तरनतारन में नशे की खेप के साथ कॉन्स्टेबल गिरफ्तार, पंजाब पुलिस की निगरानी पर उठे सवाल

तरनतारन में BSF ने कॉन्स्टेबल करनदीप सिंह को नशे की खेप के साथ पकड़ा। NCB जांच कर रही है। जानें, पंजाब पुलिस की निगरानी पर क्यों उठे सवाल।

पंजाब के तरनतारन में बीएसएफ ने कॉन्स्टेबल करनदीप सिंह को नशे की खेप के साथ पकड़ा है। मामले की जांच एनसीबी कर रही है। इससे पहले भी कई पुलिसकर्मियों पर नशा तस्करी और तस्करों को संरक्षण देने के आरोप लग चुके हैं।

पंजाब: नशा तस्करी पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी ने पंजाब पुलिस की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीएसएफ ने सराय अमानत खान इलाके में कॉन्स्टेबल करनदीप सिंह को पकड़ा है। मामले की जांच नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो कर रहा है। इससे पहले भी पंजाब में पुलिसकर्मियों पर नशा तस्करी और तस्करों को कथित संरक्षण देने के आरोप सामने आ चुके हैं।

तरनतारन में कॉन्स्टेबल की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

पंजाब के तरनतारन जिले के सराय अमानत खान इलाके में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने कॉन्स्टेबल करनदीप सिंह को नशे की खेप के साथ पकड़ा। इस मामले की जांच नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) कर रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद हेरोइन कहां से आई थी, इसे कहां पहुंचाया जाना था और इस कथित तस्करी नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है।

जांच के दौरान आरोपी के संभावित संपर्कों, स्थानीय नेटवर्क और नशे की खेप से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, मामले में आरोपी की भूमिका और नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की संलिप्तता जांच के नतीजों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

यह गिरफ्तारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे की तस्करी रोकना सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। ऐसे में किसी पुलिसकर्मी पर ही तस्करी में शामिल होने का आरोप लगना निगरानी व्यवस्था और विभागीय जवाबदेही को लेकर सवाल पैदा करता है।

पहले भी पुलिसकर्मियों पर लग चुके हैं गंभीर आरोप

पंजाब में पुलिसकर्मियों की कथित तौर पर नशा तस्करी से जुड़े होने के मामले पहले भी सामने आए हैं। अप्रैल 2023 में तत्कालीन एआईजी राजजीत सिंह को नशा तस्करों को कथित संरक्षण देने और अन्य गंभीर आरोपों के चलते सेवा से बर्खास्त किया गया था। इसके अलावा पूर्व इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो चुकी है।

अक्टूबर 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह को धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था। ईडी के आरोपों के अनुसार, वह कथित तौर पर नशा तस्करों को संरक्षण देने, रिश्वत लेने और उनके परिवारों से वसूली करने में शामिल था। एजेंसी ने इस मामले में संपत्तियां भी अटैच की थीं।

अप्रैल 2025 में बठिंडा में महिला कॉन्स्टेबल अमनदीप कौर को 17.71 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उसके मामले में भी संपत्ति और संभावित नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच की गई।

नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पंजाब सरकार ने पहले एक ही स्थान पर लंबे समय से तैनात करीब 10 हजार पुलिसकर्मियों के तबादले भी किए थे। इसके बावजूद सामने आ रहे मामले निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत की ओर ध्यान दिलाते हैं।

राजनीतिक दलों ने भी उठाए सवाल

कॉन्स्टेबल करनदीप सिंह की गिरफ्तारी के बाद पंजाब में नशा तस्करी और कथित संरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष परगट सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मामले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीमा पार से होने वाली नशा तस्करी रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाला पुलिसकर्मी ही कथित तौर पर तस्करी में पकड़ा गया है।

उन्होंने नशे के कारोबार को मिलने वाले कथित राजनीतिक और पुलिस संरक्षण पर भी सवाल किए। शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के नेताओं ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं।

हालांकि, किसी एक या कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज मामलों से पूरे पुलिस विभाग की संलिप्तता साबित नहीं होती। फिर भी ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, विभागीय निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। करनदीप सिंह के मामले में नशे की खेप के स्रोत, संभावित सीमा पार संपर्कों, स्थानीय सहयोगियों और वित्तीय लेनदेन की जांच अहम होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किन लोगों की भूमिका रही है।

Leave a comment