एलन मस्क पिछले कुछ दिनों से आरोप लगा रहे हैं कि भारत में कुछ उद्योगपति उनकी कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा की एंट्री में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।
Reliance Industries on Starlink: एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक की भारत में लॉन्चिंग को लेकर चल रही बहस के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपना पक्ष रखा है। मुकेश अंबानी की कंपनी ने कहा कि वह भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि जियो समेत सभी भारतीय और विदेशी ऑपरेटरों को देश के कानूनों और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब मस्क ने भारत में स्टारलिंक को व्यावसायिक मंजूरी मिलने में देरी को लेकर सवाल उठाए थे।
एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की मंजूरी पर उठाए सवाल
एलन मस्क ने 8 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग से जुड़ी मंजूरियों में देरी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और कंपनी भारत सरकार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई वर्षों से काम कर रही है। इसके बावजूद भारत में अंतिम व्यावसायिक मंजूरी मिलने में देरी क्यों हो रही है, यह सवाल उन्होंने उठाया।
मस्क ने अपनी पोस्ट में मुकेश अंबानी का जिक्र करते हुए भी टिप्पणी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में कुछ प्रभावशाली उद्योगपति अपने कारोबार की स्थिति बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की एंट्री में बाधा पैदा कर रहे हैं। हालांकि, ये मस्क के आरोप हैं और इन्हें किसी नियामकीय निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने का दावा
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स्टारलिंक की सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा को लेकर कंपनी का कहना है कि इसकी तकनीक उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है, जहां फाइबर नेटवर्क या मोबाइल टावर पहुंचाना मुश्किल है। भारत के कई ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की चुनौतियां मौजूद हैं, ऐसे में सैटेलाइट इंटरनेट को संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
मस्क के अनुसार, स्टारलिंक भारत में सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है और इसके लिए कंपनी ने 20 गेटवे साइट तैयार की हैं। हालांकि, व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक सभी मंजूरियों और स्पेक्ट्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान होना जरूरी है। किसी कंपनी की तकनीकी तैयारी अपने आप में सेवा शुरू करने की अंतिम अनुमति नहीं होती।
रिलायंस ने कहा- प्रतिस्पर्धा का स्वागत, नियमों का पालन जरूरी
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अपने बयान में कहा कि वह भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है। इसमें स्टारलिंक जैसी विदेशी कंपनियां भी शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, भारत में निवेश के अवसर उपलब्ध हैं, लेकिन कारोबार करने वाली हर कंपनी को देश के कानूनों और नीतियों के अनुसार काम करना होगा।
रिलायंस ने यह भी रेखांकित किया कि नियम भारतीय और विदेशी कंपनियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। कंपनी का कहना है कि नियामकीय प्रक्रिया में किसी आवेदक के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। इस बयान के जरिए रिलायंस ने स्टारलिंक की भारत में एंट्री का खुलकर विरोध करने के बजाय समान नियमों और प्रक्रियाओं पर जोर दिया है।
जियो को भी सैटेलाइट सेवा की मंजूरी का इंतजार
रिलायंस ने अपने पक्ष में यह बात भी कही कि उसकी टेलीकॉम कंपनी जियो खुद अपनी सैटेलाइट सेवाओं के लिए मंजूरी का इंतजार कर रही है। कंपनी ने भारत सरकार के उस रुख का हवाला दिया, जिसके मुताबिक सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए आवेदन करने वाले सभी ऑपरेटरों को निर्धारित प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
यह पहलू इसलिए अहम है, क्योंकि भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में विदेशी कंपनियों के साथ-साथ घरेलू कारोबारी समूह भी अपनी जगह बनाने की तैयारी में हैं। ऐसे में लाइसेंस, स्पेक्ट्रम, सुरक्षा आवश्यकताओं और अन्य नियामकीय शर्तों को लेकर स्पष्ट नियम पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होंगे।









