स्कंद षष्ठी पर भगवान कार्तिकेय की पूजा कैसे करें, जाने विधि और मंत्र

स्कंद षष्ठी पर भगवान कार्तिकेय की पूजा का महत्व जानें। व्रत, मंत्र, आरती और विधि से संतान सुख, शांति और समृद्धि मिलने की मान्यता है।

स्कंद षष्ठी के पावन अवसर पर भगवान कार्तिकेय की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन व्रत और विधि-विधान से पूजा करने पर संतान सुख, सुख-समृद्धि और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है। पूजा में मंत्र, आरती और स्तोत्र का विशेष स्थान माना गया है।

Skanda Shashti 2026 Pooja Vidhi: 22 अप्रैल को मनाई जा रही स्कंद षष्ठी पर देशभर के श्रद्धालु भगवान कार्तिकेय की विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। यह धार्मिक पर्व वैदिक पंचांग के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से संतान सुख, परिवार में शांति और आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति होती है। मंदिरों और घरों में आरती, मंत्र जप और अभिषेक के साथ पूजा की जा रही है, जिससे भक्तों में विशेष आस्था और उत्साह देखा जा रहा है।

स्कंद षष्ठी पर पूजा का महत्व और विधि

स्कंद षष्ठी को भगवान कार्तिकेय की आराधना का अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई पूजा विशेष फलदायी होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। इसके बाद मंदिर या घर के पूजा स्थल को साफ कर भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है और विधिपूर्वक पूजा प्रारंभ होती है।

स्कंद षष्ठी पर भगवान कार्तिकेय की पूजा कैसे करें, जाने विधि और मंत्र

आरती और मंत्र से कैसे पूर्ण होती है पूजा

पूजा के दौरान पंचामृत से अभिषेक, चंदन, कुमकुम, पुष्प और दीपक अर्पित करना विशेष महत्व रखता है। इसके बाद भक्त भगवान कार्तिकेय की आरती और स्तोत्र का पाठ करते हैं।

इस दिन ॐ शारवाना-भावाया नमः और ॐ सुब्रह्मण्याय नमः जैसे मंत्रों का जप करने की परंपरा है। मान्यता है कि इन मंत्रों से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

व्रत और धार्मिक मान्यताएं

स्कंद षष्ठी व्रत को संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए विशेष माना गया है। भक्त इस दिन उपवास रखकर भगवान कार्तिकेय की पूजा करते हैं और फल, मिठाई का भोग लगाते हैं।

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि भगवान कार्तिकेय की आराधना से जीवन में बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। यही कारण है कि दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक यह पर्व श्रद्धा से मनाया जाता है।

आधुनिक समय में स्कंद षष्ठी का महत्व

आज के समय में भी स्कंद षष्ठी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व कम नहीं हुआ है। लोग इसे आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक संतुलन से जोड़कर देखते हैं।

घरों में पूजा, मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और ऑनलाइन माध्यम से भी लोग इस पर्व से जुड़े हुए हैं। इससे यह परंपरा नई पीढ़ी तक भी पहुंच रही है।

Leave a comment