सुनील गावस्कर ने टेस्ट क्रिकेट में नो-बॉल की समस्या रोकने के लिए अनोखा सुझाव दिया है। उन्होंने हर नो-बॉल पर जुर्माना लगाने और अगली गलती पर रकम दोगुनी करने की बात कही। गावस्कर के मुताबिक, जमा राशि से टीम डिनर कराया जा सकता है।
क्रिकेट: भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर ने टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजों की नो-बॉल की समस्या से निपटने के लिए एक अनोखा सुझाव दिया है। उनका मानना है कि खिलाड़ियों पर आर्थिक जुर्माना लगाने से गेंदबाज क्रीज की लाइन को लेकर ज्यादा सावधान हो सकते हैं। गावस्कर ने सुझाव दिया कि पहली नो-बॉल पर एक निश्चित जुर्माना लगाया जाए और यदि वही गलती दोबारा होती है तो अगली बार रकम दोगुनी कर दी जाए।
गावस्कर ने यह भी कहा कि केवल गेंदबाज को जिम्मेदार ठहराने के बजाय गेंदबाजी कोच को भी जुर्माने का एक हिस्सा देना चाहिए। उनके अनुसार, जमा की गई राशि को किसी सकारात्मक और टीम को जोड़ने वाली गतिविधि में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने टीम के खिलाड़ियों के अलग होने से पहले होने वाले डिनर का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे माहौल हल्का भी रहेगा और खिलाड़ियों के बीच आपसी संबंध भी मजबूत होंगे।
श्रीलंका सीरीज में भारतीय गेंदबाजों ने 20 नो-बॉल डालीं
गावस्कर का यह सुझाव भारत और श्रीलंका के बीच हालिया दो टेस्ट मैचों की सीरीज के दौरान नो-बॉल की संख्या को लेकर आया है। इस सीरीज में भारतीय गेंदबाजों ने कुल 20 नो-बॉल फेंकीं। पहले टेस्ट में सात जबकि दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम ने 13 नो-बॉल कीं।
गेंदबाजी में इस तरह की गलतियां टेस्ट क्रिकेट में खास तौर पर महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि नो-बॉल से विपक्षी टीम को अतिरिक्त रन मिलता है और कई बार बल्लेबाज को अतिरिक्त जीवन भी मिल सकता है। एक छोटी तकनीकी गलती मैच की दिशा बदलने में भूमिका निभा सकती है।
गावस्कर ने अपने कॉलम में इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए आर्थिक दंड का विचार सामने रखा। उनका मानना है कि यदि खिलाड़ियों को हर गलती का सीधा आर्थिक असर महसूस होगा तो वे अपनी गेंदबाजी में ज्यादा अनुशासन बरतेंगे।
अगली नो-बॉल पर दोगुना हो जुर्माना
गावस्कर का फॉर्मूला काफी सरल है। पहली गलती पर निर्धारित जुर्माना लगाया जाए और यदि कोई खिलाड़ी फिर नो-बॉल करता है तो उसके ऊपर पहले से दोगुना जुर्माना लगाया जाए। इस तरह लगातार गलतियां करने पर रकम बढ़ती चली जाएगी।
उदाहरण के तौर पर यदि पहली नो-बॉल पर 1,000 रुपये का जुर्माना तय किया जाता है तो दूसरी गलती पर 2,000 रुपये, तीसरी पर 4,000 रुपये और अगली पर 8,000 रुपये किए जा सकते हैं। इससे खिलाड़ियों को लगातार होने वाली गलतियों से बचने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है।
गावस्कर ने गेंदबाजी कोच की भूमिका को भी इस व्यवस्था में शामिल करने का सुझाव दिया। उनके मुताबिक कोच को कुल जुर्माने का आधा हिस्सा देना पड़ सकता है। इससे गेंदबाजी कोच भी गेंदबाजों की तकनीक और रन-अप पर अधिक ध्यान देने के लिए प्रेरित होंगे।
जमा रकम से कराया जाए टीम डिनर
गावस्कर ने जुर्माने को केवल सजा के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय उससे टीम के लिए सकारात्मक माहौल बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों से जमा हुई रकम का इस्तेमाल टीम के डिनर के लिए किया जा सकता है।
उनका मानना है कि इससे जुर्माना लगाने का मकसद केवल गलती करने वाले खिलाड़ी को दंडित करना नहीं रहेगा। इसके बजाय पूरी टीम को इसका लाभ मिल सकता है। मैचों और लंबे दौरे के दौरान खिलाड़ियों के बीच अच्छा तालमेल बेहद महत्वपूर्ण होता है।
इस तरह की गतिविधियां टीम के सदस्यों को मैदान से बाहर एक-दूसरे के साथ समय बिताने और बेहतर संबंध बनाने का मौका दे सकती हैं। गावस्कर ने इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए टीम डिनर का सुझाव दिया।
ओवरथ्रो पर बैकअप नहीं देने पर भी लगे जुर्माना
गावस्कर ने केवल नो-बॉल तक अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने मैदान पर होने वाली दूसरी लापरवाहियों के लिए भी आर्थिक दंड की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।
