पूर्व भारतीय कप्तान सुनील छेत्री ने ब्राजील और उरुग्वे के खिलाफ भारत के आगामी मुकाबलों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 20 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्हें ब्राजील जैसी बड़ी टीम के खिलाफ खेलने का अवसर नहीं मिला, जिसे लेकर थोड़ी जलन होती है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: पूर्व भारतीय फुटबॉल कप्तान सुनील छेत्री ने ब्राजील और उरुग्वे जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ भारत के आगामी मुकाबलों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा भारतीय टीम को इन बड़ी फुटबॉल शक्तियों के खिलाफ खेलते देखकर उन्हें थोड़ी जलन होती है। छेत्री के मुताबिक, करीब दो दशक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान उन्हें ब्राजील जैसी टीम के खिलाफ मैदान पर उतरने का अवसर नहीं मिला।
भारत और ब्राजील के बीच फ्रेंडली मुकाबला 3 अक्टूबर को कोलकाता के प्रतिष्ठित साल्ट लेक स्टेडियम में खेला जाना है। इसके तीन दिन बाद 6 अक्टूबर को इसी मैदान पर भारत का सामना उरुग्वे से होगा। इन मुकाबलों को भारतीय फुटबॉल के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।
ब्राजील के खिलाफ खेलने का मौका नहीं मिला
ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन यानी AIFF के हवाले से छेत्री ने कहा कि लगभग 20 साल तक अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खेलने के बावजूद उन्हें ब्राजील जैसी टीम के खिलाफ खेलने का मौका नहीं मिला। उन्होंने मौजूदा भारतीय खिलाड़ियों के लिए ऐसे मुकाबलों को विशेष अवसर बताया।
छेत्री ने कहा कि जब वह देखते हैं कि आज की भारतीय टीम ब्राजील और उरुग्वे जैसी विश्वस्तरीय टीमों के सामने खेलने जा रही है, तो उन्हें थोड़ी जलन महसूस होती है। हालांकि, उनके बयान में मौजूदा टीम के लिए उत्साह और गर्व भी साफ दिखाई दिया।
भारत के लिए ब्राजील के खिलाफ होने वाला मुकाबला खिलाड़ियों को दुनिया के शीर्ष स्तर की फुटबॉल के सामने अपनी क्षमता परखने का अवसर देगा। वहीं, उरुग्वे के खिलाफ मैच भी भारतीय टीम के लिए अनुभव हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का महत्वपूर्ण मौका होगा।
3 अक्टूबर को भारत-ब्राजील मुकाबला
भारत और ब्राजील के बीच मुकाबला 3 अक्टूबर को कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में प्रस्तावित है। इसके बाद 6 अक्टूबर को भारत और उरुग्वे की टीमें भी इसी मैदान पर आमने-सामने होंगी।
सितंबर की अंतरराष्ट्रीय विंडो में भारत के पनामा के खिलाफ खेलने की भी योजना बताई गई है, हालांकि उस मुकाबले की तारीख को लेकर अंतिम घोषणा का इंतजार है।
इन मुकाबलों से भारतीय टीम को अलग-अलग फुटबॉल शैलियों और उच्च स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का अनुभव मिलने की उम्मीद है। भारतीय फुटबॉल के लिए ऐसे मैचों का महत्व केवल परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे खिलाड़ियों को शीर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर की गति, तकनीक और रणनीति समझने का मौका मिलता है।
वापसी के सवाल पर छेत्री ने दिया मजेदार जवाब
छेत्री से जब पूछा गया कि क्या वह भविष्य में एक बार फिर भारतीय जर्सी में खेलते दिखाई दे सकते हैं, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया।
उन्होंने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि वह अब करीब 42 साल के हैं और ठीक से दौड़ भी नहीं पाते। इस जवाब से उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल राष्ट्रीय टीम में वापसी को लेकर उनकी कोई योजना नहीं है।
छेत्री का यह अंदाज उनके प्रशंसकों के लिए खास रहा है। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से दूर होने के बावजूद वह भारतीय फुटबॉल और राष्ट्रीय टीम से जुड़े मुद्दों पर लगातार अपनी राय रखते रहे हैं।
ब्राजील के लिए ढाका में कैंप की तैयारी
भारत के खिलाफ मुकाबले से पहले ब्राजील की टीम के बांग्लादेश के ढाका में ट्रेनिंग कैंप लगाने की संभावना भी सामने आई है। ब्राजील फुटबॉल कन्फेडरेशन के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 23 अगस्त को ढाका का दौरा किया था।
प्रतिनिधिमंडल ने नेशनल स्टेडियम और बशुंधरा किंग्स एरिना सहित कई संभावित स्थानों का निरीक्षण किया। बांग्लादेश फुटबॉल फेडरेशन के अनुसार, ब्राजील के प्रतिनिधियों ने वहां की पिच को संतोषजनक पाया, हालांकि ड्रेसिंग रूम और सुरक्षा व्यवस्था में कुछ सुधार की जरूरत बताई गई।
यदि ब्राजील की टीम भारत के खिलाफ मुकाबले से पहले ढाका में कैंप लगाती है, तो उसे दक्षिण एशिया की परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
भारत के खिलाफ एक और मैच की संभावना
अक्टूबर की अंतरराष्ट्रीय विंडो में भारत के एक और मुकाबले की संभावना भी बताई जा रही है। AIFF केप वर्डे के खिलाफ फ्रेंडली मैच कराने के लिए बातचीत कर रहा है।
संभावित मुकाबला कोलकाता या कोच्चि के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित किया जा सकता है। हालांकि, इस मैच को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
