स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी रणनीति: 40 जहाजों को सुरक्षित मार्ग से निकालने की तैयारी तेज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीति तेज कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत 40 जहाजों को सुरक्षित मार्ग से निकालने

वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नई चुनौती में डाल दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक खींचतान के कारण इस समुद्री मार्ग में कमर्शियल शिपिंग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

नई दिल्ली: Strait of Hormuz को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण आने वाले दिनों में कमर्शियल शिपिंग ट्रैफिक सामान्य होने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और व्यापारिक आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

इसी स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं। Ministry of Shipping ने Ministry of External Affairs के साथ मिलकर लगभग 40 “प्राथमिकता वाले जहाजों” की सूची तैयार की है, जो भारत की ओर आ रहे हैं या जिनका माल महत्वपूर्ण है।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यह मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए लाइफलाइन माना जाता है। मौजूदा तनाव के कारण इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।

भारत की रणनीति: 40 जहाजों को प्राथमिकता

भारत सरकार ने शिपिंग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के समन्वय से एक सूची तैयार की है, जिसमें लगभग 40 “प्राथमिकता वाले जहाजों” को शामिल किया गया है। इन जहाजों को सुरक्षित मार्ग से बाहर निकालने की योजना पर काम चल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन जहाजों में:

  • लगभग 18 जहाजों में ऊर्जा उत्पाद (oil & energy cargo)
  • 16 जहाजों में उर्वरक (fertilizer)
  • और बाकी जहाजों में अन्य आवश्यक सामान शामिल है

यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आगामी कृषि सीजन, खासकर खरीफ फसल की तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ओमान का समुद्री क्षेत्र क्यों चुना गया?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दक्षिण में स्थित ओमान का समुद्री क्षेत्र अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है। जबकि उत्तर दिशा में स्थित ईरान का समुद्री क्षेत्र वर्तमान तनाव से अधिक प्रभावित है। इसी कारण भारत ने रणनीतिक रूप से जहाजों को ओमान के जलक्षेत्र से बाहर निकालने की योजना बनाई है ताकि जोखिम को कम किया जा सके।

भारत सरकार ने Shipping Corporation of India (SCI) के माध्यम से पश्चिम एशिया तक शिपिंग सेवाओं को पुनः शुरू करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में फंसे माल की आवाजाही को सुचारू बनाना है, खासकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और आसपास के बंदरगाहों के लिए। प्रस्ताव के अनुसार, SCI का पहला जहाज 3,000 से 4,000 कंटेनर लेकर कृषि और आवश्यक वस्तुओं का परिवहन कर सकता है।

उच्च स्तरीय बैठकें और रणनीतिक समीक्षा

इस पूरे मुद्दे पर भारत सरकार बेहद सक्रिय नजर आ रही है। शिपिंग मंत्री Sarbananda Sonowal की अध्यक्षता में लगातार समीक्षा बैठकें हो रही हैं। इन बैठकों में शिपिंग क्षमता बढ़ाने, वैकल्पिक मार्गों की तलाश और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने पर चर्चा की गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत को ऐसे बाहरी झटकों से बचाने के लिए शिपिंग क्षमता को मजबूत करना प्राथमिकता है।

भारत सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में 62 नए जहाज जोड़ने की योजना बनाई है। इसके लिए लगभग ₹51,383 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया है। इस योजना से देश की समुद्री परिवहन क्षमता में 2.85 मिलियन ग्रॉस टन की वृद्धि होने की उम्मीद है। इसमें कंटेनर जहाज, एलपीजी टैंकर, कच्चे तेल के टैंकर और ग्रीन टग शामिल होंगे।

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