अभिनेत्री Tamannaah Bhatia से जुड़े एक लंबे समय से चल रहे ब्रांड एंडोर्समेंट विवाद में मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने उनकी अपील को खारिज करते हुए सिंगल जज बेंच के पहले के आदेश को बरकरार रखा।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: Tamannaah Bhatia इन दिनों अपने फिल्मी प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ एक कानूनी विवाद को लेकर भी सुर्खियों में हैं। मामला Power Soaps Limited से जुड़ा है, जिस पर तमन्ना भाटिया ने आरोप लगाया है कि एग्रीमेंट खत्म होने के बावजूद कंपनी ने अपने उत्पादों के प्रचार के लिए उनकी तस्वीरों का बिना अनुमति इस्तेमाल किया।
इस विवाद को लेकर अभिनेत्री ने कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा था और लगभग 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी की थी। फिलहाल इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और दोनों पक्षों की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में सिंगल जज का निर्णय उचित था और उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही Tamannaah Bhatia की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया गया। इस फैसले के बाद कंपनी के पक्ष में पूर्व आदेश प्रभावी रहेगा।
क्या है पूरा विवाद?
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मामला एक पुराने विज्ञापन अनुबंध से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, Tamannaah Bhatia ने 7 अक्टूबर 2008 को एक साबुन निर्माता कंपनी Power Soaps Limited के साथ एग्रीमेंट साइन किया था। अनुबंध के तहत उन्हें 6 अक्टूबर 2009 तक ब्रांड का प्रचार करना था। अभिनेत्री का आरोप है कि अनुबंध समाप्त होने के बाद भी कंपनी ने उनके नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल जारी रखा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवंबर 2010 से फरवरी 2011 के बीच उनके फोटो वाले साबुन पैकेट बाजार में देखे गए, जबकि उस समय वह अन्य ब्रांड्स के साथ बातचीत कर रही थीं।
कानूनी नोटिस और ₹1 करोड़ की मांग
Tamannaah Bhatia ने कंपनी और उसकी विज्ञापन एजेंसी को जनवरी और फरवरी 2011 में कानूनी नोटिस भेजा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख करते हुए ₹1 करोड़ के मुआवजे की मांग की, यह दावा करते हुए कि उनकी अनुमति के बिना उनकी छवि का व्यावसायिक उपयोग किया गया।
इससे पहले हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने भी अभिनेत्री की याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने माना था कि मामले में अनुबंध की शर्तों और उसके बाद के उपयोग को लेकर पर्याप्त आधार नहीं बनता। अब डिवीजन बेंच ने भी उसी निर्णय को सही ठहराया है। यह मामला एक बार फिर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में इमेज राइट्स, एंडोर्समेंट कॉन्ट्रैक्ट्स और ब्रांड जिम्मेदारी पर चर्चा को तेज करता है।








