Subedaar Review: Anil Kapoor का एक्शन अवतार, क्या ‘सूबेदार’ बना पाएगी ‘नायक’ जैसा जादू?

Subedaar Review: Anil Kapoor का एक्शन अवतार, क्या ‘सूबेदार’ बना पाएगी ‘नायक’ जैसा जादू?

Subedaar में Anil Kapoor एक रिटायर्ड सैनिक के किरदार में नजर आते हैं, जो निजी संघर्ष और अपराध से भरे माहौल के बीच बदले की लड़ाई लड़ता है। दमदार अभिनय के बावजूद कहानी और क्लाइमैक्स पूरी तरह प्रभाव नहीं छोड़ पाते, जिससे फिल्म एक औसत एक्शन ड्रामा बनकर रह जाती है।

Subedaar Review: Anil Kapoor की फिल्म Subedaar ओटीटी प्लेटफॉर्म Amazon Prime Video पर रिलीज हो चुकी है, जिसमें वह रिटायर्ड सैनिक अर्जुन मौर्य की भूमिका निभाते हैं। कहानी एक ऐसे पूर्व फौजी की है जो युद्ध की यादों और पारिवारिक दूरी के बीच जी रहा है, लेकिन स्थानीय अपराध और रेत माफिया से टकराव के बाद बदले की राह पर निकल पड़ता है। फिल्म में उनके साथ Radhika Madan और Aditya Rawal भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। निर्देशक Suresh Triveni ने भावनात्मक और एक्शन तत्वों को मिलाने की कोशिश की है, हालांकि फिल्म का असर मुख्य रूप से अनिल कपूर के प्रदर्शन पर टिका रहता है।

कहानी में फौजी का गुस्सा और बदले की लड़ाई

फिल्म में अर्जुन मौर्य का किरदार निभा रहे Anil Kapoor एक रिटायर्ड सैनिक हैं, जो सेना से लौटने के बाद भी मानसिक रूप से युद्ध की यादों से बाहर नहीं निकल पाते। उनकी निजी जिंदगी भी उलझनों से भरी है, खासकर बेटी श्यामा के साथ रिश्ते में दूरी साफ दिखाई देती है।

कहानी मोड़ तब लेती है जब स्थानीय दबंग और रेत माफिया से जुड़े प्रिंस नाम के किरदार से उनका टकराव होता है। यह किरदार Aditya Rawal ने निभाया है। एक मामूली दिखने वाला विवाद धीरे-धीरे हिंसक टकराव में बदल जाता है और फिल्म बदले की कहानी में बदल जाती है।

अभिनय में अनिल कपूर का दम, बाकी कलाकारों का संतुलित साथ

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष Anil Kapoor का अभिनय है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी फुर्ती और स्क्रीन पर मौजूदगी कहानी को थामे रखती है। गुस्से और भावनात्मक दृश्यों में उनकी पकड़ साफ नजर आती है।

बेटी के किरदार में Radhika Madan ने भी प्रभावशाली काम किया है। पिता और बेटी के बीच टकराव और संवाद फिल्म में भावनात्मक परत जोड़ते हैं। वहीं खलनायक के रूप में Aditya Rawal का किरदार कहानी में तीखापन लाता है, हालांकि Mona Singh जैसी अनुभवी अभिनेत्री को बहुत सीमित स्क्रीन स्पेस मिला है।

निर्देशन और फिल्म की कमजोर कड़ियां

निर्देशक Suresh Triveni अपनी संवेदनशील कहानियों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार फिल्म में एक्शन और भावनाओं के बीच संतुलन थोड़ा कमजोर पड़ता दिखता है। शुरुआत में कहानी एक गहरे सामाजिक और व्यक्तिगत संघर्ष की ओर बढ़ती है, लेकिन आगे चलकर यह पूरी तरह एक्शन ड्रामा बन जाती है।

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर प्रभावी है और एक्शन दृश्यों को ऊर्जा देता है, लेकिन कहानी कई जगह जल्दबाजी में आगे बढ़ती है। खासकर क्लाइमैक्स अपेक्षाकृत जल्दी खत्म हो जाता है, जिससे फिल्म का प्रभाव थोड़ा कम हो जाता है।

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