जापान 2026 में Space Solar Power तकनीक के जरिए अंतरिक्ष से बिजली भेजने का परीक्षण करने जा रहा है। ओहिसामा नामक सैटेलाइट 450 किलोमीटर ऊंचाई से सौर ऊर्जा को माइक्रोवेव के रूप में धरती पर भेजेगा। यह मिशन स्थिर, भरोसेमंद और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में पहला कदम है।
Space Solar Power Mission: जापान 2026 में ओहिसामा नामक डेमोंस्ट्रेशन सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है, जो अंतरिक्ष में पैदा की गई सौर ऊर्जा को सीधे धरती पर भेजकर बिजली में बदलने का काम करेगा। यह मिशन जापान Aerospace Exploration Agency के उसुडा डीप स्पेस सेंटर और Space One Co. के सहयोग से किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थिर और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत विकसित करना है और भविष्य में व्यावसायिक उपयोग और अंतरिक्ष मिशनों के लिए नई संभावनाएं खोलना है।
स्पेस-बेस्ड सोलर पावर
स्पेस-बेस्ड सोलर पावर (SBSP) का लक्ष्य पृथ्वी की कक्षा में बड़े सोलर पैनल स्थापित करना है। ये पैनल सूरज की रोशनी से बिजली बनाएंगे और इसे माइक्रोवेव या लेजर से जमीन पर भेजा जाएगा। रिसीविंग स्टेशन इस ऊर्जा को फिर ग्रिड में सप्लाई करेगा।
इस प्रणाली में बादल, बारिश या दिन-रात के बदलाव का असर नहीं पड़ता, जिससे यह स्थिर और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत बन जाता है। इससे भविष्य में ऊर्जा संकट और जलवायु पर प्रभाव कम करने में मदद मिलेगी।
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ओहिसामा मिशन और तकनीकी विवरण
ओहिसामा सैटेलाइट 180 किलोग्राम का है और 450 किलोमीटर ऊंचाई से 720 वॉट बिजली माइक्रोवेव में भेजेगा। इसका पावर पैनल 70 सेंटीमीटर × 2 मीटर का है। जापान Aerospace Exploration Agency के उसुडा डीप स्पेस सेंटर में रिसीविंग एंटीना लगे हैं, जो इस ऊर्जा को एलईडी जलाकर परीक्षण करेंगे। यह सैटेलाइट Space One Co. के काइरोस 5 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा।
भविष्य की योजना में 36,000 किलोमीटर ऊंचाई पर विशाल सोलर एरे लगाए जा सकते हैं, जो 1 गीगावॉट बिजली उत्पन्न कर टोक्यो की सालाना बिजली जरूरत का 10 प्रतिशत पूरा कर सकते हैं।
जापान की वैश्विक अग्रणी स्थिति
अमेरिका, चीन और यूरोप भी इस तकनीक पर काम कर रहे हैं, लेकिन जापान 1980 के दशक से इस क्षेत्र में शोध कर रहा है। माइक्रोवेव ट्रांसमिशन और बीम कंट्रोल में इसकी विशेषज्ञता इसे वैश्विक दौड़ में आगे रखती है। सफल होने पर 2040 के दशक में व्यावसायिक उपयोग और भविष्य के चंद्र मिशनों में ऊर्जा आपूर्ति संभव हो सकती है।










