राज्यसभा सांसद स्वाति मालिवाल ने आम आदमी पार्टी छोड़ने और बीजेपी ज्वाइन करने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। उन्होंने शनिवार को बताया कि मैंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी है और मैं बीजेपी में शामिल हो गई हूं।
नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ज्वाइन कर ली है। इस फैसले ने देश की राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है, खासकर तब जब AAP के कई अन्य सांसदों ने भी पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है।
AAP छोड़ने की वजह: “सम्मान और सुरक्षा का अभाव”
स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ने के पीछे व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों कारण बताए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में उन्हें सम्मान और सुरक्षा नहीं मिली।उन्होंने सीधे तौर पर AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि:
- उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ
- आवाज उठाने पर उन्हें डराया और धमकाया गया
- संसद में बोलने का अवसर भी सीमित किया गया
मालीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ शारीरिक हमला करवाया गया, जिसे लेकर उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों पर AAP की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
बीजेपी में शामिल होने का कारण
बीजेपी में शामिल होने के फैसले को लेकर मालीवाल ने कहा कि यह कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक विचारधारा आधारित निर्णय है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा कि:
- प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली नेता हैं
- महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं
- राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर सरकार का दृष्टिकोण मजबूत है
मालीवाल के अनुसार, वे देशहित और बेहतर शासन की सोच के साथ बीजेपी में शामिल हुई हैं।
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AAP में बढ़ती राजनीतिक हलचल
स्वाति मालीवाल का यह कदम ऐसे समय में आया है जब AAP के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। इससे पहले पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने भी पार्टी छोड़ने का ऐलान किया। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- राघव चड्ढा
- संदीप पाठक
- अशोक मित्तल
इन नेताओं ने संयुक्त रूप से पार्टी से अलग होने का फैसला लिया, जिससे AAP को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। मालीवाल ने अपने बयान में पंजाब सरकार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में शासन “रिमोट कंट्रोल” से चलाया जा रहा है और वहां कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे गंभीर हैं।हालांकि, इन आरोपों पर भी आधिकारिक पुष्टि या स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।









