Supreme Court on Sanjay Raut: राहुल गांधी से मुलाकात विवाद के बीच संजय राउत से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

Supreme Court on Sanjay Raut: राहुल गांधी से मुलाकात को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत से स्पष्टीकरण मांगा है। जानें क्या है पूरा मामला और

सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया है। 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत के आचरण को लेकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिका पर विचार करते समय राउत के आचरण से जुड़े सवाल का जवाब भी मांगा जाएगा। 

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी न्यायपालिका को डरा या धमका नहीं सकता। यह मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।

SIR मामले में राहुल गांधी समेत 13 याचिकाकर्ता

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिका में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए गए हैं। इस याचिका में कुल 13 याचिकाकर्ता शामिल हैं, जिनमें शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत भी हैं। याचिकाकर्ताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और संशोधन की प्रक्रिया का निष्पक्ष तरीके से परीक्षण किया जाना चाहिए। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची शामिल हैं, ने सुनवाई के दौरान कहा कि राउत की ओर से दायर याचिका पर फिलहाल विचार किया जा रहा है, लेकिन उन्हें अपने आचरण के संबंध में स्पष्टीकरण देना होगा।

CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?

Supreme Court on Sanjay Raut: राहुल गांधी से मुलाकात विवाद के बीच संजय राउत से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका पर दबाव डालने या उसे डराने की किसी भी कोशिश के खिलाफ सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता। सीजेआई ने यह भी टिप्पणी की कि अदालतें बाहरी दुनिया में दिए जा रहे बयानों से अनजान नहीं हैं। उनके मुताबिक, न्यायपालिका को पता है कि अदालत के बाहर क्या कहा जा रहा है और सुनवाई के दौरान क्या दलीलें दी जा रही हैं।

पीठ ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर सवाल किया जाएगा। अदालत की टिप्पणी के बाद इस मामले में संजय राउत की भूमिका और उनके बयानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अदालत की टिप्पणी को किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। राउत को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने के बाद ही इस मुद्दे पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

राहुल गांधी से मुलाकात को लेकर क्या है विवाद?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, संजय राउत ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात नहीं किए जाने के संदर्भ में सीजेआई की आलोचना की थी। इसी पृष्ठभूमि में अदालत में उनके आचरण का मुद्दा सामने आया। इस घटनाक्रम ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, राजनीतिक नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों और संवैधानिक संस्थाओं के बीच संवाद को लेकर बहस को जन्म दिया है। 

हालांकि, राउत के बयान और अदालत की टिप्पणी के बीच संबंध का आकलन आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड तथा संबंधित बयानों के संदर्भ में किया जाना जरूरी है।

चुनाव आयोग और शीर्ष अधिकारियों से जवाब तलब

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित संबंधित चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी से भी जवाब मांगा है। अदालत ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका पर संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याचिका में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाए और इसमें तकनीकी विशेषज्ञों तथा अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों को भी शामिल किया जाए।

याचिकाकर्ता चाहते हैं कि समिति तय समयसीमा के भीतर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान हटाए गए नामों और किए गए संशोधनों का स्वतंत्र ऑडिट करे। उनका तर्क है कि ऐसी समीक्षा से प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता का आकलन किया जा सकेगा।

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