केप वर्डे ने 2026 FIFA विश्व कप में पहली बार हिस्सा लिया था। टीम ने ग्रुप चरण से आगे बढ़ने में सफलता हासिल की थी, लेकिन राउंड ऑफ-32 में अर्जेंटीना से 3-2 की हार के बाद उसका अभियान समाप्त हो गया।
ब्राजील के कारण टूर्नामेंट से हटने का फैसला
भारत को जून में आयोजित होने वाले ASEAN Cup में खेलने का निमंत्रण मिला था। प्रतियोगिता में भारत को मेजबान इंडोनेशिया, सिंगापुर और मलेशिया के साथ ग्रुप में रखा गया था।
हालांकि, ब्राजील के खिलाफ प्रस्तावित मुकाबले और प्रतियोगिता के कार्यक्रम में टकराव के कारण AIFF ने ASEAN Cup से हटने का फैसला किया। इससे यह संकेत मिलता है कि ब्राजील जैसी शीर्ष टीम के खिलाफ खेलने को भारतीय फुटबॉल प्रशासन ने कितना महत्वपूर्ण माना।
भारतीय फुटबॉल के ‘कैप्टन फैंटास्टिक’
सुनील छेत्री भारतीय फुटबॉल इतिहास के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हैं। 3 अगस्त 1984 को सिकंदराबाद में जन्मे छेत्री ने 2002 में मोहन बागान के साथ अपने क्लब करियर की शुरुआत की थी।
इसके बाद उन्होंने जेसीटी, स्पोर्टिंग सीपी की रिजर्व टीम और मेजर लीग सॉकर की टीम कैनसस सिटी विजर्ड्स के लिए भी फुटबॉल खेला। भारत लौटने के बाद बेंगलुरु FC के साथ उनका करियर बेहद सफल रहा। क्लब स्तर पर उन्होंने टीम को कई महत्वपूर्ण घरेलू उपलब्धियां हासिल करने में मदद की।
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राष्ट्रीय टीम के साथ उनका सफर भी बेहद शानदार रहा। छेत्री ने वर्षों तक भारतीय टीम की कप्तानी की और देश को कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में सफलता दिलाई।
पाकिस्तान के खिलाफ किया था अंतरराष्ट्रीय डेब्यू
छेत्री ने 12 जून 2005 को पाकिस्तान के खिलाफ भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। अपने डेब्यू मैच में ही उन्होंने गोल करके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की।
आगे चलकर उन्होंने भारतीय टीम के लिए लगातार शानदार प्रदर्शन किया। उनकी कप्तानी में भारत ने SAFF चैंपियनशिप, नेहरू कप और 2008 AFC चैलेंज कप जैसे खिताब जीते।
उनकी गोल करने की क्षमता, नेतृत्व और मैदान पर प्रभाव के कारण उन्हें प्रशंसकों के बीच ‘कैप्टन फैंटास्टिक’ के नाम से लोकप्रियता मिली। वह भारतीय फुटबॉल की एक ऐसी पीढ़ी का चेहरा रहे, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीम को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
157 मैचों में 95 गोल का रिकॉर्ड
छेत्री के नाम भारतीय फुटबॉल में कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं। उन्होंने भारत के लिए 157 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 95 गोल किए हैं। उनके गोलों की संख्या ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पुरुष फुटबॉल के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष स्थानों के करीब पहुंचाया।
उनका करियर केवल गोल करने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने लंबे समय तक भारतीय टीम की कप्तानी की और युवा खिलाड़ियों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाई।
छेत्री के प्रदर्शन ने भारतीय फुटबॉल में उनकी विरासत को मजबूत किया है। उनकी निरंतरता और पेशेवर रवैये के कारण उन्हें देश के सबसे सम्मानित फुटबॉल खिलाड़ियों में गिना जाता है।
अर्जुन अवॉर्ड और पद्मश्री से सम्मानित
भारतीय फुटबॉल में उनके योगदान के लिए छेत्री को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। उन्हें 2011 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके बाद 2019 में उन्हें पद्मश्री और 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार मिला।
FIFA ने भी उनके करियर और भारतीय फुटबॉल पर प्रभाव को रेखांकित करते हुए 2022 में ‘कैप्टन फैंटास्टिक’ नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी।
अब बड़ी टीमों के खिलाफ भारत की परीक्षा
ब्राजील और उरुग्वे के खिलाफ होने वाले मुकाबले भारतीय फुटबॉल टीम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होंगे। दोनों टीमें अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में लंबे समय से स्थापित नाम रही हैं और उनके खिलाफ खेलने से भारतीय खिलाड़ियों को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा।
छेत्री के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास है क्योंकि उनके अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में ब्राजील के खिलाफ खेलने का अवसर नहीं आया। यही वजह है कि उन्होंने मौजूदा भारतीय टीम को ऐसी विश्वस्तरीय टीमों के खिलाफ खेलते देखने पर अपनी भावना खुलकर जाहिर की।
उनकी टिप्पणी भारतीय फुटबॉल के बदलते दौर की ओर भी इशारा करती है। जहां एक समय भारत के लिए शीर्ष फुटबॉल देशों के खिलाफ मुकाबले दुर्लभ थे, वहीं अब राष्ट्रीय टीम को ब्राजील और उरुग्वे जैसी टीमों के सामने खेलने के अवसर मिल रहे हैं।
इन मुकाबलों का परिणाम चाहे जो हो, भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह अनुभव भविष्य में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। वहीं, सुनील छेत्री की विरासत इस नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनी हुई है।









