रिकॉर्ड घाटे से जूझ रही एयर इंडिया के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। टाटा संस के बोर्ड ने एयर इंडिया में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक, यानी करीब 1.1 अरब डॉलर की नई पूंजी लगाने को मंजूरी दे दी है।
Air India: घाटे और बढ़ते कर्ज से जूझ रही एयर इंडिया को टाटा समूह से बड़ी वित्तीय मदद मिलने वाली है। टाटा संस के बोर्ड ने एयर इंडिया में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की नई पूंजी लगाने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। करीब 1.1 अरब डॉलर के इस निवेश को एयर इंडिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी पिछले वित्त वर्ष में रिकॉर्ड घाटे के साथ भारी कर्ज के दबाव में रही है।
टाटा समूह ने साल 2021 में एयर इंडिया को भारत सरकार से करीब 18,000 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसके बाद प्रस्तावित नया निवेश एयर इंडिया में टाटा संस की सबसे बड़ी पूंजी प्रतिबद्धताओं में से एक होगा। हालांकि, निवेश को कुछ शर्तों से जोड़ा गया है और कंपनी को फंडिंग मांगते समय विस्तृत कारोबारी योजना पेश करनी होगी।
जून में हुई बोर्ड बैठक में निवेश को मंजूरी
रिपोर्ट के अनुसार, टाटा संस के बोर्ड की जून में हुई बैठक में एयर इंडिया और समूह के अन्य कारोबारों में अतिरिक्त पूंजी लगाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने की थी। इसमें टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन भी शामिल हुए थे।
टाटा संस के नियमों के मुताबिक, 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर्स के बहुमत की सहमति जरूरी होती है। प्रस्तावित निवेश को इसी प्रक्रिया के तहत मंजूरी मिली है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी रकम तुरंत एयर इंडिया को ट्रांसफर कर दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया सहित निवेश मांगने वाली कंपनियों को पहले अपने प्रस्ताव के साथ व्यावहारिक बिजनेस केस पेश करना होगा। यानी भविष्य की रणनीति, पूंजी की जरूरत और संभावित कारोबारी परिणामों को ध्यान में रखकर फंडिंग का फैसला किया जाएगा।
एक साल से रुकी थी टाटा की इक्विटी फंडिंग
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एयर इंडिया में टाटा संस ने एक साल से ज्यादा समय से इक्विटी निवेश रोक रखा था। ऐसे समय में नई पूंजी को मंजूरी मिलना कंपनी के लिए अहम माना जा रहा है। एयर इंडिया अपने परिचालन को मजबूत करने, बेड़े के विस्तार और कारोबार को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बड़े निवेश की जरूरत महसूस कर रही है।कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन हालांकि अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, FY26 में एयर इंडिया का घाटा दोगुने से अधिक बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये पहुंच गया। घाटे में इस तेज वृद्धि ने एयरलाइन की वित्तीय स्थिति और टाटा समूह की रणनीति पर भी सवाल खड़े किए हैं।
एयर इंडिया पर करीब ₹40,000 करोड़ का बैंक कर्ज
एयर इंडिया पर बैंकिंग सेक्टर का बकाया भी काफी बढ़ गया है। 11 बैंकों का कुल एक्सपोजर करीब 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है। इनमें भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI का सबसे बड़ा एक्सपोजर करीब 18,500 करोड़ रुपये है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा का एयर इंडिया में लगभग 5,938 करोड़ रुपये का एक्सपोजर बताया गया है।
इतने बड़े कर्ज के बीच 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की नई इक्विटी पूंजी एयरलाइन के लिए वित्तीय दबाव कम करने और भविष्य की विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।
टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस की हिस्सेदारी
एयर इंडिया में टाटा संस की हिस्सेदारी करीब 73.8 फीसदी है, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस के पास लगभग 24.7 फीसदी हिस्सेदारी है। कर्मचारियों के पास SBICAP Trustee Company के माध्यम से करीब 1.5 फीसदी हिस्सेदारी बताई गई है। नई पूंजी के दौरान हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए सिंगापुर एयरलाइंस को भी अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में करीब 3,350 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ सकता है। इससे एयर इंडिया के भविष्य के पूंजी ढांचे में दोनों प्रमुख शेयरधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।










