Suzlon Energy: Wind 2.0 से ग्रोथ को मिलेंगे नए पंख, गिरावट के बाद भी क्यों ब्रोकरेज को दिख रहा 55% रिटर्न का मौका

Suzlon Energy: Wind 2.0 से ग्रोथ को मिलेंगे नए पंख, गिरावट के बाद भी क्यों ब्रोकरेज को दिख रहा 55% रिटर्न का मौका

Suzlon Energy का शेयर 52-वीक लो पर फिसलने के बावजूद ब्रोकरेज मोतीलाल ओसवाल बुलिश है। Wind 2.0 रणनीति, बढ़ती विंड एनर्जी मांग और EPC फोकस के दम पर स्टॉक में 55% तक अपसाइड की उम्मीद जताई गई है।

Suzlon Energy Share: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की जानी-मानी कंपनी सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड (Suzlon Energy) इन दिनों शेयर बाजार में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। हालिया गिरावट ने निवेशकों की चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन इसी गिरावट के बीच ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने स्टॉक पर पॉजिटिव नजरिया बरकरार रखा है। ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा कीमतों पर रिस्क के मुकाबले संभावित रिवार्ड ज्यादा आकर्षक नजर आता है। यही वजह है कि गिरते बाजार में भी सुजलॉन एनर्जी को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

52 वीक लो पर फिसला शेयर

मंगलवार 20 जनवरी को सुजलॉन एनर्जी के शेयर बीएसई पर 2 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर अपने 52 वीक लो लेवल पर आ गए। ताजा गिरावट के साथ यह शेयर अपने हालिया उच्च स्तर से करीब 35 प्रतिशत टूट चुका है। लंबे समय से शेयर में कमजोरी देखने को मिल रही है, जिससे शॉर्ट टर्म निवेशकों में बेचैनी स्वाभाविक है। हालांकि, जानकार मानते हैं कि कई बार ऐसी गिरावट लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए मौका भी लेकर आती है।

मोतीलाल ओसवाल का बुलिश आउटलुक

ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने सुजलॉन एनर्जी पर अपनी BUY रेटिंग को बरकरार रखा है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए 74 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा स्तर से यह करीब 55 प्रतिशत तक के अपसाइड की संभावना दिखाता है। सोमवार को सुजलॉन एनर्जी का शेयर 48 रुपये पर बंद हुआ था। ब्रोकरेज का साफ कहना है कि शेयर कीमत में ज्यादातर नकारात्मक फैक्टर पहले ही शामिल हो चुके हैं और अब यहां से रिस्क रिवार्ड रेश्यो बेहतर दिखाई देता है।

गिरावट के पीछे क्या रही वजह

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में सुजलॉन एनर्जी के शेयर पर दबाव के कई कारण रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह रही कि सरकारी टेंडर्स में सोलर एनर्जी की बढ़ती हिस्सेदारी के चलते विंड एनर्जी को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स की स्थापना की रफ्तार धीमी होने और सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भी निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर हुआ।

हालांकि ब्रोकरेज का मानना है कि ये चिंताएं काफी हद तक जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर देखी गई हैं और जमीनी हकीकत थोड़ी अलग है।

विंड एनर्जी की बढ़ती मांग की तस्वीर

ब्रोकरेज के अनुसार, डाटा सेंटर्स, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कंजम्प्शन तथा सरकारी कंपनियों की जरूरतें मिलकर वर्ष 2030 तक विंड एनर्जी की मांग में 20 से 24 गीगावाट की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकती हैं। यह मांग भारत के FY30 तक 100 गीगावाट विंड एनर्जी कैपेसिटी के लक्ष्य से अलग होगी। यानी आने वाले वर्षों में विंड एनर्जी के लिए एक मजबूत डिमांड बेस तैयार हो सकता है।

ऑर्डर बुक में EPC का बढ़ता रोल

सुजलॉन एनर्जी की एक बड़ी ताकत उसकी रणनीति है। कंपनी अपने ऑर्डर बुक में EPC यानी Engineering Procurement and Construction का हिस्सा बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाना चाहती है। इससे कंपनी को सिर्फ टरबाइन सप्लायर नहीं, बल्कि एंड टू एंड सॉल्यूशन प्रोवाइडर बनने में मदद मिलेगी। ब्रोकरेज का मानना है कि यह रणनीति सुजलॉन को प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले मजबूत बढ़त देती है।

