Stock Market: सेंसेक्स को लेकर बड़ा अनुमान, Chris Wood बोले– 2026 में 1 लाख संभव

Jefferies के Chris Wood के अनुसार 2026 में सेंसेक्स 10-15% बढ़कर 1,00,000 तक पहुंच सकता है। सुधार के लिए आर्थिक विकास और मुद्रा स्थिरता जरूरी।

Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी Chris Wood का अनुमान है कि 2026 में सेंसेक्स 1,00,000 तक पहुंच सकता है। आर्थिक विकास, कंपनियों की आय में सुधार और रुपये की स्थिरता इसके मुख्य आधार होंगे।

Stock Market: 2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई मुश्किलें सामने आईं। अमेरिकी और अन्य वैश्विक बाजारों की चाल, मुद्रा की अस्थिरता और निवेशकों का मनोबल इस साल बाजार की दिशा तय करने में अहम रहे। Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रेटेजी क्रिस्टोफर वुड ने पुनीत वाधवा से बातचीत में कहा कि 2026 में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक AI ट्रेड और मुद्रा स्थिरता पर निर्भर करेगी।

वैश्विक बाजार में 2025 का प्रदर्शन

क्रिस्टोफर वुड के अनुसार, 2025 में अमेरिकी बाजार में सबसे बड़ा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और इससे जुड़े निवेश पर रहा। कुल मिलाकर अमेरिकी बाजार ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन अन्य देशों की तुलना में कुछ पीछे रहा। वुड ने कहा कि वैश्विक निवेशक AI ट्रेड को लेकर काफी सक्रिय रहे और यह उभरते बाजारों की दिशा पर भी असर डालता रहा।

भारत का शेयर बाजार 2025 में कैसे रहा

वुड ने कहा कि भारत का बाजार अपेक्षाकृत कमजोर रहा। खासतौर पर रुपये की कमजोरी ने बाजार की परफॉर्मेंस को प्रभावित किया। उनका कहना था कि उन्होंने उम्मीद नहीं की थी कि रुपया इतना कमजोर रहेगा। मुद्रा की कमजोरी ने निवेशकों के भरोसे को थोड़ी प्रभावित किया और बाजार में अस्थिरता बनी रही।

नीति और मुद्रा की स्थिति

क्रिस्टोफर वुड ने माना कि यह स्पष्ट नहीं है कि रुपये की गिरावट सरकारी नीति का हिस्सा है या अन्य कारणों से हो रही है। उनका मानना है कि अगर रुपया 89 रुपये से ज्यादा कमजोर होता है, तो यह बाजार के लिए अस्थिरता पैदा कर सकता है। हाल ही में भारतीय मुद्रा में कमजोरी का मुख्य कारण निजी इक्विटी निवेशकों का बाहर निकलना और विदेशी निवेशकों की बिकवाली माना जा रहा है।

2026 में भारत के बाजार की संभावना

वुड के अनुसार, 2026 में भारतीय बाजार में सुधार की संभावना है। आर्थिक गतिविधियों और कंपनियों की आय में बढ़ोतरी से यह संभव हो सकता है। आसान मौद्रिक नीति और घरेलू आर्थिक विकास निवेशकों के लिए अच्छे अवसर प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, उनका मानना है कि भारत का प्रदर्शन मुख्य रूप से वैश्विक AI ट्रेड पर निर्भर रहेगा। अगर AI ट्रेड तेजी से बढ़ता रहा, तो इसका भारत पर नकारात्मक असर हो सकता है।

वैश्विक AI ट्रेड का असर

वुड ने कहा कि साल के मध्य तक निवेशक देखेंगे कि वास्तविक रिटर्न कहां से आ रहे हैं। कोरिया, ताइवान और चीन जैसे देश AI ट्रेड में शामिल हैं और उनका प्रदर्शन उभरते बाजारों की दिशा तय करेगा। ऐसे में भारत को “रिवर्स AI ट्रेड” की स्थिति में देखा जा रहा है, यानी विदेशी निवेशक भारत को सुरक्षित विकल्प के रूप में खरीद रहे हैं।

सेंसेक्स 40 साल का, पर प्रासंगिकता घटती जा रही

सेंसेक्स अब 40 साल का हो गया है, लेकिन इसकी लोकप्रियता पहले जैसी नहीं रही। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि निफ्टी में 50 कंपनियां शामिल हैं जबकि सेंसेक्स में सिर्फ 30। निफ्टी फ्यूचर्स निवेशकों को जल्दी संकेत देते हैं और इसी वजह से लोगों की नजरें अब सेंसेक्स की बजाय निफ्टी पर अधिक रहती हैं।

रुपया डॉलर के मुकाबले और संभावित स्तर

वुड ने कहा कि रुपया डॉलर के मुकाबले 100 तक पहुंच सकता है, हालांकि पहले यह अनुमान 89 रुपये तक गिरने का था। अगर रुपया 100 तक कमजोर हुआ, तो यह भारत की निवेश कहानी के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा। हालांकि, रियल रेट्स अभी भी पॉजिटिव हैं, इसलिए करेंसी की कमजोरी को समझना थोड़ा मुश्किल है।

2026 में कितना बढ़ सकता है सेंसेक्स

अगर अगले साल कंपनियों की आय में सुधार आता है और आर्थिक वृद्धि मजबूत रहती है, तो वुड का अनुमान है कि सेंसेक्स 10-15 फीसदी तक बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि सेंसेक्स 2026 में करीब 1,00,000 के स्तर तक पहुंच सकता है। इसके लिए आर्थिक विकास, कंपनियों की मजबूत कमाई और मुद्रा स्थिरता जरूरी होगी।

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