जन्माष्टमी पर तमिलनाडु CM विजय ने दी शुभकामनाएं, बोले- प्रेम और सद्गुणों से बने बेहतर दुनिया

तमिलनाडु मुख़्यमंत्री जोसेफ विजय ने जन्माष्टमी पर शुभकामनाएं देते हुए धर्म, कर्तव्य और सद्गुणों पर जोर दिया। PM मोदी ने भी देशवासियों को पर्व की बधाई दी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने शुक्रवार को जन्माष्टमी के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए धर्म, कर्तव्य, मानसिक दृढ़ता और विश्वास के मूल्यों पर जोर दिया तथा प्रेम और सद्गुणों से परिपूर्ण बेहतर दुनिया बनाने का संदेश दिया।

चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने शुक्रवार को कृष्ण जयंती यानी जन्माष्टमी के अवसर पर देश और प्रदेश के लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संदेश जारी कर त्योहार की बधाई दी और लोगों के जीवन में खुशी, सकारात्मकता तथा नैतिक मूल्यों की कामना की। मुख्यमंत्री विजय ने अपने संदेश में कहा कि कृष्ण जयंती ऐसा अवसर है जब घरों और लोगों के दिलों में उत्साह और खुशी का माहौल होता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।

उनके संदेश का मुख्य केंद्र धर्म, कर्तव्य और मानसिक मजबूती रहा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर समाज को ऐसा बेहतर संसार बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जहां प्रेम और सद्गुणों के साथ जीवन के अच्छे सिद्धांतों को महत्व मिले।

धर्म और कर्तव्य के पालन का संदेश

CM विजय ने भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अधर्म और अन्याय के मुकाबले धर्म की जीत होती है। उन्होंने परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपने कर्तव्य का दृढ़ता से पालन करने की प्रेरणा लेने की बात कही।

उन्होंने यह भी कहा कि जीवन की यात्रा धर्म के मार्ग पर मानसिक दृढ़ता और विश्वास के साथ आगे बढ़ानी चाहिए।

मुख्यमंत्री के संदेश में जन्माष्टमी को केवल धार्मिक उत्सव के रूप में देखने के बजाय इससे जुड़े नैतिक और सामाजिक मूल्यों को भी महत्व दिया गया। उन्होंने प्रेम, सद्गुण और अच्छे जीवन मूल्यों को समाज के लिए आवश्यक बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी दी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के संदेश से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जन्माष्टमी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं में निहित निष्काम कर्म की प्रेरणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के दिव्य संदेश मानवता का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं।

PM मोदी ने कामना की कि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और आराधना को समर्पित यह पवित्र अवसर लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति लेकर आए।

उन्होंने लोगों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए अपने संदेश का समापन ‘जय श्री कृष्ण’ के साथ किया।

शुक्रवार को मनाई जा रही कृष्ण जन्माष्टमी

दिए गए विवरण के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी, जिसे गोकुलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, शुक्रवार को मनाई जा रही है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की स्मृति में मनाया जाता है।

हिंदू धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में आधी रात के समय हुआ था। इसी मान्यता के कारण जन्माष्टमी के दौरान मध्यरात्रि पूजा और जन्मोत्सव का विशेष महत्व माना जाता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में इस अवसर पर धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। घरों और मंदिरों में भगवान कृष्ण की प्रतिमाओं को सजाया जाता है तथा विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

उपवास और भजन-कीर्तन से मनाया जाता है पर्व

जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है। श्रद्धालु कृष्ण की बाल स्वरूप की प्रतिमाओं को सजाते हैं और विभिन्न प्रकार के प्रसाद तथा भोग तैयार करते हैं।

कई परिवार घरों में भी जन्माष्टमी की विशेष पूजा करते हैं। मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म का प्रतीकात्मक उत्सव मनाया जाता है।

मथुरा और वृंदावन में विशेष आयोजन

जन्माष्टमी का संबंध विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन से जोड़ा जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार मथुरा भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है, जबकि वृंदावन उनके बाल जीवन और लीलाओं से जुड़ा प्रमुख धार्मिक क्षेत्र माना जाता है।

इन दोनों स्थानों पर जन्माष्टमी के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्सव में हिस्सा लेते हैं।

हालांकि, यह पर्व केवल मथुरा और वृंदावन तक सीमित नहीं है। देशभर के मंदिरों और घरों में जन्माष्टमी अलग-अलग स्थानीय परंपराओं के साथ मनाई जाती है।

दही हांडी भी जन्माष्टमी से जुड़ा प्रमुख आयोजन

जन्माष्टमी के साथ दही हांडी का आयोजन भी कई क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से किया जाता है। इसमें लोग समूह बनाकर ऊंचाई पर लटकी दही से भरी हांडी को तोड़ने का प्रयास करते हैं।

यह आयोजन विशेष रूप से महाराष्ट्र समेत देश के कुछ अन्य हिस्सों में लोकप्रिय है। दही हांडी भगवान कृष्ण के बाल रूप और उनके माखन-दही से जुड़े प्रसंगों की सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ी मानी जाती है।

दिए गए विवरण के अनुसार, वर्ष 2026 में दही हांडी का आयोजन 5 सितंबर को पड़ रहा है।

जन्माष्टमी के संदेश में सकारात्मक ऊर्जा पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay, दोनों ने अपने जन्माष्टमी संदेशों में सकारात्मक मूल्यों पर जोर दिया।

PM मोदी ने भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं से निष्काम कर्म और सकारात्मक ऊर्जा की प्रेरणा का उल्लेख किया, जबकि CM विजय ने धर्म, कर्तव्य, मानसिक दृढ़ता, प्रेम और सद्गुणों की बात की।

दोनों नेताओं के संदेशों में त्योहार को लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर मूल्यों से जोड़ने की कोशिश दिखाई दी।

धार्मिक पर्व के साथ सामाजिक संदेश भी

जन्माष्टमी भारत के प्रमुख धार्मिक त्योहारों में शामिल है और इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ यह पर्व जीवन में कर्तव्य, धर्म, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों की चर्चा का अवसर भी देता है।

CM विजय ने अपने संदेश में इसी पहलू पर विशेष जोर दिया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर प्रेम और सद्गुणों पर आधारित बेहतर दुनिया बनाने की बात कही।

उनके अनुसार, जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी हों, व्यक्ति को अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटना चाहिए और मानसिक मजबूती तथा विश्वास के साथ धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।

देशभर में उत्सव का माहौल

जन्माष्टमी के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों और घरों में विशेष तैयारियां की गईं। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, भजन, उपवास और मध्यरात्रि उत्सव के जरिए भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का स्मरण किया।

मथुरा और वृंदावन जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों के अलावा अन्य शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थानीय परंपराओं के अनुसार जन्माष्टमी मनाई गई।

राजनीतिक नेतृत्व की ओर से जारी शुभकामना संदेशों ने भी इस धार्मिक अवसर को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रखा। मुख्यमंत्री विजय और प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों के जीवन में खुशी, शक्ति, सकारात्मकता और बेहतर मूल्यों की कामना की।

इस तरह 2026 की जन्माष्टमी धार्मिक आस्था के साथ-साथ धर्म, कर्तव्य, निष्काम कर्म, प्रेम और सद्गुणों जैसे जीवन मूल्यों के संदेश के साथ मनाई जा रही है।

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