एग्जीक्यूशन में मजबूत रिकॉर्ड

रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू कंपनियों की तुलना में सुजलॉन का प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन रिकॉर्ड बेहतर रहा है। साथ ही, भारत में विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियों की भागीदारी सीमित है। इसका सीधा फायदा सुजलॉन जैसी घरेलू कंपनी को मिलता है। बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स हासिल करने में यह एक अहम प्लस पॉइंट साबित हो सकता है।

सोलर बनाम विंड का समीकरण

जिन 40 गीगावाट परियोजनाओं के बिजली खरीद समझौते अभी लंबित हैं, उनमें से करीब 17 गीगावाट सिर्फ सोलर एनर्जी से जुड़े हैं। विंड एनर्जी की हिस्सेदारी इसमें अभी कम है। ब्रोकरेज का मानना है कि जैसे-जैसे पावर मिक्स में बैलेंस बनाने की जरूरत बढ़ेगी, वैसे-वैसे विंड एनर्जी को भी नया सपोर्ट मिलेगा। इससे सुजलॉन जैसे प्लेयर्स के लिए मौके बन सकते हैं।

एक्सपोर्ट बनेगा नया ग्रोथ इंजन

सुजलॉन का मैनेजमेंट निर्यात को भविष्य का एक अहम ग्रोथ ड्राइवर मानता है। कंपनी को उम्मीद है कि FY27 की शुरुआत में एक्सपोर्ट से जुड़े ऑर्डर्स मिलने शुरू हो सकते हैं। वहीं FY28 से इन ऑर्डर्स की सप्लाई शुरू होने की संभावना है। अगर यह रणनीति सफल होती है, तो सुजलॉन के रेवेन्यू प्रोफाइल में बड़ा बदलाव आ सकता है।

शेयर में अब क्या रिस्क बाकी है

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि मौजूदा शेयर कीमत में सुजलॉन एनर्जी से जुड़ी ज्यादातर चिंताएं पहले ही शामिल हो चुकी हैं। इसमें सेक्टर की प्रतिस्पर्धा, सोलर एनर्जी का दबाव और विंड प्रोजेक्ट्स की धीमी रफ्तार जैसी बातें शामिल हैं। ऐसे में अब नीचे की ओर जोखिम सीमित नजर आता है, जबकि ऊपर की ओर संभावनाएं ज्यादा आकर्षक हैं।

Wind 2.0 और Suzlon 2.0 की तैयारी

सुजलॉन अब अपने अगले विकास चरण के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रही है। कंपनी Wind 2.0 के जरिए अपने कोर विंड एनर्जी बिजनेस को नए सिरे से मजबूत कर रही है। वहीं Suzlon 2.0 के तहत पवन ऊर्जा से आगे के क्षेत्रों में विस्तार की योजना पर काम किया जा रहा है।

मैनेजमेंट का विजन

सुजलॉन एनर्जी के वाइस चेयरमैन गिरीश तांती के अनुसार, Wind 2.0 के तहत प्रोडक्ट डेवलपमेंट को एक अलग डिवीजन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ EPC और सर्विस बिजनेस को भी मजबूत किया जा रहा है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, ग्राहकों को बेहतर वैल्यू और वर्कप्लेस सेफ्टी पर खास फोकस किया जा रहा है।

ग्लोबल लेवल पर सुजलॉन की पहचान

गिरीश तांती ने यह भी बताया कि सुजलॉन दुनिया की उन चुनिंदा पांच कंपनियों में शामिल है, जो अब भी ग्लोबल विंड एनर्जी बिजनेस में सक्रिय हैं। इनमें अमेरिका की GE और यूरोप की Siemens, Vestas और Nordex शामिल हैं। सुजलॉन इन सभी के बीच ग्लोबल साउथ से आने वाली इकलौती कंपनी है, जो इसे एक खास पहचान देती है।

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