तमिलनाडु विधानसभा में आज विपक्ष के आरोपों का जवाब देंगे CM विजय, कानून-व्यवस्था पर रहेगा फोकस

तमिलनाडु CM विजय आज विधानसभा में कानून-व्यवस्था पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देंगे। सदन में पुलिस, सुरक्षा और अन्य विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय सोमवार को विधानसभा में विपक्ष के कानून-व्यवस्था संबंधी आरोपों का जवाब देंगे। तीन दिन के अवकाश के बाद सदन सुबह 9:30 बजे फिर शुरू होगा। स्पीकर ने प्रश्नकाल नहीं कराने की घोषणा की है।

चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही तीन दिन के अवकाश के बाद सोमवार को फिर शुरू होगी। सदन की बैठक सुबह 9:30 बजे शुरू होगी। विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि सोमवार की कार्यवाही में प्रश्नकाल नहीं होगा। हालांकि, सदन में सरकार एक संशोधन विधेयक पेश करेगी। इसके बाद सूचीबद्ध अन्य सरकारी कामकाज और विभागों से संबंधित चर्चा आगे बढ़ेगी। सोमवार की बैठक को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री विजय विपक्ष द्वारा राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर लगाए गए आरोपों का विस्तृत जवाब देने की तैयारी में हैं।

कानून-व्यवस्था पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

विधानसभा में इससे पहले पुलिस तथा अग्निशमन एवं बचाव सेवा विभागों की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई थी। दोनों विभाग मुख्यमंत्री विजय के अधीन हैं।

विपक्ष के नेता उधयनिधि स्टालिन और AIADMK विधायक दल के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने राज्य में कानून-व्यवस्था संभालने के सरकार के तरीके की आलोचना की।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि नई सरकार के कार्यकाल में अपराध और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर स्थिति चिंताजनक रही है। इन आरोपों पर मुख्यमंत्री ने सदन में विस्तृत जवाब देने का आश्वासन दिया था।

उधयनिधि स्टालिन ने उठाए अपराध के आंकड़े

बहस के दौरान उधयनिधि स्टालिन ने दावा किया कि नई सरकार के शुरुआती 116 दिनों में तमिलनाडु “रिवर्स गियर” में चला गया है।

उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में करीब 550 आपराधिक घटनाएं दर्ज हुईं। उनके अनुसार, इनमें लगभग 200 हत्याएं, 300 से अधिक यौन उत्पीड़न के मामले, पुलिस से संबंधित आठ मौतें और 10 संदिग्ध ऑनर किलिंग शामिल हैं।

ये आंकड़े विपक्ष की ओर से सरकार की कानून-व्यवस्था व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए विधानसभा में रखे गए थे। मुख्यमंत्री विजय अब इन आरोपों और विपक्ष द्वारा उठाए गए अन्य सवालों का जवाब देने वाले हैं।

मुख्यमंत्री ने दिया था हर सवाल का जवाब देने का भरोसा

विधानसभा में बहस के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए प्रत्येक सवाल का विस्तृत जवाब देने की बात कही थी।

उन्होंने DMK विधायकों से यह भी कहा था कि वे सदन से वॉकआउट करने के बजाय सदन में मौजूद रहें और उनका जवाब सुनें।

अब मुख्यमंत्री के जवाब को सोमवार की कार्यवाही का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। कानून-व्यवस्था पर विपक्ष के आरोपों के जवाब में सरकार की ओर से पुलिसिंग और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कदमों की जानकारी दिए जाने की संभावना है।

सदन में तीखी बहस के आसार

मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस होने की संभावना है। कानून-व्यवस्था का मुद्दा पहले ही विधानसभा में प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।

मुख्यमंत्री विजय विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ पुलिस व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और अग्निशमन एवं बचाव सेवाओं से जुड़े अतिरिक्त उपायों की घोषणा भी कर सकते हैं।

इससे सोमवार की बैठक का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि सरकार की ओर से उठाए जाने वाले नए कदमों से यह संकेत मिल सकता है कि प्रशासन कानून-व्यवस्था और आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

वन और अन्य विभागों की अनुदान मांगों पर होगी चर्चा

मुख्यमंत्री के जवाब के बाद विधानसभा में कई अन्य विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी। इनमें वन, वाणिज्यिक कर, स्टांप एवं पंजीकरण, पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन विभाग शामिल हैं।

इन विभागों से संबंधित मंत्री सदन में हुई बहस का जवाब देंगे। साथ ही, अपने-अपने विभागों से जुड़े नए कार्यक्रमों और पहलों की घोषणा भी किए जाने की संभावना है।

इस तरह सोमवार की कार्यवाही केवल कानून-व्यवस्था के मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विभिन्न विभागों के कामकाज और सरकारी खर्च से संबंधित विषय भी सदन के एजेंडे में होंगे।

18 दिनों से जारी है विधानसभा का मौजूदा सत्र

तमिलनाडु विधानसभा का मौजूदा सत्र अब तक 18 दिनों तक चल चुका है। इस दौरान सरकार के खर्च, विभिन्न विभागों के प्रदर्शन और अनुदान मांगों पर व्यापक चर्चा हुई है।

विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर बहस देखने को मिली है। हालांकि, कानून-व्यवस्था का मुद्दा विशेष रूप से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है क्योंकि पुलिस और अग्निशमन एवं बचाव सेवाओं से जुड़े विभाग मुख्यमंत्री के पास हैं।

सोमवार को मुख्यमंत्री का जवाब इस बहस को एक नया राजनीतिक आयाम दे सकता है।

सत्र के अंतिम चरण की दिशा तय कर सकता है जवाब

मुख्यमंत्री विजय का विधानसभा में दिया जाने वाला जवाब मौजूदा सत्र के अंतिम चरण की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है। विपक्ष जहां कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है, वहीं सरकार को अपने प्रशासनिक प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था का बचाव करना होगा।

मुख्यमंत्री के जवाब में विपक्ष के आरोपों पर तथ्यात्मक प्रतिक्रिया के साथ सरकार की ओर से आगे की रणनीति और संभावित उपायों का उल्लेख किए जाने की उम्मीद है।

विधानसभा की सोमवार की बैठक पर इसलिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों नजरें टिकी हैं। एक ओर विपक्ष कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं मुख्यमंत्री अपने जवाब के जरिए सरकार का पक्ष रखने की तैयारी में हैं।

सदन में इसके बाद विभागीय अनुदान मांगों पर चर्चा जारी रहेगी। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के जवाब तथा संभावित नई घोषणाएं सत्र के समापन से पहले सरकार की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट कर सकती हैं।

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