तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर सियासत तेज हो गई है। मर्री शशिधर रेड्डी ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा परिसीमन विधेयक की प्रति जलाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का यह विरोध राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसे आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर सुनियोजित तरीके से किया गया है।
चेन्नई: तमिलनाडु में परिसीमन (Delimitation) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा नेता Marri Shashidhar Reddy ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के विरोध को “चुनावी स्टंट” करार देते हुए मुख्यमंत्री M. K. Stalin की कड़ी आलोचना की है। रेड्डी ने स्टालिन द्वारा परिसीमन विधेयक की प्रति जलाने की घटना को “राजनीतिक नाटक” बताते हुए कहा कि यह कदम आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर डीएमके और केंद्र सरकार के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। डीएमके का आरोप है कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों के खिलाफ जा सकती है और उनकी राजनीतिक प्रतिनिधित्व क्षमता को प्रभावित कर सकती है। वहीं, भाजपा इस आरोप को खारिज करते हुए कह रही है कि यह मुद्दा पूरी तरह से राजनीतिक रूप से उछाला जा रहा है।
मर्री शशिधर रेड्डी ने कहा कि डीएमके का विरोध वास्तविक चिंता से अधिक राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री स्टालिन द्वारा विधेयक की प्रति जलाना जनता का ध्यान आकर्षित करने और राजनीतिक संदेश देने का प्रयास है। रेड्डी ने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष चेन्नई में आयोजित सर्वदलीय बैठक में, स्टालिन के नेतृत्व में प्रधानमंत्री Narendra Modi से यह मांग की गई थी कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का आवंटन 2026 के बाद भी जारी रखा जाए।
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परिसीमन प्रस्ताव पर भाजपा का पक्ष
भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि वर्तमान प्रस्ताव का उद्देश्य मौजूदा सीटों के वितरण में बदलाव करना नहीं है। इसके बजाय, सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50% तक वृद्धि करने का विचार है। उनके अनुसार, इस कदम का एक प्रमुख उद्देश्य लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण को लागू करना भी है। रेड्डी ने कहा, “यह प्रस्ताव किसी राज्य के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह देशभर में प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने के लिए है।”
रेड्डी ने परिसीमन को हाल ही में लागू हुए महिला आरक्षण कानून से भी जोड़ा। उनका कहना है कि लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए सीटों का पुनर्गठन आवश्यक है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों, विशेषकर यूपीए शासनकाल, पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस मुद्दे को हल करने के लिए पर्याप्त राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।
दक्षिण भारत के खिलाफ साजिश का आरोप खारिज
डीएमके और अन्य दक्षिणी दलों द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए रेड्डी ने कहा कि परिसीमन को “दक्षिण भारत के खिलाफ साजिश” बताना पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने कहा कि एक दक्षिण भारतीय होने के नाते वे इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं और इसे देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने वाला कदम मानते हैं। रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पहल को “राजनीतिक दूरदर्शिता” का उदाहरण बताते हुए उनका आभार भी जताया।









