9 साल की छात्रा की संदिग्ध मौत: परिवार का आरोप स्कूल स्टाफ बच्ची को अस्पताल में छोड़कर भागा; स्टाफ बोला- वॉशरूम में सांप ने काटा

सुल्तानपुर में स्कूल गई 9 साल की छात्रा की संदिग्ध मौत हो गई। परिवार ने स्कूल स्टाफ पर अस्पताल में बच्ची को छोड़कर भागने का आरोप लगाया है।
9 साल की छात्रा की संदिग्ध मौत: परिवार का आरोप स्कूल स्टाफ बच्ची को अस्पताल में छोड़कर भागा; स्टाफ बोला- वॉशरूम में सांप ने काटा
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सुल्तानपुर में स्कूल गई नौ साल की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। बच्ची सोमवार सुबह रोज की तरह स्वस्थ हालत में स्कूल गई थी, लेकिन दोपहर में स्कूल की ओर से परिजनों को फोन कर उसकी तबीयत खराब होने की सूचना दी गई। परिवार के लोग स्कूल पहुंचने के लिए निकले ही थे कि उन्हें जानकारी मिली कि बच्ची को अस्पताल ले जाया गया है। जब परिजन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचे तो बच्ची बेड पर मृत मिली। इसके बाद परिवार ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि बच्ची को अस्पताल में छोड़कर स्कूल स्टाफ वहां से चला गया।

मामला सुल्तानपुर के सौरमऊ स्थित एक निजी स्कूल से जुड़ा है। मृतका की पहचान नेकराही गांव निवासी अकबर अली की नौ वर्षीय बेटी माहरा/माहिरा के रूप में हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बच्ची कक्षा एक में पढ़ती थी। परिजनों का कहना है कि सोमवार सुबह वह बिल्कुल सामान्य थी। उसने घर पर खाना खाया और रोज की तरह बस से स्कूल के लिए रवाना हुई थी। परिवार को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही घंटों बाद उन्हें उसकी मौत की खबर मिलेगी।

दोपहर में स्कूल की तरफ से परिवार को फोन आया कि बच्ची की तबीयत खराब हो गई है। फोन आने के बाद परिजन तुरंत स्कूल की ओर निकल पड़े। इसी दौरान परिवार को दूसरी सूचना मिली कि बच्ची को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया है। परिजन जब अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। बच्ची बेड पर मृत अवस्था में पड़ी थी। परिवार का आरोप है कि उन्हें बच्ची की हालत के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और अस्पताल पहुंचने तक वह दम तोड़ चुकी थी।

मृतका के दादा मोहम्मद अली ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कर्मचारियों से पूछताछ करने पर पता चला कि दो लोग बच्ची को लेकर इमरजेंसी में पहुंचे थे। उन्होंने बच्ची को बेड पर लिटाया और वहां से चले गए। परिवार का कहना है कि बच्ची को अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों की पूरी जानकारी भी अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं कराई गई थी। इसी बात को लेकर परिजनों ने स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

परिवार का आरोप है कि बच्ची की तबीयत स्कूल में बिगड़ी थी, इसलिए स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी थी कि उसे उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती और उसके परिजनों को पूरी जानकारी दी जाती। परिजनों का कहना है कि यदि बच्ची को अस्पताल ले जाया गया था तो स्कूल का कोई जिम्मेदार व्यक्ति उसके साथ रहना चाहिए था। लेकिन उनके मुताबिक जब वे अस्पताल पहुंचे तो वहां स्कूल की तरफ से कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं था।

वहीं, स्कूल की ओर से बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ने की बात कही गई है। उपलब्ध रिपोर्ट में स्कूल प्रबंधक डॉ. वीके शुक्ला के हवाले से बताया गया है कि बच्ची को अचानक झटके आए थे और उसकी हालत गंभीर देखकर उसे अस्पताल भेजा गया। स्कूल प्रबंधन ने स्टाफ के बच्ची को अकेले छोड़कर भागने के आरोप से इनकार किया है और कहा कि बच्ची को स्कूल स्टाफ और ड्राइवर के साथ अस्पताल भेजा गया था।

