सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले UGC इक्विटी रेगुलेशन लागू करने की मांग तेज, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में उठी आवाज

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई से पहले UGC इक्विटी रेगुलेशन लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में छात्रों और शिक्षाविदों ने अपने सुझाव

University Grants Commission (UGC) के समता नियमों पर 19 मार्च को Supreme Court of India में होने वाली सुनवाई से पहले, मंगलवार को विभिन्न कार्यकर्ताओं ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

नई दिल्ली: भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव के मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। University Grants Commission (UGC) के इक्विटी रेगुलेशन को लागू करने की मांग सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले जोर पकड़ती दिखाई दे रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने कहा है कि विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए इन नियमों को तुरंत लागू किया जाना जरूरी है।

यह मामला अब Supreme Court of India में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, और उससे पहले विभिन्न संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी चिंताएं और मांगें सामने रखी हैं।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में उठी आवाज

नई दिल्ली में Press Club of India में आयोजित एक जन-सुनवाई और प्रेस वार्ता के दौरान कई सामाजिक संगठनों ने UGC के इक्विटी विनियमों को लागू करने की मांग की। इस कार्यक्रम का आयोजन All India Forum for Equity और समता संघर्ष समिति ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में अब भी जाति, समुदाय और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में स्पष्ट नियम और निगरानी व्यवस्था जरूरी है, ताकि छात्रों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित और समान वातावरण बनाया जा सके।

क्या है UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026

UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए विनियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों के तहत UGC से मान्यता प्राप्त सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य किया गया था। इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रावधान किया गया था, ताकि भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई हो सके और समय पर कार्रवाई की जा सके। नियमों का उद्देश्य शैक्षणिक परिसरों में समावेशन को बढ़ावा देना और जाति आधारित भेदभाव को रोकना था।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी अंतरिम रोक

हालांकि इन नियमों के जारी होने के बाद कई शिक्षकों और संगठनों ने इसका विरोध भी किया। कुछ लोगों का कहना था कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल हो सकता है और इससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो सकता है। विवाद बढ़ने के बाद Supreme Court of India ने 29 जनवरी 2026 को इन विनियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि नियमों का ढांचा “प्रथम दृष्टया अस्पष्ट” है और इसके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए मामले की विस्तृत सुनवाई जरूरी है।

अब 19 मार्च को होने वाली सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि इन नियमों को लागू किया जाए या इनमें बदलाव की जरूरत है। प्रेस वार्ता में कई वक्ताओं ने विश्वविद्यालयों में कथित “संस्थागत भेदभाव” पर चिंता जताई। दिल्ली विश्वविद्यालय की एक संकाय सदस्य कंचन ने कहा कि कई बार छात्रों को मानसिक दबाव, उत्पीड़न और भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।

उन्होंने UGC विनियमों की धारा 3(B) और 3(C) का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें ऐसे व्यवहार को अपराध माना गया है जो किसी छात्र को डर, असुविधा या अपमान का अनुभव कराए। धारा 3(C) में जाति आधारित भेदभाव को स्पष्ट रूप से अनुचित व्यवहार बताया गया है, और इसका उद्देश्य पीड़ितों को शिकायत दर्ज करने का सुरक्षित मंच देना है।

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