सुल्तानपुर के कंपोजिट विद्यालय में फर्जी हाजिरी का खुलासा: 203 में से सिर्फ 119 छात्र मिले, मिड-डे मील में भी गड़बड़ी

सुल्तानपुर के एक कंपोजिट विद्यालय में फर्जी हाजिरी और मिड-डे मील में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। 203 में से सिर्फ 119 छात्र मौजूद मिले, BSA ने कार्रवाई की।
सुल्तानपुर के कंपोजिट विद्यालय में फर्जी हाजिरी का खुलासा: 203 में से सिर्फ 119 छात्र मिले, मिड-डे मील में भी गड़बड़ी
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सुल्तानपुर के एक कंपोजिट विद्यालय में निरीक्षण के दौरान फर्जी हाजिरी और मिड-डे मील योजना में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में स्कूल के रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर पाया गया। रजिस्टर में 203 छात्रों की उपस्थिति दर्ज थी, जबकि मौके पर सिर्फ 119 छात्र ही मौजूद मिले।

निरीक्षण के दौरान बीएसए ने स्कूल की उपस्थिति रजिस्टर, मिड-डे मील रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच की। जांच में सामने आया कि कई छात्रों की उपस्थिति कागजों पर दर्ज थी, लेकिन वे स्कूल में मौजूद नहीं थे। इससे फर्जी हाजिरी का मामला उजागर हो गया।

मिड-डे मील योजना को लेकर भी कई अनियमितताएं सामने आईं। रिकॉर्ड के अनुसार जिस संख्या में छात्रों के लिए भोजन तैयार किया जाना था, वास्तविकता में उतने छात्र स्कूल में मौजूद नहीं थे। इससे मिड-डे मील की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

बीएसए ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित शिक्षकों और जिम्मेदार कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में दोषी पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान बीएसए ने स्कूल की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया और शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करें। साथ ही मिड-डे मील योजना को पारदर्शिता के साथ संचालित करने की भी हिदायत दी गई।

उन्होंने कहा कि स्कूलों में समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके। ऐसे मामलों में लापरवाही सामने आने पर प्रशासन सख्त कदम उठाता है।

इस घटना के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में भी चर्चा शुरू हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी इसी तरह के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे, ताकि स्कूलों में पारदर्शिता बनी रहे और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

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