परिवार और स्कूल प्रबंधन के दावों में अंतर होने के कारण अब पुलिस जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूल में बच्ची के साथ वास्तव में क्या हुआ था। बच्ची की तबीयत अचानक किस वजह से बिगड़ी, उसे अस्पताल ले जाने में कितना समय लगा, उसके साथ अस्पताल कौन-कौन गया और अस्पताल पहुंचने के बाद वे लोग वहां से क्यों चले गए—इन सभी सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आ सकते हैं।

परिजनों की ओर से यह भी कहा गया है कि बच्ची को स्कूल भेजने से पहले उसकी तबीयत सामान्य थी। इसी वजह से परिवार उसकी अचानक मौत को लेकर सवाल उठा रहा है। हालांकि, केवल इस आधार पर मौत का कारण तय नहीं किया जा सकता। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी।

परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच स्कूल स्टाफ की तरफ से बच्ची के वॉशरूम में जाने और वहां सांप के काटने की बात भी बताई जा रही है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में नहीं मिली है। इसलिए फिलहाल इसे स्कूल पक्ष के कथन के तौर पर ही देखा जा सकता है। बच्ची की मौत वास्तव में सांप के काटने से हुई या किसी अन्य कारण से, इसका निर्धारण पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही संभव होगा।

घटना के बाद पुलिस-प्रशासन की टीम मेडिकल कॉलेज पहुंची। क्षेत्राधिकारी नगर राघवेंद्र सिंह ने मामले की जानकारी ली। पुलिस ने स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी देखी। रिपोर्ट के अनुसार फुटेज में बच्ची अचानक गिरती हुई दिखाई दे रही है। परिजनों की मांग पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर मौत की वजह सामने आएगी। तहरीर मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सीसीटीवी फुटेज इस मामले की जांच में अहम हो सकती है। पुलिस यह देख सकती है कि बच्ची स्कूल में किस समय पहुंची, उसकी तबीयत कब बिगड़ी, वह किस स्थान पर गिरी और इसके बाद स्कूल स्टाफ ने क्या कदम उठाए। इसके साथ ही स्कूल के कर्मचारियों, ड्राइवर और बच्ची को अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों से भी जानकारी ली जा सकती है।

अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। पुलिस यह पता कर सकती है कि बच्ची को अस्पताल किस समय लाया गया, उसे लेकर कौन लोग पहुंचे थे और अस्पताल में उसका प्राथमिक परीक्षण किस स्थिति में हुआ। यदि अस्पताल में आने वाले लोगों की पहचान या सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है तो उससे भी घटना की कड़ी जोड़ने में मदद मिल सकती है।

परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुबह स्वस्थ हालत में स्कूल गई बच्ची की कुछ घंटे बाद मौत कैसे हो गई। बच्ची के अचानक गिरने और मौत के बीच की पूरी घटनाक्रम की जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।

मृतका के पिता अकबर अली विदेश में नौकरी करते हैं। परिवार के मुताबिक बच्ची दो बहनों में छोटी थी। उसकी मौत की खबर मिलने के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बच्ची को परिवार ने सुबह सामान्य रूप से स्कूल भेजा था, उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।

फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होगी, क्योंकि उसी से यह स्पष्ट होने में मदद मिलेगी कि बच्ची की मौत किस चिकित्सकीय कारण से हुई। इसके साथ ही स्कूल की सीसीटीवी फुटेज, अस्पताल के रिकॉर्ड और स्कूल स्टाफ के बयान की जांच से घटनाक्रम की तस्वीर और साफ हो सकती है।

मामले में अभी किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। परिवार ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि स्कूल पक्ष ने बच्ची की अचानक तबीयत बिगड़ने की बात कही है। ऐसे में जांच पूरी होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्ची की मौत की असली वजह क्या थी और क्या इस घटना में किसी स्तर पर लापरवाही हुई।

सुल्तानपुर पुलिस और प्रशासन के सामने अब यही चुनौती है कि बच्ची की मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कर परिवार के सवालों का जवाब दिया जाए। यदि जांच में किसी की लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल परिवार पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के परिणाम का इंतजार कर रहा है।

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