Rhea Chakraborty ने हाल ही में Neha Dhupia और Angad Bedi के चैट शो ‘डबल डेट’ में अपने जीवन के कठिन दौर पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अभिनेता Sushant Singh Rajput की मौत के बाद उनके जीवन में बड़ा भावनात्मक और मानसिक बदलाव आया, जिसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद अपने जीवन में आए कठिन दौर, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संघर्षों को लेकर खुलकर बात की है। एक हालिया बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय के अनुभवों ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ा और वह इसे एक ऐसे आघात (ट्रॉमा) के रूप में देखती हैं, जिससे पूरी तरह उबरना आसान नहीं होता।
रिया अपने भाई शोविक चक्रवर्ती के साथ एक चैट शो में शामिल हुईं, जहां दोनों ने 2020 के घटनाक्रम के बाद अपने जीवन में आए बदलाव, मानसिक चुनौतियों और उपचार की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की।
सार्वजनिक विवाद ने बदली जिंदगी
2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद मामले की जांच के दौरान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स से जुड़े एक मामले में रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती से पूछताछ की थी। बाद में दोनों को गिरफ्तार भी किया गया था। यह मामला लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहा।
हालिया बातचीत में रिया ने कहा कि उस दौर ने उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि जब किसी व्यक्ति का निजी संघर्ष सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन जाता है, तो मानसिक दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
रिया बोलीं— ट्रॉमा पूरी तरह खत्म नहीं होता
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अब उस दौर से पूरी तरह बाहर निकल चुकी हैं, तो रिया ने कहा कि मानसिक आघात को किसी निश्चित समय सीमा में खत्म नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, ट्रॉमा केवल दिमाग में नहीं बल्कि व्यक्ति के पूरे अनुभव और व्यवहार का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ होने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और इसे किसी अंतिम मंजिल की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। रिया ने बताया कि थेरेपी, आत्म-स्वीकृति और समय ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की, लेकिन कुछ अनुभव जीवनभर व्यक्ति के साथ रहते हैं।
शोविक चक्रवर्ती ने साझा किया अपना अनुभव
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रिया के भाई शोविक चक्रवर्ती ने भी उस दौर के प्रभाव के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि घटनाओं से पहले उनका ध्यान पूरी तरह पढ़ाई और करियर पर था तथा वह प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों में प्रवेश की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, परिस्थितियां अचानक बदल गईं और उनका जीवन पूरी तरह अलग दिशा में चला गया।
शोविक ने कहा कि कई वर्षों के बाद भी वे उस दौर के मानसिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाए हैं और आज भी कुछ परिस्थितियां उन्हें पुरानी घटनाओं की याद दिला देती हैं।
पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) का किया जिक्र
बातचीत के दौरान शोविक ने बताया कि उन्हें अब भी पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) के लक्षण महसूस होते हैं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी साधारण घटनाएं, जैसे अचानक डोरबेल बजना, भी उन्हें उस समय की याद दिला देती हैं। उनके अनुसार, उस दौर में लगातार जांच एजेंसियों और मीडिया की मौजूदगी के कारण हर छोटी आवाज भी तनाव का कारण बन जाती थी।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, PTSD एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी गंभीर या तनावपूर्ण घटना के बाद व्यक्ति लंबे समय तक मानसिक और भावनात्मक प्रभाव महसूस कर सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने की जरूरत
रिया चक्रवर्ती ने बातचीत के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर चर्चा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि थेरेपी लेना, भावनात्मक सहायता स्वीकार करना और समय के साथ स्वयं को संभालना किसी भी व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि कठिन परिस्थितियों से गुजरने वाले लोगों को अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय पेशेवर सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।










