सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में चुनाव में देरी को लेकर विवाद बढ़ने पर भारी गोलीबारी हुई। सरकारी बलों और विपक्षी समूहों के बीच रातभर संघर्ष जारी रहा। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और कई इलाकों में सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है।
मोगादिशु: सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में राजनीतिक संकट उस समय गंभीर हो गया जब चुनावों में देरी को लेकर सरकार और विपक्षी गुटों के बीच तनाव हिंसक झड़पों में बदल गया। कई इलाकों में भारी गोलीबारी और मोर्टार हमलों की रिपोर्ट सामने आई है, जिससे शहर में दहशत का माहौल है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, गोलीबारी की आवाजें कई घंटों तक सुनाई देती रहीं और रातभर शहर के अलग-अलग हिस्सों में तनाव बना रहा।
चुनाव विवाद बना हिंसा की वजह
यह विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद का कार्यकाल 15 मई को समाप्त हो गया, लेकिन इसे एक साल के लिए बढ़ा दिया गया। विपक्षी दलों ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का आरोप लगाया।
विपक्ष ने गुरुवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था, जिसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
कई इलाकों में भारी गोलीबारी, सुरक्षा अभियान की बात
पुलिस के अनुसार, राजधानी के कई हिस्सों में सशस्त्र समूहों और सरकारी बलों के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस ने इसे “बड़े पैमाने पर सुरक्षा अभियान” बताया है, जो उन हथियारबंद मिलिशिया के खिलाफ चलाया जा रहा है जिन्होंने कुछ क्षेत्रों में मोर्टार हमले किए।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि गोलीबारी अचानक बढ़ी और कई इलाकों में लोग अपने घरों में ही फंसे रहे।
राजनीतिक वार्ता विफल, संकट बढ़ा
राष्ट्रपति के कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत शुरू हुई थी, लेकिन किसी समझौते पर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता गया और स्थिति अब हिंसक टकराव में बदल गई है।
सोमालिया पिछले कई दशकों से राजनीतिक अस्थिरता और गृहयुद्ध से जूझ रहा है, और यह ताजा संकट स्थिति को और जटिल बना रहा है।
लोकतांत्रिक चुनावों की दिशा में प्रयास
राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद ने देश को पारंपरिक प्रणाली से हटाकर एक व्यक्ति-एक वोट आधारित लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली की ओर ले जाने का प्रयास किया है।
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अब तक सोमालिया में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं होता था, बल्कि कबीलाई नेताओं द्वारा चुने गए सांसद राष्ट्रपति का चयन करते हैं। देश में आखिरी बार 1969 में प्रत्यक्ष चुनाव हुए थे।
पूर्व प्रधानमंत्री का सरकार पर गंभीर आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री हसन अली खैरे ने आरोप लगाया है कि वे और अन्य विपक्षी नेता शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे, तभी सरकारी बलों ने उन पर हमला किया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इस घटना की जिम्मेदारी उस राष्ट्रपति पर है जिसका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। उन्होंने इसे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने की कोशिश की जा रही है।
विपक्षी नेताओं ने विरोध जारी रखने की बात कही
पूर्व राष्ट्रपति शरिफ शेख अहमद ने भी बयान जारी कर कहा कि हिंसा के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष डरने वाला नहीं है और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रहेगा।
उनके बयान से संकेत मिलता है कि देश में राजनीतिक टकराव और अधिक बढ़ सकता है।
अमेरिकी दूतावास ने जताई चिंता
मोगादिशु स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस हिंसा को “लापरवाह” करार दिया है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। दूतावास ने कहा कि सभी नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे स्थिरता बनाए रखें और मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाएं।
हताहतों की संख्या अस्पष्ट, हालात तनावपूर्ण
अब तक इस हिंसा में कितने लोग घायल या मारे गए हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। सरकार और विपक्ष दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं, लेकिन जमीनी हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।









