बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए दुनिया के बड़े टेक दिग्गज खुद अपने परिवार में स्क्रीन टाइम सीमित कर रहे हैं। यूट्यूब के सीईओ नील मोहन, बिल गेट्स और एलन मस्क जैसे नाम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और आदतों को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।
सोशल मीडिया और बच्चों की सेहत: दुनियाभर में बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर चिंता गहराती जा रही है, इसी बीच टेक इंडस्ट्री के शीर्ष नेता खुद उदाहरण पेश कर रहे हैं। यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने हाल ही में अमेरिका में दिए इंटरव्यू में बताया कि वह अपने बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित रखते हैं। इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स और टेस्ला प्रमुख एलन मस्क भी कम उम्र में सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के उपयोग को नुकसानदेह बता चुके हैं। लगातार रिसर्च में सामने आ रहे मानसिक स्वास्थ्य जोखिमों के कारण यह मुद्दा वैश्विक बहस का विषय बन गया है।
सोशल मीडिया से बच्चों को दूर रख रहे टेक दिग्गज
दुनियाभर में बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच बड़ी टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारी खुद अपने बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की बात कह रहे हैं। यूट्यूब के सीईओ नील मोहन का ताजा बयान इसी बहस को फिर चर्चा में ले आया है, जहां उन्होंने परिवार में स्क्रीन टाइम सीमित रखने की नीति अपनाने की बात कही है।
नील मोहन क्यों कर रहे हैं स्क्रीन टाइम सीमित
यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने टाइम मैगजीन को दिए इंटरव्यू में बताया कि उनके घर में बच्चों के लिए यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल तय समय तक ही होता है। हफ्ते के दिनों में नियम ज्यादा सख्त रहते हैं, जबकि वीकेंड पर थोड़ी ढील दी जाती है।

मोहन ने पेरेंटल कंट्रोल टूल्स को जरूरी बताते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी का संतुलित इस्तेमाल ही बच्चों के लिए बेहतर है। उनका मानना है कि बिना नियंत्रण के डिजिटल कंटेंट बच्चों की आदतों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
बिल गेट्स, एलन मस्क भी जता चुके हैं चिंता
नील मोहन अकेले ऐसे टेक लीडर नहीं हैं। माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स भी बच्चों को कम उम्र में स्मार्टफोन देने के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने अपने बच्चों को 14 साल की उम्र के बाद ही फोन दिया था।
एलन मस्क ने भी सार्वजनिक तौर पर माना है कि बच्चों का सोशल मीडिया इस्तेमाल सीमित होना चाहिए। वहीं, यूट्यूब की पूर्व सीईओ सुसन वोजसिकी ने कहा था कि उनके छोटे बच्चे सिर्फ यूट्यूब किड्स ही देख सकते हैं और वह भी तय समय के लिए।
बच्चों के लिए क्यों खतरा बन रहा है सोशल मीडिया
कई रिसर्च में सामने आया है कि सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों में एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है। इसके अलावा साइबर बुलिंग और ध्यान केंद्रित न कर पाने जैसी दिक्कतें भी देखी गई हैं।
हालिया स्टडी के मुताबिक, 12 साल से पहले मोबाइल इस्तेमाल करने वाले बच्चों में मानसिक और शारीरिक समस्याओं का खतरा ज्यादा पाया गया है। इन्हीं कारणों से ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्त कदम उठाए हैं।










