अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर लगने वाले टैरिफ रद्द कर दिए। इस फैसले से यूरोप को राहत मिली है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इसका स्वागत करते हुए सहयोगी देशों के बीच संवाद पर जोर दिया।
World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने यूरोपीय देशों को राहत दी है। ट्रंप ने उन टैरिफ (tariff) को रद्द करने का ऐलान कर दिया है, जो फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क समेत कई यूरोपीय देशों पर लागू होने वाले थे। इस फैसले के बाद यूरोप की राजनीति और कूटनीति में हलचल देखने को मिली है। खासतौर पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) की प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बन गई है। उन्होंने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया और सहयोगी देशों के बीच संवाद (dialogue) को सबसे जरूरी बताया।
यह पूरा मामला क्यों पैदा हुआ, ट्रंप ने टैरिफ लगाने का फैसला क्यों लिया था और मेलोनी ने इस पर क्या कहा, इन सभी सवालों के जवाब इस खबर में विस्तार से समझे जा सकते हैं।
दावोस से आया ट्रंप का बड़ा ऐलान
स्विट्जरलैंड के दावोस (Davos) में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब उन टैरिफ को लागू नहीं करेगा, जिनकी घोषणा पहले यूरोप के कई देशों पर की गई थी। ये टैरिफ 1 फरवरी से लागू होने वाले थे और इससे यूरोपीय देशों में चिंता का माहौल बन गया था।
ट्रंप के इस कदम को यूरोप और अमेरिका के बीच रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। क्योंकि अगर ये टैरिफ लागू हो जाते, तो व्यापारिक रिश्तों के साथ-साथ राजनीतिक तनाव भी बढ़ सकता था।
यूरोपीय नेताओं ने किया फैसले का स्वागत
ट्रंप के टैरिफ हटाने के ऐलान के बाद यूरोपीय देशों के नेताओं ने राहत की सांस ली। कई नेताओं ने इसे सकारात्मक कदम बताया। इसी कड़ी में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की प्रतिक्रिया सामने आई, जिसने इस फैसले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया।
मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि अमेरिका और यूरोप जैसे सहयोगी देशों के बीच संवाद बेहद जरूरी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि टैरिफ हटाने का फैसला सही दिशा में उठाया गया कदम है।
मेलोनी का बयान
जॉर्जिया मेलोनी ने अपने पोस्ट में लिखा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से 1 फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ को रद्द करने के फैसले का स्वागत करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इटली हमेशा से यह मानता आया है कि सहयोगी देशों के बीच बातचीत और संवाद को बढ़ावा देना जरूरी है।

मेलोनी का यह बयान सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका और यूरोप के रिश्तों की बड़ी तस्वीर को भी दिखाता है। उनका मानना है कि आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए, न कि आर्थिक दबाव के जरिए।
पहले भी संवाद पर जोर देती रही हैं मेलोनी
यह पहली बार नहीं है जब इटली की प्रधानमंत्री ने संवाद की अहमियत पर जोर दिया हो। इससे पहले भी वह ट्रंप और अन्य NATO सहयोगियों के साथ बातचीत की जरूरत पर बात कर चुकी हैं। अपनी जापान यात्रा के दौरान भी मेलोनी ने ग्रीनलैंड (Greenland) के मुद्दे को ट्रंप के साथ बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही थी।
मेलोनी का रुख साफ है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों में सहयोग और बातचीत सबसे बेहतर रास्ता होता है। यही वजह है कि ट्रंप के इस फैसले पर उन्होंने खुलकर समर्थन जताया।
ट्रंप ने यूरोप पर टैरिफ लगाने का फैसला क्यों किया
अब सवाल उठता है कि आखिर ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा क्यों की थी। दरअसल, ट्रंप का मानना था कि कुछ यूरोपीय देश ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका के साथ गंभीर और सार्थक बातचीत नहीं कर रहे थे।
इस वजह से उन्होंने फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क जैसे देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इस फैसले से NATO के कई सहयोगी देशों में नाराजगी और चिंता दोनों देखने को मिली थी।
NATO में मची थी हलचल
ट्रंप के टैरिफ ऐलान के बाद NATO के भीतर भी खलबली मच गई थी। कई देशों को डर था कि इससे अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में दरार आ सकती है। टैरिफ लागू होने की तारीख नजदीक आ रही थी और इससे पहले ही बातचीत का दौर तेज हो गया। यही वह समय था जब NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रुटे (Mark Rutte) ने ट्रंप से बातचीत की। इस बातचीत के बाद हालात तेजी से बदले।
मार्क रुटे से बातचीत के बाद बदला फैसला
NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रुटे के साथ बातचीत के बाद ट्रंप ने टैरिफ हटाने का फैसला किया। रुटे ने साफ तौर पर कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का रुख सही है। इस समर्थन के बाद ट्रंप भी संतुष्ट नजर आए और उन्होंने यूरोपीय देशों पर लगाए जाने वाले टैरिफ को रद्द करने की घोषणा कर दी।
इस फैसले को NATO और यूरोप के लिए राहत भरे कदम के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि इससे यह साफ हुआ कि बातचीत के जरिए बड़े फैसलों को बदला जा सकता है।
ग्रीनलैंड मुद्दे से जुड़ा है पूरा विवाद
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में ग्रीनलैंड का मुद्दा रहा है। ट्रंप का मानना था कि इस विषय पर यूरोपीय देश अमेरिका के साथ खुलकर बात नहीं कर रहे थे। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने टैरिफ का सहारा लिया। हालांकि, अब NATO के समर्थन और बातचीत के बाद ट्रंप ने अपना फैसला बदल लिया है।











