स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी से पूछा सवाल, बोली- जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल किसने घोषित किया?

स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी से जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल घोषित करने को लेकर सवाल पूछा। जानें क्या है पूरा मामला, उनके बयान की वजह और इस राजनीतिक विवाद से जुड़ी

दिल्ली के जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डिनोटिफाई किए जाने का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्ष इस फैसले पर सवाल उठा रहा है और कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है

Smriti Irani on Rahul Gandhi: दिल्ली के जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में दोबारा बहाल करने की मांग को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने के इतिहास पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट की निंदा नहीं करने को लेकर भी कांग्रेस नेता से जवाब मांगा है।

जंतर-मंतर को लेकर क्यों छिड़ा राजनीतिक विवाद?

दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां विभिन्न संगठनों और नागरिक समूहों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए हैं। हालांकि, इस स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति और उससे जुड़े नियमों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। हाल के दिनों में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाए जाने के दिल्ली पुलिस के फैसले पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। 

कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठाया है। इसी बीच स्मृति ईरानी ने इस फैसले का समर्थन करते हुए सवाल किया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल घोषित करने का निर्णय आखिर किसने लिया था। एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में ईरानी ने कहा कि किसी स्थान को प्रदर्शन स्थल घोषित करने के साथ वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के आश्वासन के बावजूद यदि नियमों का उल्लंघन होता है, तो उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी से क्या पूछा?

स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी से पूछा सवाल, बोली- जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल किसने घोषित किया?

स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी की राजनीति पर निशाना साधते हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम में दिल्ली पुलिस के करीब 280 अधिकारियों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार किया गया। ईरानी ने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बयान दिया, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों से पुलिस अधिकारियों के साथ हिंसा नहीं करने की अपील की हो। उन्होंने विपक्ष के नेता से इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी।

हालांकि, पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट को लेकर स्मृति ईरानी की ओर से लगाए गए आरोपों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। घटना से जुड़े सभी तथ्यों और संबंधित पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

प्रदर्शनकारियों और पुलिस के व्यवहार पर भी उठे सवाल

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर विवाद केवल प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर कथित सख्ती और दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए गए हैं। दूसरी तरफ, पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट को लेकर भी सवाल उठे हैं। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों के आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार अहम है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कानून का पालन और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी आवश्यक है।

राहुल गांधी ने जंतर-मंतर को लेकर क्या कहा था?

इस विवाद के बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जंतर-मंतर को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि जंतर-मंतर देश के लोगों का है और इसे वापस लिया जाएगा। उनके इस बयान को प्रदर्शन स्थल पर विरोध जताने के अधिकार को बहाल करने की मांग के तौर पर देखा गया। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई, जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में सीजेपी से संबंधित नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली की एक अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। रिपोर्ट के मुताबिक, मामला प्रदर्शन के दौरान दिए गए आश्वासन और कथित नियम उल्लंघन से जुड़ा था।

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