उन्होंने ओवरथ्रो के दौरान बैकअप नहीं देने जैसी गलतियों का उदाहरण दिया। क्रिकेट में फील्डर के गलत स्थान पर होने या गेंद के पीछे बैकअप नहीं देने से विपक्षी टीम को अतिरिक्त रन मिल सकते हैं। ऐसी गलतियां अक्सर खिलाड़ियों की एकाग्रता और फील्डिंग अनुशासन से जुड़ी होती हैं।
गावस्कर के अनुसार, इन मामलों में टीम के खिलाड़ी मिलकर वोटिंग के जरिए जुर्माने की रकम तय कर सकते हैं। इससे खिलाड़ियों में मैदान पर जिम्मेदारी की भावना बढ़ाई जा सकती है।
रन-अप मापने के लिए सुविधा उपलब्ध रहती है
पूर्व भारतीय कप्तान ने नो-बॉल के एक सामान्य कारण पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि गेंदबाजों के लिए रन-अप की दूरी को मापने के लिए टेप जैसी सुविधा उपलब्ध रहती है। ऐसे में गेंदबाज के पैर का क्रीज से आगे निकल जाना पूरी तरह तकनीकी रूप से नियंत्रित की जा सकने वाली गलती है।
उनके मुताबिक गेंदबाज अभ्यास के दौरान अपने रन-अप को सही तरीके से माप सकते हैं और मैच में उसी के अनुसार गेंदबाजी कर सकते हैं। इसलिए लगातार नो-बॉल को केवल संयोग मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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स्पिन कोच के फ्री-हिट सुझाव से अलग राय
भारतीय टीम के स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने नो-बॉल की समस्या को लेकर मजाकिया अंदाज में टेस्ट क्रिकेट में भी फ्री-हिट लागू करने का सुझाव दिया था। उनका विचार था कि बल्लेबाज को फ्री-हिट मिलने का डर गेंदबाजों को नो-बॉल से बचने के लिए प्रेरित कर सकता है।
हालांकि, गावस्कर ने इस विचार से सहमति नहीं जताई। उनका मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को अतिरिक्त फायदा देने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में बल्लेबाजों के लिए रन बनाना पहले ही कुछ हद तक आसान हुआ है।
उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में बाउंसर की सीमा और छोटी बाउंड्री जैसे बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कारणों से बल्लेबाजों को पहले से कुछ अतिरिक्त मदद मिल रही है। ऐसे में नो-बॉल के बाद फ्री-हिट का नियम गेंदबाजों के लिए चुनौती और बढ़ा सकता है।
श्रीलंका के खिलाफ भारत ने 1-0 से जीती सीरीज
भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज भारत ने 1-0 से अपने नाम की। सीरीज का दूसरा मुकाबला कोलंबो में खेला गया, जो ड्रॉ पर समाप्त हुआ।
कोलंबो टेस्ट के आखिरी दिन भारत को जीत के लिए श्रीलंका के चार विकेट लेने थे। हालांकि, श्रीलंका के सोनल दिनूषा ने नाबाद शतक लगाकर भारतीय गेंदबाजों को जीत से दूर रखा और मुकाबला ड्रॉ करा दिया।
पहले टेस्ट में मिली जीत के कारण भारतीय टीम सीरीज अपने नाम करने में सफल रही। हालांकि, पूरी सीरीज में भारतीय गेंदबाजों की ओर से हुई 20 नो-बॉल ने गेंदबाजी अनुशासन को लेकर चर्चा जरूर छेड़ दी।
जडेजा की नो-बॉल पर भी चर्चा
गावस्कर के सुझाव के बीच रविंद्र जडेजा की नो-बॉल का रिकॉर्ड भी चर्चा में आया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में जडेजा 88 से ज्यादा नो-बॉल कर चुके हैं।
एक अनुभवी स्पिन गेंदबाज के लिए नो-बॉल की संख्या पर सवाल उठना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्पिन गेंदबाजों का रन-अप तेज गेंदबाजों की तुलना में सामान्यतः छोटा और नियंत्रित होता है। इसके बावजूद फ्रंट-फुट नो-बॉल होने पर गेंदबाज और टीम दोनों को नुकसान उठाना पड़ता है।
नो-बॉल रोकने के लिए अनुशासन जरूरी
टेस्ट क्रिकेट में एक गेंद कई बार पूरे मैच का रुख बदल सकती है। नो-बॉल के कारण अतिरिक्त रन मिलने के साथ बल्लेबाज को उसी डिलीवरी पर आउट करने का मौका भी खत्म हो जाता है। इसलिए गेंदबाजों के लिए क्रीज के भीतर रहकर गेंद डालना बेहद जरूरी है।
गावस्कर का जुर्माने वाला फॉर्मूला क्रिकेट में किसी आधिकारिक नियम का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि नो-बॉल जैसी दोहराई जाने वाली गलतियों पर खिलाड़ियों में जवाबदेही बढ़ाने का एक सुझाव है। आर्थिक दंड के साथ टीम गतिविधि को जोड़ने का उनका विचार इसे पारंपरिक सजा से अलग बनाता है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि टीमें नो-बॉल और अन्य अनुशासन संबंधी गलतियों को कम करने के लिए किस तरह के आंतरिक नियम अपनाती हैं। फिलहाल गावस्कर का सुझाव क्रिकेट जगत में गेंदबाजों की नो-बॉल और मैदान पर होने वाली छोटी लेकिन महंगी गलतियों को लेकर एक नई बहस जरूर शुरू करता है।










