिल नहीं होता या रिकॉर्ड में गड़बड़ी होती है, तो इससे उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि विरोध करने वालों की बात सुनी जाए और विवाद से जुड़े सवालों पर संवाद किया जाए। उनका आरोप है कि यदि सरकार असहमति को दबाने या बातचीत से बचने का रास्ता अपनाती है, तो राजनीतिक असंतोष और बढ़ सकता है।
क्या है SIR और इसे लेकर विवाद क्यों?
SIR का पूरा नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा करना और उसमें पात्र मतदाताओं के नाम, पते तथा अन्य विवरणों की जांच करना है। चुनाव आयोग के अनुसार, ऐसी प्रक्रिया से मृत मतदाताओं, दोहराव वाली प्रविष्टियों और पात्रता से जुड़ी समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों के बीच विवाद सामने आए हैं। आलोचकों का आरोप है कि सत्यापन और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रियाओं के कारण कुछ पात्र मतदाताओं के नाम छूटने या हटने का खतरा है। विपक्षी दलों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता और इसके संभावित प्रभावों पर सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन रखना जरूरी है, ताकि चुनाव में केवल पात्र मतदाताओं के नाम शामिल रहें। ऐसे में विवाद का एक प्रमुख पहलू यह है कि सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के साथ किसी भी पात्र नागरिक का नाम छूटने से कैसे बचाया जाए।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि SIR से संबंधित सभी आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। किसी विशेष मामले में नाम छूटने या गलत तरीके से हटाए जाने की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और निर्धारित शिकायत या अपील प्रक्रिया के आधार पर ही की जा सकती है।
केंद्र सरकार पर चुनावी चेतावनी
प्रकाश राज ने कहा कि यदि केंद्र सरकार विरोध करने वालों की मांगों को नजरअंदाज करती रही और संवाद का रास्ता नहीं अपनाती, तो मतदाता चुनाव में उसे सत्ता से बाहर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की जवाबदेही जनता के प्रति होती है और नागरिक अपने मताधिकार के जरिए राजनीतिक फैसलों पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
उनकी टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी आलोचना के बीच आई है। हालांकि, प्रकाश राज का बयान एक राजनीतिक चेतावनी है, न कि आगामी चुनावों के नतीजों का संकेत या पूर्वानुमान।
आगे क्या होगा?
SKM के आह्वान के मुताबिक, 23 अक्टूबर को किसान संगठनों की भागीदारी इस आंदोलन के अगले चरण का अहम हिस्सा हो सकती है। आंदोलन का विस्तार कितना होता है, यह संगठनों की वास्तविक भागीदारी, आगे घोषित कार्यक्रमों और सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
फिलहाल, प्रकाश राज ने SIR से जुड़े सवालों को मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जोड़ते हुए आंदोलन को व्यापक बनाने की बात कही है। वहीं, मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं को शामिल रखने के बीच संतुलन बनाना इस विवाद का केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है।
स्रोत-आधार: 19 अक्टूबर 2026 को प्रकाश राज की प्रेस कॉन्फ्रेंस और SKM की भागीदारी संबंधी जानकारी के लिए द हिंदू की रिपोर्ट का संदर्भ लिया गया है। SIR के उद्देश्य और इससे जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि के लिए चुनाव आयोग तथा अन्य समाचार रिपोर्टों को ध्यान में रखा गया है।









